केमिस्ट्री का नोबेल:इन वैज्ञानिकों ने सीधे आपकी जिंदगी पर डाला असर
मोबाइल,लैपटॉप, E-व्हीकल की तस्वीर बदल देने वालों को नोबेल पुरस्कार
मोबाइल,लैपटॉप, E-व्हीकल की तस्वीर बदल देने वालों को नोबेल पुरस्कार(फोटो: Altered By Quint Hindi)

केमिस्ट्री का नोबेल:इन वैज्ञानिकों ने सीधे आपकी जिंदगी पर डाला असर

मोबाइल फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक व्हीकल जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं. इन सभी चीजों में रिचार्जेबल बैटरियों यानी लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में इन बैटरियों के डेवलपमेंट के जरिए 'रिचार्जेबल दुनिया' बनाने वाले 3 वैज्ञानिकों को 2019 का केमिस्ट्री का नोबेल प्राइज दिया गया है.

टेक्सास यूनिवर्सिटी के जॉन बी. गुडइनफ, बिंघमटन यूनिवर्सिटी के एम. स्टैनली विटिंघम और मिजो यूनिवर्सिटी के अकीरा योशिनो को प्राइज के तौर पर 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (912,000 डॉलर) मिलेंगे, जिसे वे आपस में बराबर-बराबर बांटेंगे.

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इन 3 वैज्ञानिकों के योगदान से दुनिया को क्या मिला?

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने इस प्राइज का ऐलान करते वक्त लिखा कि ये सम्मान ‘रिचार्जेबल दुनिया’ के निर्माण के लिए है. लिथियम-आयन बैटरीज हल्की और दोबारा रिचार्ज की जा सकती हैं. इस बैटरियों का इस्तेमाल अब मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप और ई-व्हीकल तक सभी में होता है.

नोबेल कमेटी ने अपने बयान में लिखा है कि लीथियम-आयन बैटरियों के दमपर इन वैज्ञानिकों ने एक बेहतर फॉसिल फ्यूल फ्री दुनिया की बुनियाद रखी है.

20वीं सदी के मध्य में पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की संख्या दुनिया भर में काफी बढ़ गई थी और उनसे निकलने वाले धुंए ने बड़े शहरों में खतरनाक स्मॉग की समस्या बढ़ा दी. इसके साथ ही जब इस बात का अहसास हुआ कि तेल एक सीमित रिसोर्स है तो गाड़ी बनाने वाली कंपनियों और तेल कंपनियों के लिए खतरे की घंटी बज गई. अपने बिजनेस को जिंदा रखने के लिए उन्हें इलेक्ट्रिक गाड़ियों और एनर्जी के दूसरे स्रोतों में निवेश करने की जरूरत थी. फिर शुरू हुआ लिथियम आयन बैटरी पर काम, जिससे जिंदगी की रफ्तार थमे बिना भी पर्यावरण की भी रक्षा की जा सके.

लिथियम-आयन बैटरियों के डेवलपमेंट के लिए किसने क्या किया?

1.एम. स्टैनली विटिंघम

एम. स्टैनली विटिंघम
एम. स्टैनली विटिंघम
(फोटो: ट्विटर)

लीथियम आयन बैटरी के डेवलपमेंट की शुरुआत 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान हुई थी. जब ब्रिटेन में पैदा हुए विटिंघम ऐसी एनर्जी टेक्निक पर काम कर रहे थे जो पेट्रोल-डीजल जैसे फॉसिल फ्यूल से फ्री हों. उन्होंने सुपरकंडक्टर्स पर शोध शुरू किया और एक हाई एनर्जी से भरपूर एलिमेंट की खोज की, जिसका इस्तेमाल उन्होंने लिथियम बैटरी में एक हाई टेक्नोलॉजी कैथोड बनाने के लिए किया.

2. जॉन बी. गुडइनफ

जॉन बी. गुडइनफ
जॉन बी. गुडइनफ
(फोटो: ट्विटर)

जर्मनी में पैदा हुए गुडइनफ ने अनुमान लगाया कि इन कैथोड की क्षमता और भी अधिक होती अगर इसे मैटल सल्फाइड के बजाय मैटल ऑक्साइड का उपयोग करके बनाया जाता.

3. अकीरा योशिनो

अकीरा योशिनो
अकीरा योशिनो
(फोटो: ट्विटर)


जापान में पैदा हुए योशिनो ने इस कैथोड के आधार पर 1985 में व्यावसायिक रूप से पहली सक्षम लिथियम आयन बैटरी बनाई, और ऐसे बन गई दुनिया की सबसे 'पावरफुल बैटरी'.

केमेस्ट्री के नोबेल प्राइज से जुड़े खास फैक्ट्स

  • 1901 से लेकर 2019 तक केमेस्ट्री में 111 नोबेल प्राइज दिए जा चुके हैं
  • अबतक 5 महिलाओं को ये प्राइज मिल चुका है
  • फ्रेडरिक सेंगर को साल 1958 और 1980 में केमेस्ट्री का नोबेल प्राइज दो बार मिल चुका है
  • फ्रेडरिक जूलियट सबसे कम साल में ये प्राइज जीतने वाले शख्स हैं, उन्होंने 35 साल की उम्र में ये सम्मान हासिल किया था.
  • इस साल अवॉर्ड हासिल करने वाले 97 साल के जॉन बी. गुडइनफ सबसे उम्रदराज नोबेल प्राइज विनर बन गए हैं.

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