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MP: प्रशासन की लापरवाही से छिंदवाड़ा में बारिश में लाखों टन अनाज बर्बाद

शेड के नीचे व्यापारियों का कब्जा होने से किसानों को खुले में अनाज के ढेर लगाने पड़ते हैं.

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राज्य
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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा में प्रशासन की लापरवाही के कारण किसानों का लाखों टन अनाज बारिश में भींग कर बर्बाद हो गया. छिंदवाड़ा में हो रही तेज बारिश ने मंडी में अव्यवस्थाओं की पोल भी खोल दी है. मजबूरी में किसानों को खुले में अनाज रखना पड़ता है, जो बारिश में भींग कर बर्बाद हो गया. अनाज भीगने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है.

3 दिन से मंडी बंद होने के कारण वहां अनाज बड़ी मात्रा में था और आज से नीलामी शुरू होने वाली थी. इससे पहले ही अनाज पानी में भींग गया.

छिंदवाड़ा मंडी में खुले में भंडारित किया हुआ किसानों का अनाज अचानक बारिश हो जाने से पूरी तरह से पानी में भीग गया. मक्का, सोयाबीन, गेहूं जैसी फसलें बारिश में बर्बाद हो गईं. अनाज भीग जाने के कारण अब किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा.

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शेड में किसानों के लिए जगह नहीं

मंडी में बनाये गए शेडों में हमेशा व्यापारियों का अनाज रखा रहता है, जिसे तय समय-सीमा में नहीं उठाया जाता. इस कारण शेड में जगह खाली नहीं मिलने पर किसानों को खुले में अनाज रखना पड़ता है.

"बारिश हो गई और अब माल गीला हो गया है. यहां पानी भरा हुआ है. मैं कोशिश करूंगा कि माल अच्छी तरह से सूख जाए और अच्छे भाव में बिक जाए. शेड में जगह नहीं थी इसलिए माल बाहर रखा. सेठ, व्यापारी और किसानों का माल रखा था शेड में, इसलिए वहीं नहीं रख पाया. मंडी ने कोई मदद नहीं की."
श्रीराज कुमार, किसान

मंडी सचिव सुरेश कुमार परते ने कहा कि माल खराब नहीं हुआ है, लेकिन भीगने की वजह से थोड़ी नमी आ गई है. मंडी समिति की व्यवस्था पर उन्होंने कहा, "मंडी समिति के पास पहले तिरपाल थे, लेकिन वर्तमान में नहीं हैं. किसानों को बोला जाता है कि मौसम को देखते हुए अपने तिरपाल लेकर आएं."

प्रबंधन ने मौसम विभाग के अलर्ट पर नहीं दिया ध्यान

मालूम हो कि पिछले तीन दिनों से लगातार मौसम को लेकर ये पूर्वानुमान जारी कर रहा था कि 21 और 22 नवंबर को जिले में बारिश की संभावना बनी हुई है, लेकिन उससे पहले प्रबंधन ने बारिश से बचने के कोई इंतजाम तक नहीं किए. सिर्फ व्यापारियों को नोटिस जारी कर शेड खाली करने के लिए कह दिया, लेकिन व्यापारियों ने प्रबंधन की बात को हर बार की तरह नजरंदाज कर दिया और 21 नवंबर की शाम को अचानक बारिश होने लगी, जिससे खुले में रखा किसानों और व्यापारियों का अनाज भीग गया.

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मंडी में व्यापारियों का बोलबाला

मंडी में व्यापारियों का बोलबाला है, जिसके कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है. नियम के मुताबिक, खरीदी करने के बाद 24 घंटे के भीतर व्यापारियों को अनाज का उठाव करना होता है, जिसके बाद ही वो अगले दिन नीलामी में शामिल हो सकता है, लेकिन ऐसा मंडी में देखने को नहीं मिलता है. व्यापारियों का अनाज शेड में रखा रहता है, उसके बाद भी व्यापारियों द्वारा नीलामी में भाग लिया जाता है. शेड के नीचे व्यापारियों का कब्जा होने से किसानों को खुले में अनाज के ढेर लगाने पड़ते हैं.

शेड में केवल व्यापारियों के माल रखने के आरोप पर मंडी सचिव सुरेश कुमार पर ने कहा कि इसमें दोनों का माल रखा जाता है. उन्होंने कहा कि मंडी में मौजूदा 7 शेड हैं, और इससे तीन गुना ज्यादा माल आता है, जिससे शेड के बाहर भी माल रहता है.

सांसद नकुल नाथ ने जताई चिंता

कुसमेली मंडी में अनाज भीगने को लेकर छिंदवाड़ा सांसद नकुल नाथ ने चिंता जताई है. नकुल नाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा, "कृषि उपज मंडी छिंदवाड़ा में भारी बारिश से किसानों की उपज भीगकर खराब हो रही है. यही हालत प्रदेश की अन्य मंडियों में भी है. दुर्भाग्यपूर्ण है कि मौसम विभाग की जानकारी के बाद भी बीजेपी सरकार ने उपज सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था नहीं की, न कोई तिरपाल, पंडाल है, न ही शेड खाली है, जिससे किसान अपनी उपज खुले में रखने पर मजबूर है."

कृषि मंत्री से मदद की मांग करते हुए सासंद ने लिखा, "कृषि मंत्री कमल पटेल जी से निवेदन करता हूं कि जिन किसानों की उपज खराब हो गयी, उन्हें तुरंत मुआवजा दिया जाए और मंडी प्रांगण में उचित व्यवस्था करवाएं, जिससे आगामी समय में किसानों को परेशानी न उठानी पड़े."

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दूसरी मंडियों का भी ऐसा ही हाल

ऐसा ही नजारा जिले की दूसरी मंडियों का भी बताया जा रहा है. चौरई में भी भारी मात्रा में मक्का खराब हुआ है. वहीं, मंडी प्रबंधन का कहना है कि किसानों को पहले ही सूचना दे दी गई

इनपुट्स- इज़हार हसन खान

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