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Heat Wave का असर: फ्लोरिडा में 4 साल से पैदा नहीं हो रहे मादा कछुए

Sea Turtle Florida: तापमान 31 डिग्री से ज्यादा है तो मादा कछुए के पैदा होने की संभावना ज्यादा रहती है.

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Heat Wave का असर: फ्लोरिडा में 4 साल से पैदा नहीं हो रहे मादा कछुए
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दुनिया भर में क्लाइमेट चेंज (Climate Change) को इंसान भले ही नजरअंदाज कर रहे हों, लेकिन बेजुबानों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. असर ऐसा कि एक पूरी की पूरी जीव-प्रजाती का लैंगिक संतुलन डगमगाने लगा है. यहां हम बात सुमद्री कछुओं (Sea Turtle) की कर रहे हैं.

वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पता लगाया है कि तापमान बढ़ने से अब केवल मादा प्रजाती के कछुए ही पैदा हो रहे हैं. वैज्ञानिकों ने बताया है कि पिछले 4 साल में फ्लोरिडा के बीच (Beach) पर पैदा होने वाले सभी कछुए मादा प्रजाति के हैं.

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हीट वेव का असर

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों का कहना है कि महिला कछुओं के प्रजनन में बढ़ोतरी भीषण हीटवेव का नतीजा है. वैश्विक जलवायु संकट के कारण समुद्र किनारे की रेत गर्म हो रही है जिसके चलते मादा कछुए ज्यादा पैदा हो रहे हैं.

नेशनल ओशन सर्विस के अनुसार, अगर कछुए का अंडा 27 डिग्री सेल्यियस से कम तापमान में तैयार हो रहा है तो नर कछुआ पैदा होगा, लेकिन अगर यही तापमान 31 डिग्री से ज्यादा है तो मादा कछुए के पैदा होने की संभावना ज्यादा रहती है. अगर तापमान इन दोनों के बीच में रहता है तो कोई भी कछुआ पैदा हो सकता है.

शोधकर्ताओं ने ये भी पाया की रेत का तापमान जितना गर्म होगा, मादा कछुए के पैदा होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी. रॉयटर्स को दिए एक बयान में, फ्लोरिडा के मैराथन में टर्टल अस्पताल की प्रबंधक बेट्टे जिर्केलबैक ने कहा कि

"डरावनी बात ये है कि फ्लोरिडा में पिछले चार साल सबसे ज्यादा गर्म रहे हैं....समुद्री कछुए के प्रजनन और अंडों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों को पिछले चार साल से कोई नर समुद्री कछुआ नहीं मिला है...नर-मादा कछुओं के बीच बिगड़ता अनुपात वैज्ञानिकों के बीच एक बढ़ती हुई चिंता है. इससे समुद्री कछुओं की आबादी अंततः कम हो जाएगी."
बेट्टे जिर्केलबैक, फ्लोरिडा में टर्टल अस्पताल की प्रबंधक
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लिंगानुपात बिगड़ना इकलौती समस्या नहीं

मियामी चिड़ियाघर के हाल ही में खोले गए एक सी टर्टल अस्पताल के मेलिसा रोसेल्स रोड्रिग्ज ने रॉयटर्स को बताया, "आप अगले कुछ वर्षों में उनकी (कछुओं की) आबादी में तेजी से गिरावट देखने जा रहे हैं, क्योंकि आनुवंशिक विविधता नहीं है...नर-मादा अनुपात ठीक न होने के चलते सफल प्रजनन नहीं होगा."

मादा कछुओं की बढ़ती संख्या का सामना करने के अलावा, सी टर्टल हॉस्पिटल वर्तमान में फाइब्रोपैपिलोमैटोसिस से भी जूझ रहा है. ये समुद्री कछुओं के बीच एक संभावित घातक बीमारी है. इस बीमारी में आंख और मुंह के साथ-साथ शरीर पर फूलगोभी जैसे ट्यूमर बन जाते हैं. ये ट्यूमर आंतरिक अंगों में भी बन सकता है. जिर्केलबैक ने कहा कि अब पूरे फ्लोरिडा में ऐसे अस्पतालों की जरूरत है.

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टॉपिक:  Climate change 

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