अमेरिका ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में दी मान्यता
 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू.फोटो: Reuters

अमेरिका ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में दी मान्यता

फिलिस्तीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दे दी है. ट्रंप के इस फैसले से इजरायल तो खुश है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता नजर आ रही है. इसे पश्चिम एशिया में हिंसा भड़काने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है.

बता दें कि 1948 से लेकर अब तक यरुशलम को लेकर फिलिस्तीन और इजरायल के बीच विवाद चल रहा है. साथ ही यूनाइटेड नेशन से लेकर दुनिया के ज्यादातर देश पूरे यरुशलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते हैं. वहीं दोनों ही देश इजरायल को अपनी राजधानी मानते हैं.

क्या है यरुशलम विवाद?

साल 1948 में इजरायल ने अपनी आजादी का ऐलान किया था. जिसके एक साल बाद यरुशलम का बंटवारा हुआ. लेकिन 1967 में ‘सिक्स डे वॉर’ के नाम से मशहूर इजरायल और अरब देशों के बीच हुई जंग में इजरायल ने पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया.

साल 1980 में इजरायल ने यरुशलम को अपनी राजधानी बनाने का ऐलान किया था. लेकिन यूनाइटेड नेशन ने इस का विरोध किया और यरुशलम पर इजरायल के कब्जे की निंदा की थी. जिसके बाद से यरुशलम को लेकर फिलिस्तीन और इजरायल लगतार एक दूसरे के आमने-सामने है.

यहूदी, ईसाई और मुसलमान का दावा

वहीं यरुशलम को यहूदी, ईसाई और मुसलमान तीनों ही अपनी पवित्र जगह मानते हैं. यरुशलम का टेंपल माउंट यहूदियों का सबसे पवित्र जगह है, वहीं मुसलमानों की तीसरी सबसे पाक मस्जिद अल-अक्सा वहां मौजूद है. इन सब के अलावा ईसाईयों की सपुखर चर्च भी यहां है.

सलमानों की तीसरी सबसे पाक मस्जिद अल-अक
सलमानों की तीसरी सबसे पाक मस्जिद अल-अक
फोटो: Reuters

इजरायल ने अमेरिका का किया शुक्रिया

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को ऐतिहासिक और साहसी फैसला बताया. नेतन्याहू ने एक बयान में कहा,

यह ऐतिहासिक दिन है. यह करीब 70 सालों से इजरायल की राजधानी रहा है. यरुशलम तीन सदियों से हमारी उम्मीदों, हमारे सपनों, हमारी दुआओं के केंद्र में रहा है. यह 3,000 वर्षों से यहूदी लोगों की राजधानी रही है. यहां हमारे पवित्र स्थल हैं, हमारे राजाओं ने शासन किया और हमारे पैंगबरों ने उपदेश दिए.

यरुशलम में नहीं है किसी भी देश का दूतावास

वहीं अमेरिका ने ये भी कहा है कि वो अपनी दूतावास तेल अवीव से यरुशलम शिफ्ट करने जा रही है. बता दें कि फिलहाल इजरायल के तेल अवीव में 86 देशों का दूतावास है. लेकिन यरुशलम पर चल रहे विवाद को लेकर अब तक वहां किसी भी देश का दूतावास नहीं है.

कई देशोें ने जताई चिंता

अमेरिका के इस फैसले से फिलिस्तीन समेत कई देशों में नाराजगी है. तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अमेरिका से कहा है कि अमेरिका यरुशलम में अपने दूतावास खोलता है तो इससे क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ जाएगी.

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने भी यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के ट्रंप के फैसले पर चिंता जताई है. कुछ अरब और मुस्लिम देश भी इस मामले में अपना विरोध जता चुके हैं.