विकास, विश्वास, एकता, गौरव, आदर्श... ये सब गुमशुदा हैं

कुछ समय से एकता भी लापता हैं, उसे ढूंढना मुश्किल हो रहा है

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ये जो इंडिया है ना... यहां के कुछ लोग लापता हैं हमारे पास इनमें से कुछ लोगों के नाम और कुछ डिटेल्स हैं अगर आपके पास उनकी कोई जानकारी हो तो हमें बताइएगा.

ये हैं एकता

कुछ समय से एकता भी लापता हैं, उसे ढूंढना मुश्किल हो रहा है. कुछ लोग हैं जो कपड़ों से लोगों को पहचान सकते हैं लेकिन एकता के मामले में ये इतना आसान नहीं कभी एकता घूंघट डालती है, कभी हिजाब, कभी जींस-कुर्ता, सलवार कमीज, कोल्हापुरी चप्पल, आंखों में काजल, स्कूटर पर सवार, अपने मोबाइल से चिपकी हुई. वो विराट कोहली फैन हैं एकता कोई भी हो सकती है, हिंदू है, मुसलमान है, कहना मुश्किल है. एकता लौट आए बस उम्मीद कर सकते हैं.

दो और भाई भी लापता हैं तौफीक और सलमान, तौफीक यानी सौहार्द, भाईचारा. सलमान को तो आप जानते ही हैं इसका मतलब है सुरक्षा ताज्जुब नहीं कि भाईचारे के गायब होने के साथ ही क्यों सलमान यानी सुरक्षा का वो अहसास कहीं गुम हो गया है.  

ये है विवेक, मतलब सोच समझ

जिसे भले और बुरे की समझ हो हां, वही विवेक गायब है, भले-बुरे की समझ उर्फ विवेक तब गायब हुआ है जब हमें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी.

ये है सिद्धांत, मतलब उसूल, नियम कानून

हमें उम्मीद रहती है कि इसी पर राज होगा. सिद्धांत यानी आदर्श अब लापता घोषित हो चुके हैं. जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जहां-तहां गिरफ्तार किया जा रहा है, जब उनके साथ पुलिस हिरासत में हफ्तों तक ज्यादती हो रही है. फिर और कोई आरोप नहीं होने के कारण छोड़ दिए जा रहे हैं और जब खुलेआम जहर उगलने वाले विधायक और सांसदों को कोई कुछ नहीं कह रहा है. तो समझ में आ जाता है कि सिद्धांत यानी आदर्श को ढूंढना बेईमानी है. खास बात ये है कि सिद्धांत का हमनाम आदर्श अरे मूल्य...उफ, तुम्हारे वो उसूल, वो आदर्श....हां, वही शख्स वो तो पूरी तरह गायब है.

ये है इमरान, यानी खुशहाली

वो भी लंबे समय से गायब है, हर तीन महीने बीतने के साथ यानी हर क्वार्टर में भारत की जीडीपी गिरती जा रही है. जब पिछली बार सुना था तो ये 4.5% पर था.

यानी 6 साल में सबसे कम इससे इतना तो पता चल ही गया होगा कि इमरान यानी खुशहाली को ढूंढना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता जा रहा है. जिस वक्त इमरान लापता हुआ लगभग उसी समय और शख्स गायब हो गया सका नाम है विकास...जी हां, बहुत सारे लोगों ने विकास के लापता होने की शिकायत भी की है. भारत के करोड़ों बेरोजगारों ने लाखों व्यापारियों ने, उत्पादकों ने यहां तक कि नौकरीपेशा लोगों ने, इन सबने पूछा है कि विकास कहां है, मिल नहीं रहा पूरे देश में हमने खोजा है, विकास नहीं मिला. शहरों में, कस्बों में, गांवों में-विकास नहीं मिला फैक्ट्रियों में, खेतों में...विकास नहीं दिखा.

ये है गौरव, मतलब फक्र, नाज

गौरव गायब है और इसका संबंध है, विकास, विश्वास और शायद सिद्धांत के लापता होने से जहां विकास नहीं है, विश्वास नहीं है. सिद्धांत या नियम कानून नहीं है वहां गौरव कहां मिलेगा.

ये है गरिमा यानी आबरू

मर्यादा वो तो अपनी तीन बहनों के साथ लापता हो गई उनके नाम हैं खुशी, रौनक और जन्नत उन्हें आखिरी बार अगस्त 2019 में देखा गया था. जब वो कश्मीर में छुट्टियां मना रही थी. हां, तभी से गरिमा, खुशी, रौनक और जन्नत लापता हैं. जब इंटरनेट नहीं है, कारोबार बंद है सारे नेता नजरबंद हैं और आम कश्मीरियों को गद्दार बताया जा रहा है. तो कोई ताज्जुब नहीं कि न गरिमा, न खुशी और न रौनक मिल रही है.

कश्मीर में जन्नत नहीं है, नहीं है, नहीं है. जन्नत की जगह बैरिकेड हैं, पाबंदियां हैं और ये है जोया. जोया यानी जिंदगी मुझे दुख हो रहा है ये बताने में कि जोया भी गायब है. मुझे उसका ख्याल रखना चाहिए था. हम सबको उसकी निगहबानी करनी चाहिए थी क्योंकि जोया नाजुक है. उसे संभालने की जरूरत है. क्योंकि जोया, जिंदगी है जोया तभी है, जब हम हैं

हम सब हैं अगर एक दूसरे से नजरें फेर लें एक दूसरे से अलग होने लगें, एक दूसरे का ख्याल न रखें तो ये जो इंडिया है ना... ये भी लापता हो सकता है...

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