सावधान: कोरोनावायरस पर कई TikTok यूजर्स फैला रहे फेक न्यूज
कोरोनावायरस पर TikTok यूजर्स फैला रहे फेक न्यूज
कोरोनावायरस पर TikTok यूजर्स फैला रहे फेक न्यूज(फोटो: द क्विंट)

सावधान: कोरोनावायरस पर कई TikTok यूजर्स फैला रहे फेक न्यूज

दुनियाभर में कोरोनावायरस से चार लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. कोविड-19 के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. साथ ही सोशल मीडिया पर इस वायरस को लेकर फेक न्यूज की संख्या भी बढ़ती जा रही है. चीनी कंपनी टिकटॉक भी फेक न्यूज के इस जाल का शिकार हो गई है. टिकटॉक पर कई यूजर्स कोरोनावायरस पर गलत जानकारियों का वीडियो बनाकर शेयर कर रहे हैं.

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टिकटॉक पर फेक न्यूज का भंडार

टिकटॉक पर फेक न्यूज का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. एक शख्स ने टिकटॉक पर दावा किया कि कोरोनोवायरस सिर्फ "8 घंटे" हवा में रह सकता है. 9.1 मिलियन फॉलोअर्स वाले मृदुल मधोक नाम के एक शख्स ने कोरोनावायरस पर कई फर्जी खबरें शेयर की हैं.

मृदुल ने एक वीडियो में दावा किया था कि अगर 22 मार्च को सभी लोग घर में रहते हैं और 'जनता कर्फ्यू' का पालन करते हैं तो 23 मार्च को कोरोनावायरस से छुटकारा मिल जाएगा. मृदुल के इस वीडियो पर पांच मिलियन से ज्यादा व्यू आए.

मृदुल ने आगे दावा किया कि कोरोनावायरस ज्यादातर आठ घंटे ही हवा में रह सकता है, क्योंकि लोगों को सिर्फ सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक यानी कि 14 घंटे के लिए घर पर रहने के लिए कहा गया था. इसके अलावा, उसने लोगों से कर्फ्यू का पालन करने का आग्रह भी किया और अपने घरों से बाहर न निकलने की अपील की.

इसमें फेक न्यूज क्या है?

WHO ने साफ-साफ कहा है कि वायरस हवा में नहीं है, ये वायरस सिर्फ किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से ही फैलता है. इसलिए टिकटॉक पर आठ घंटे वाले दावे का कोई आधार नहीं है.

तान्या भल्ला नाम की एक लड़की ने भी टिकटॉक पर कुछ ऐसा ही दावा किया. 230.7K फॉलोअर्स वाली तान्या भल्ला ने वीडियो में दावा किया कि कोरोनावायरस सिर्फ 8 से 12 घंटे जीवित रहता है. इसके बाद ये वायरस ह्यूमन बॉडी के संपर्क में नहीं आ पाएगा. वायरस खुद-ब-खुद मर जाएगा.

मृदुल ने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें उसने लोगों से विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करने का आग्रह किया. वीडियो में दावा किया गया कि इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी ज्यादा होगी कि कोरोनोवायरस उन्हें छू नहीं पाएगा.

(फोटो: स्क्रीनग्रेब)

ये दावा भी झूठा है. द क्विंट से बात करते हुए इंटरनल मेडिसिन गंगाराम अस्पताल के डॉ नीरज जैन ने कहा, यह कहना गलत है कि विटामिन सी के सेवन से कोरोनावायरस के रोकथाम में मदद मिलेगी. मैक्स हेल्थकेयर के डॉ संदीप बुधिराज ने कहा कि विटामिन सी मदद करता है, लेकिन यह कोरोनोवायरस के लिए नहीं है.

कोरोनावायरस से रोकथाम के लिए डॉक्टर्स और डब्ल्यूएचओ ने एक-दूसरे व्यक्ति को छूने और दूर रहने की सलाह दी है. टिकटॉक यूजर्स इसको लेकर भी टिकटॉक वीडियो बना रहे हैं. लेकिन कुछ यूजर्स डॉक्टर और WHO की सलाह के विपरीत लोगों को हाथ मिलाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.

हेलीकॉप्टर से कोरोनोवायरस की दवा का छिड़काव?

एक दूसरे टिकटॉक और वीगो वीडियो में दावा किया गया कि हेलीकॉप्टर से कोरोनोवायरस की दवा का छिड़काव किया जा रहा है.

कई राज्य सरकारों ने इस बात को अफवाह बताया है. कर्नाटक में सूचना और जनसंपर्क विभाग ने एक स्पष्टीकरण जारी किया और कहा, "सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है."

दिलचस्प बात यह है कि हेलीकॉप्टर की अफवाह पूरी दुनिया में फैली हुई है. फैक्ट-चेकर के अनुसार, ये खबर सबसे पहले इटली में आई और फिर दूसरे देशों में फैली.

पीएम नरेंद्र मोदी को कोरोनो?

इन फेक खबरों के बीच ये भी दावा किया जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी को कोरोनोवायरस है और देश में मीडिया इस बात को छिपा रही है.

(फोटो: स्क्रीनग्रेब)

एक ट्विटर यूजर ने टिकटॉक का वीडियो शेयर किया है. इसमें कहा गया है कि कोरोनावायरस फेफड़ों में पहुंचने से पहला गले में चार दिन गुजारता है. अगर इस बीच वो शख्स गर्म पानी में नमक और सिरका डालकर गरारे करता है तो कोरोनोवायरस खत्म हो सकता है.

हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं है कि फेफड़े तक पहुंचने से पहले कोरोनोवायरस "चार दिनों तक गले में रहता है". इस पर कोई रिसर्च रिपोर्ट नहीं आई है गर्म पानी पीने से कोरोनावायरस नष्ट हो जाता है. AFP फैक्ट-चेक में कहा गया है कि गर्म पानी के गरारे से गले में खराश की समस्या खत्म हो जाती है.

समुद्री खाना खाने से होता है कोरोनावायरस?

1.2 मिलियन फॉलोअर्स वाले AK TECHNICAL POINT @aktechnicalpoint नाम के एक टिकटॉक यूजर ने दावा किया कि मछली या समुद्री खाना खाने से कोरोनावायरस हो जाता है. उसने ये भी कहा कि चीन में लोग मछली सबसे ज्यादा खाते हैं.

जबकि असलियत ये है कि चीन का वुहान शहर जहां सबसे पहले कोरोनावायरस का मामला सामने आया, वहां भी अभी तक इस बीमारी के असली कारण का पता नहीं लग पाया है. सबसे महत्वपूर्ण बात, डब्ल्यूएचओ ने मांसाहारी खाने से परहेज करने के बारे में कुछ नहीं कहा है. .हालांकि 'कच्चा' या 'कम पका हुआ' खाने से परहेज करने की बात कही है

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