नेत्रहीनों को पढ़ने का हुनर देने वाले लुई ब्रेल की 10 बड़ी बातें
(फोटो: Wiki)
(फोटो: Wiki)लुई ब्रेल ने नेत्रहीनों की जिंदगी में नया उजाला किया था

नेत्रहीनों को पढ़ने का हुनर देने वाले लुई ब्रेल की 10 बड़ी बातें

ब्रेल लिपि को एक ऐसे शख्स के तौर पर दुनियाभर जाना जाता है, जिसने अपने और दुनिया के तमाम नेत्रहीनों को पढ़ने के लिए नई तकनीक का ईजाद किया. ब्रेल लिपि' के अविष्कारक लुई ब्रेल को नेत्रहीनों के बीच मसीहा के तौर पर माना जाता है. साल 1809 में फ्रांस के एक छोटे से कस्बे कुप्रे में पैदा हुए लुई ब्रेल के बारे में जानते हैं कुछ खास बातें.

  1. लुई ब्रेल के पिता साइमन रेले ब्रेल शाही घोड़ों के लिए काठी बनाने का काम करते थे. आर्थिक जरूरतों और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण साइमन पर काम का अधिक बोझ होता था, इसलिए उन्होंने 3 साल के लुइस को अपने साथ काम पर लगा लिया.
  2. अपने पिता के औजारों से खेल रहे लुई के आंख में एक औजार लग गया. चोट लगने के बाद उनकी आंख से खून निकलने लगा. परिवार के लोगों ने इसे मामूली चोट समझकर कर आंख पर पट्टी बांध दी. वक्त बीतने के साथ लुई बड़े होते गए और घाव गहरा होता चला गया. 8 साल की उम्र में पहुंचते-पहुंचते लुइस पूरी तरीके से नेत्रहीन हो गए.
  3. लुई ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखने की बात परिवारवालों को कही. लुई के परिवार ने उनका दाखिला एक चर्च के पादरी की मदद से पेरिस के ब्लाइंड स्कूल में कराया.
  4. 16 साल की उम्र में लुई ब्रेल ने स्कूल में गणित, भूगोल और इतिहास विषयों में महारथ हासिल कर शिक्षकों और छात्रों के बीच अपनी एक खास जगह बना ली.
  5. 16 साल की ही उम्र में यानी साल 1825 में लुई ने एक ऐसी लिपि का आविष्कार किया जिसे ब्रेल लिपि कहा जाता है. लुई ने लिपि का आविष्कार कर नेत्रहीन लोगों की शिक्षा में क्रांति ला दी.
  6. ब्रेल लिपि का विचार लुई के दिमाग में फ्रांस की सेना के कैप्टन चार्ल्र्स बार्बियर से मुलाकात के बाद आया. चार्ल्स ने सैनिकों की अंधेरे में पढ़ी जाने वाली नाइट राइटिंग और सोनोग्राफी के बारे में लुई को बताया था. ये लिपि कागज पर उभरी हुई होती थी और 12 प्वाइंट्स पर बेस्ड थी. लुई ब्रेल ने इसी को आधार बनाकर उसमें संशोधन कर उस लिपि को 6 बिंदुओं में तब्दील कर ब्रेल लिपि का आविष्कार कर दिया.
  7. लुई ने ब्रेल लिपि में 12 की बजाए 6 प्वाइंट्स का इस्तेमाल किया और 64 अक्षर और चिन्ह बनाए. लुई ने लिपि को कारगार बनाने के लिए विराम चिन्ह और संगीत के नोटेशन लिखने के लिए भी जरूरी चिन्हों का लिपि में जोड़ा.
  8. 1851 में उन्हें टी.बी. की बीमारी हो गई जिससे उनकी तबियत बिगड़ने लगी और 6 जनवरी 1852 को महज 43 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उनके निधन के 16 वर्ष बाद 1868 में रॉयल इंस्टिट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ ने इस लिपि को मान्यता दी.
  9. लुई ब्रेल ने केवल फ्रांस में ख्याति अर्जित की बल्कि भारत में भी उन्हें वहीं सम्मान हासिल है जो देश के दूसरे नायकों को मिलता है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत सरकार ने 2009 में लुइस ब्रेल के सम्मान में डाक टिकिट जारी किया था.
  10. लुई की मौत के 100 साल पूरे होने पर फ्रांस सरकार ने दफनाए गए उनके शरीर को बाहर निकाला और राष्ट्रीय ध्वज में लपेट कर पूरे राजकीय सम्मान से दोबारा दफनाया.

(इनपुट: IANS)

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