यूपी पंचायत चुनाव की कहानी-सीट आरक्षित और गांव में कोई SC नहीं

अब क्विंट हिंदी को कई ऐसे मामले मिले हैं जहां SC आबादी न होने या बेहद कम होने के बावजूद सीट आरक्षित है

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राज्य
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UP panchayat election 2021: यूपी पंचायत चुनाव 2021

उत्तरप्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव के लिए लिटमस टेस्ट हैं. लेकिन इन चुनावों में आरक्षण के रोटेशन पॉलिसी पर पेंच फंसा हुआ है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इन चुनावों के लिए फिलहाल आरक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. दरअसल, प्रदेश में 1995 में रोटेशन के तहत पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू हुआ. जिसके तहत SC/ST, OBC एवं महिला कटेगरी में पंचायत सीटों को आरक्षित किया गया. 2010 के चुनाव के दौरान 20 साल में एक चक्र पूरा हुआ. 2015 में प्रक्रिया को नए सिरे से आरम्भ किया गया. लेकिन वर्त्तमान उत्तरप्रदेश सरकार ने 2021 में होने वाले चुनाव में आरक्षण की नीति बदल दी.

15 मार्च तक लगी है रोक

अब क्विंट हिंदी को कई ऐसे मामले मिले हैं जहां अनुसूचित जाति की आबादी न होने या बेहद कम होने के बावजूद सीट को आरक्षित कर दिया गया है. आरक्षण की इस प्रक्रिया पर स्टे लेने समाजसेवी अजय कुमार इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे थे और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 12 मार्च को प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण और आवंटन को अंतिम रूप देने पर 15 मार्च तक रोक लगा दी है.

अपर मुख्य सचिव उत्तरप्रदेश शासन मनोज कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को कोर्ट के इस आदेश से अवगत करा दिया है.

याचिकाकर्ता के एडवोकेट की क्या है दलील?

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोहम्मद अल्ताफ मंसूर बताते हैं-

“पंचायत का जो नया समीकरण है वह संविधान के 73वें संशोधन के बाद 1992-1993 में आए प्रोविजन का हिस्सा है. जिसमें बदलाव पंचायतराज एक्ट 1947 के तहत हुए हैं. इसलिए पंचायत चुनाव में SC, ST और OBC के उम्मीदवार को आरक्षण रोटेशन के तहत 1995 के चुनाव मिलते रहे. रोटेशन के अनुसार जातियों के पॉपुलेशन के डिसेंडिंग ऑर्डर में सीट आरक्षित होती गईं. यह स्थिति 1995 से 2010 तक जारी रही. लेकिन 2015 में यह बात सामने आई कि चार बार बदलाव हो चुका है इसलिए अधिकांश क्षेत्र कवर हो चुका है. साथ ही 2011 की सेंसस से यह बात भी सामने आई कि कई सीटों में डिलिमिटेशन हो गई, नतीजा यह हुआ कि साढ़े सात हजार नई पंचायत क्रिएट हुईं, बड़ी संख्या में पंचायत नगर निगम में मर्ज हूईं. इस कारण से डेमोग्राफी बदल चुकी थी.”

वो आगे कहते हैं कि यह सारी बातों को ध्यान में रखते हुए 2015 में यह बात सामने आई कि पहले जो हुआ उसे खत्म किया जाए और 2015 से प्रक्रिया को नए सिरे से आरम्भ किया जाएगा, जिसके तहत रोटेशन में हाइयर डेवेलप पॉपुलेशन से लोवर डेवेलप का डिसेंडिंग ऑर्डर पर अमल होगा.

“वर्तमान सरकार के अनुसार 1995 से 2015 तक जिन सीटों पर आरक्षण हुआ है उनको छोड़ कर जो आरक्षित नहीं हुई हैं उनको आरक्षित किया जाए.”
मोहम्मद अल्ताफ मंसूर, एडवोकेट

वर्तमान सरकार के इस कदम पर अल्ताफ आगे कहते हैं कि अब कई जगह ऐसा होगा जहां SC की पॉपुलेशन बहुत ही कम है वहां सीट को SC करने का क्या मतलब है.

कुछ गांवों से मिल रही है ऐसी शिकायत

क्विंट हिंदी को भी बिजनौर जिले में कई पंचायत सीटों पर ऐसी ही दिक्कतों के बारे में पता चला है. बिजनौर में कई पंचायत सीटों पर SC पॉपुलेशन है ही नहीं और सीट SC के लिए आरक्षित कर दी गई है.

इच्छावाला गांव, बिजनौर

बिजनौर के गांव इच्छावाला के ग्राम प्रधान रह चुके गुलसनोबर का दावा है कि हमारे गांव में कुल वोट 535 हैं. इनमें तीन वोट SC की हैं, जो फर्जी हैं. यह SC परिवार दस वर्ष पहले ही मुजफ्फरपुर के गांव फिरोजपुर चला गया. वहां यह लोग सारी सुविधा ले रहे हैं. यहां न उनके घर हैं न खेत न ही जमीन. अब इनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया, समझ से परे है. जबकि इन लोगों के नाम मुजफ्फरनगर के गांव फिरोजपुर में भी हैं. इसकी जानकारी मैंने बिजनौर DM साहब को भी दी है. हद तो यह है कि 2015 में पंचायत चुनाव के दौरान 9 वार्ड सीटों में से एक SC के लिए आरक्षित थी. गांव में SC का एक भी परिवार न होने के कारण इस सीट से कोई खड़ा नहीं हो सका और सीट खाली रह गई थी.

अमीपुरसुधा गांव, बिजनौर

बिजनौर के 2400 वोटों वाला 'अमीपुरसुधा' गांव का हाल भी 'इच्छावाला' गांव की तरह है. मुहम्मदपुर देवमल ब्लॉक के इस गांव के प्रधान के प्रतिनिधि बताते हैं कि हमारे गांव में एक भी SC घर नहीं हैं न ही वोटर हैं. ऐसे में हमारे गांव को कैसे SC के लिए आरक्षित कर दी गई. हमने और भी दूसरे गांव वालों के साथ इस मामले पर DM साहब के समक्ष लिखित आपत्ति जताई है. मेरे गांव जैसे हालात किशनबाद, खेड़की, काजीवाला ऐसे दर्जनों गांव के नाम बिजनौर ही नहीं पूरे प्रदेश में मिल जाएंगे." शौकत अली, प्रतिनिधि, प्रधान

मंढाला गांव, बिजनौर

बिजनौर के मंढाला गांव के रहने वाले प्रधान के प्रतिनिधि मोहम्मद जव्वाद बताते हैं कि हमारे गांव में कुल 3812 वोट हैं इनमेंसे 12 वोट एक SC परिवार हैं. इन 12 में से 6 लोग दिल्ली शिफ्ट हो गए हैं. अब बताइए यह संख्या तो 1% भी नहीं है. सरकार को चाहिए कि यदि सीट आरक्षित करनी भी है उसमें पॉपुलेशन की लिमिट होनी चाहिए. अब 12 वोटर पर 3800 लोगों के इस गांव को SC किया गया तो यह गलत है.

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