‘जनता कर्फ्यू’ में NASA ने नहीं रिकॉर्ड किया साउंड, पुरानी है फोटो
सोशल मीडिया पर किया जा रहा है ये दावा
सोशल मीडिया पर किया जा रहा है ये दावा(फोटो: क्विंट हिंदी)

‘जनता कर्फ्यू’ में NASA ने नहीं रिकॉर्ड किया साउंड, पुरानी है फोटो

रविवार, 22 मार्च को पीएम मोदी ने देश में 'जनता कर्फ्यू' का ऐलान किया था. देशभर में लोगों ने तालियां, शंख और थाली बजाकर सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों का अभिवादन किया, जो बिना रुके इस वायरस को रोकने के लिए काम कर रहे हैं.

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दावा

अब, समाजवादी पार्टी के सदस्य अनुराग यादव ने 22 मार्च की शाम 5:01 पर ट्विटर पर एक मैप शेयर किया और दावा किया कि ये भारत में साउंड वेव हैं, जो नासा ने रिकॉर्ड की हैं. इस मैप में जहां कुछ राज्य लाल रंग में मार्क हैं, तो कुछ पीले और हरे रंग में हैं. इससे शायद साउंड वेव की इंटेनसिटी दिखाने की कोशिश की गई है.

(फोटो: स्क्रीनशॉट)

फेसबुक और ट्विटर पर कई लोगों ने इसी दावे के साथ फोटो शेयर की.

(फोटो: स्क्रीनशॉट)
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(फोटो: स्क्रीनशॉट)

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सच या झूठ?

जिस दावे के साथ ये फोटो शेयर की जा रही है, वो गलत है. पहली बात, ये फोटो साउंड वेव नहीं, बल्कि भारत में हीटवेव दिखा रही है. दूसरी, ये फोटो 22 मार्च की नहीं, बल्कि जून 2019 की है.

हमें जांच में क्या मिला?

हमने जांच की तो पाया कि इसी मैप को 'I F*****g Love Science' नाम के एक ब्लॉग के आर्टिकल में पब्लिश हुई थी. इस ब्लॉग की हेडलाइन थी, 'भारत की हीटवेव ने बनाया घातक रिकॉर्ड', और ये आर्टिकल 11 जून 2019 का है.

ब्लॉग में छपे आर्टिकल में भी इस्तेमाल हुआ है यही मैप
ब्लॉग में छपे आर्टिकल में भी इस्तेमाल हुआ है यही मैप
(फोटो: स्क्रीनशॉट)

आर्टिकल में पब्लिश मैप का क्रेडिट 'Copernicus.eu' को दिया गया है.

Copernicus यूरोपियन यूनियन का अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम है जो यूरोप के नागरिकों के लिए प्लैनेट और पर्यावरण के लाभ को देखता है.

हमने गूगल पर 'हीटवेव मैप इंडिया copernicus.eu' कीवर्ड्स डालकर सर्च किया, जिससे हमें Copernicus EU का 4 जून 2019 को किया एक ट्वीट मिला. ट्वीट के मुताबिक, मैप 2 जून से 4 जून 2019 तक की लैंड सर्फेस तापमान को दिखा रहा है.

ये ध्यान देने वाली बात है कि 2019 में ट्वीट किया गया ये मैप एक GIF है और इसमें 'नासा का साउंड वेव का मैप' जैसी कोई जानकारी नहीं है, जैसा कि सोशल मीडिया पर वायरल मैप में लिखी है.

जुलाई 2019 भारत में सबसे ज्यादा गर्मी वाला जुलाई का महीना था. इससे साफ होता है कि एक पुराने GIF का इस्तेमाल कर गलत दावा किया जा रहा है.

कोरोनावायरस को लेकर कई तरह की बातें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं. क्विंट के वेबकूफ टीम ने कई दावों का फैक्ट चेक किया है. वेबकूफ की सभी स्टोरी यहां पढ़ी जा सकती हैं.

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