H-1B पर ‘आक्रामक’ ट्रंप, वीजा धारकों ने कहा- अब ये ‘न्यू नॉर्मल’

भारतीय आईटी कंपनियां कथित तौर पर अमेरिका के H-1B वीजा सिस्टम की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं.

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दुनिया
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H-1B पर ‘आक्रामक’ ट्रंप, वीजा धारकों ने कहा- अब ये ‘न्यू नॉर्मल’
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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को H-1B वीजा को लेकर नए नियमों का ऐलान किया. इसके बाद भारत समेत विदेश से आने वाले स्किल्ड वर्कर्स के लिए जारी किया जाने वाला वीजा सीमित हो जाएगा. भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स में ये वीजा काफी लोकप्रिय है.

भारत 'कनेक्शन'

अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, जितना ये वीजा जारी किया जाता है, उसे हासिल करने वालों में से 70 फीसदी भारतीय हैं. ऐसे में भारतीय आईटी कंपनियां कथित तौर पर अमेरिका के H-1B वीजा सिस्टम की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं. 2020-2021 के लिए करीब दो-तिहाई H-1B एप्लीकेशन भारत से हैं. भारत से कुल 184,000 एप्लीकेशन गई हैं.

पिछले कुछ सालों में अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों ने H1B का इस्तेमाल पहले ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए भी किया, बाद में अमेरिकी नागरिक बनने के लिए. इन कर्मचारियों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों और चीन के पेशेवरों की रही. टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नाडेला और गूगल के सुंदर पिचाई भी कुछ ऐसे ही नाम हैं. भारतीय पेशेवरों के ऐसे ही योगदान के कारण टेक इंडस्ट्री और अमेरिका की पिछली सरकारें इस वीजा नीति का समर्थन करती आईं हैं.

नए नियमों के तहत विदेश से आने वाले स्किल्ड वर्कर्स के लिए H-1B वीजा जारी करने में कटौती और 'डेटा' का हवाला देते हुए सैलरी बेस्ड एंट्रीज को सख्त कर दिया गया है. दलील ये भी है कि H-1B गैर-अप्रवासियों की वजह से 500,000 से अधिक अमेरिकियों ने अपनी नौकरी खो दी है.

पत्रकारों के साथ बातचीत में कार्यवाहक डिप्टी डीएचएस सेक्रेटरी केन कुकसिनेली ने कहा कि जिन लोगों ने एच 1 बी वीजा के लिए आवेदन किया है, उनमें से एक तिहाई को नए नियमों के तहत वीजा जारी करने से मना किया जाएगा.

'न्यू नॉर्मल है ऐसी सख्ती'

अमेरिकी चुनाव से पहले वीजा को लेकर सख्ती बरतना विदेशी कामगारों के लिए सामान्य बात हो गई है. न्यूयॉर्क शहर के जेपी मॉर्गन साइट पर एक H-1B वीजा वर्कर ने आईएएनएस को बताया, "अगर यह नहीं हुआ होता तो हैरानी होती." उसने आगे कहा कि सैलरी रिक्वायरमेंट ट्रंप प्रशासन के पक्ष में एक 'गेमचेंजर' होगी. कई H-1B वीजा धारकों का भी कुछ ऐसा ही मानना है कि वे यह सब पहले भी देख चुके हैं.

ये नया झटका ऐसे समय में आया है जब विदेशी कामगारों के लिए वीजा निगरानी बढ़ा दी गई है. अमेरिकी श्रम विभाग (डीओएल), अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) और होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) नए नियमों को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं. न्यूनतम वेतन आवश्यकताओं के लिए श्रम विभाग के संशोधन गुरुवार से प्रभावी हो जाते हैं और डीएचएस का H-1B संशोधन 60 दिनों में आ जाएगा.

होमलैंड सिक्योरिटी डिर्पाटमेंट का क्या कहना है ?

अमेरिकी श्रम विभाग ने कहा, "जब एच-1बी, एच-1बी1, या ई-3 वीजा के लिए मांग की जाती है, तो अमेरिकी एंप्लॉयर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे रोजगार की अवधि के दौरान गैर-अप्रवासी श्रमिकों को भुगतान करेंगे, प्रचलित मजदूरी या वास्तविक वेतन समान अनुभव और योग्यता वाले अन्य कर्मचारियों को भुगतान किया जाए."

होमलैंड सिक्योरिटी डिर्पाटमेंट के एक बयान में कहा गया है कि डेटा से पता चलता है कि अमेरिका में पांच लाख से अधिक H-1B गैर-अप्रवासियों का इस्तेमाल अमेरिकी कामगारों को विस्थापित करने के लिए किया गया है.

(इनपुट: IANS से भी)

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