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बाइडेन की पहली विदेश यात्रा में क्या अहम- NATO बैठक, पुतिन से बात

ट्रंप कालीन उदासीनता के बाद क्या बाइडेन वर्ल्ड पॉलिटिक्स में अमेरिका का कमबैक करा पाएंगे?

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<div class="paragraphs"><p>बाइडेन की पहली विदेश यात्रा</p></div>
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बाइडेन अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले विदेश यात्रा के लिए UK के कार्बिज बे,कार्निवाल पहुंचे हैं. यहां उन्होंने UK के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से मुलाकात की. राष्ट्रपति बाइडेन G7 समिट में शिरकत करने के साथ-साथ ब्रुसेल्स में यूरोपीय नेताओं और NATO सहयोगियों से भी मुलाकात करेंगे. आखिर में बाइडेन जेनेवा में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिलेंगे. आठ दिवसीय यह विदेश यात्रा अमेरिका और वर्ल्ड पॉलिटिक्स के लिए काफी अहम है. बाइडेन इस विदेश यात्रा में यह प्रदर्शित करना चाहेंगे कि वर्ल्ड पॉलिटिक्स में 'अमेरिका इज बैक'.

"बोरिस जॉनसन से मुलाकात 'बहुत प्रोडक्टिव' रही"-बाइडेन

गुरुवार को हुई बोरिस जॉनसन से मुलाकात को राष्ट्रपति बाइडेन ने बहुत प्रोडक्टिव बताया. दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने नए अटलांटिक चार्टर पर मिलकर काम करने की भी प्रतिबद्धता जाहिर की, जिसमें साइबर सिक्योरिटी और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे भी शामिल हैं.

" 80 साल पहले हमारी साझेदारी की मजबूत नींव UK के प्रधानमंत्री चर्चिल और अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर करके रखी. यह वादा था कि USA और UK अपने समय की चुनौतियों का सामना साथ करेंगे. आज हम इस सदी की प्रमुख चुनौतियों- साइबर सिक्योरिटी, नई टेक्नोलॉजी, ग्लोबल हेल्थ और जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए पुनर्जीवित अटलांटिक चार्टर का निर्माण कर रहे हैं .हमने जलवायु संकट से निपटने के लिए अपने साझा लक्ष्यों पर भी चर्चा की."
राष्ट्रपति बाइडेन

बाद में बाइडेन ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर डोनेट करने के लिए फाइजर से 50 करोड़ वैक्सीन खरीदेगा और 100 जरूरतमंद देशों को डोनेट करेगा.

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G7 की बैठक अहम रहेगी

राष्ट्रपति बाइडेन बोरिस जॉनसन से मुलाकात करने के बाद G7 के हाइब्रिड समिट में हिस्सा लेंगे ,जिसमें कुछ सदस्य देश वर्चुअली शामिल होंगे.G7 के सदस्य देश अमेरिका,UK, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान हैं. इस बार के G7 समिति की अध्यक्षता UK कर रहा है, जिसने गेस्ट देशों के रूप में समिट में ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया और साउथ अफ्रीका के अलावा भारत को भी न्योता दिया है.

इस बार के समिट का थीम है "बिल्ड बैक बेटर" जिसमें UK ने उन चार प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया है जिस पर मुख्य रूप से बातचीत होगीः

  • कोरोना के वैश्विक रिकवरी का नेतृत्व करना तथा भविष्य की महामारियों के खिलाफ तैयारी

  • मुक्त और निष्पक्ष व्यापार का समर्थन करके भविष्य की समृद्धि को बढ़ावा देना

  • जलवायु परिवर्तन को रोकना और जैव विविधता का संरक्षण

  • साझा मूल्यों और खुले समाज को बढ़ावा देना

बाइडेन इस मौके का प्रयोग अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ अमेरिका के संबंध को मजबूत करने के लिए करेंगे,जिसे पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में नुकसान पहुंचा था.

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NATO पर अमेरिका की ट्रंप कालीन उदासीनता हटेगी?

जब 14 जून को NATO के सदस्य देश बाइडेन का स्वागत कर रहे होंगे तब उनको ट्रंप कार्यकाल की उदासीनता का ख्याल जरूर आएगा. ट्रंप ने ब्रेक्जिट की सराहना की थी ,NATO छोड़ने की धमकी दी थी और NATO को 'अप्रचलित' गठबंधन बताया था.

ऐसे में बाइडेन इस मौके का इस्तेमाल गठबंधन के सदस्य देशों को यह भरोसा दिलाने के लिए करना चाहेंगे कि अमेरिका वर्ल्ड पॉलिटिक्स और ट्रांस अटलांटिक इस गठबंधन के हितों को लेकर गंभीर है. इसमें चीन, रूस, व्यापार विवाद, टैरिफ के मुद्दों, क्लाइमेट और वैक्सीन डिप्लोमेसी के अलावा NATO के मिलिट्री खर्चों और अमेरिका के अफगानिस्तान से बाहर निकलने के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.
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पुतिन के सामने बाइडेन रखेंगे कठिन प्रश्न?

वर्तमान में अमेरिका-रूस संबंध कठिन दौर से गुजर रहा है जिसकी तुलना कुछ विशेषज्ञ शीतकालीन अविश्वास से कर रहे हैं. हाल ही में अमेरिका स्थित विश्व की सबसे बड़ी मीट पैकिंग कंपनी JBS पर हुए साइबरअटैक को कथित तौर पर रूस बेस्ड क्रिमिनल ग्रुप ने अंजाम दिया था.JBS को फिरौती के रूप में 11 मिलियन डॉलर देना पड़ा.

उसके पहले इसी सप्ताह अमेरिका के पानी, ट्रांसपोर्ट और गैसोलीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी रूसी साइबर अटैक हो चुके हैं.बाइडेन पुतिन प्रशासन पर अमेरिकी लोकतंत्र पर हमले का आरोप लगाते रहे हैं.ऐसे में जेनेवा में जब 16 जून को पुतिन और बाइडेन बातचीत के लिए बैठेंगे तब सब की नजर उन पर रहेगी. अमेरिका पुतिन से यूक्रेन की संप्रभुता पर भी कठिन सवाल कर सकता है, जिस पर रूस लगातार चोट करता रहा है.
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इन सब में भारत के लिए क्या ?

G7 में भारत भी गेस्ट नेशन के रूप में वर्चुअली शामिल होगा. ट्रंप ने G7 को विस्तारित करके भारत को उसमें शामिल करने की वकालत पहले की थी. भारत भी ग्लोबल इंस्टिट्यूटों के रिफॉर्म की बात करता रहा है. वैश्विक स्तर पर पावर पॉलिटिक्स में होते चीन के उभार के बीच शायद बाइडेन लाइक माइंडेड देशों को साथ लाना चाहे. क्वाड के बाद भारत को G7 के विस्तार के रूप में शामिल करने का यहां संकेत मिल सकता है.

भारत कोरोना वैक्सीन की किल्लत का सामना कर रहा है. ऐसे में उसकी नजर बाइडेन द्वारा 50 करोड़ वैक्सीनों को लेकर हुई घोषणा पर रहेगी. पिछले सप्ताह ही अमेरिका ने अपने 'ग्लोबल वैक्सीन शेयरिंग' रणनीति में भारत को हिस्सेदार माना था.आरंभिक अनुमान के अनुसार पहले खेप में भारत को 20 से 30 लाख वैक्सीन मिल सकता है.

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