(फोटो: The Quint)
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लोगों को क्यों नहीं सुहाई अखिलेश के स्मार्टफोन की घंटी?

अगर मैं आपसे पूछूं कि क्या आपको मुफ्त का स्मार्टफोन चाहिए, तो जाहिर तौर पर आपका जवाब होगा 'हां'. तो जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोगों को मुफ्त स्मार्टफोन देने का वादा कर रहे हैं, तो हर कोई उसे लपकना चाहेगा. ऐसे में मुख्यमंत्री की समाजवादी स्मार्टफोन योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए तो लोगों की भीड़ लगी होगी.

इसी जिज्ञासा से मैंने समाजवादी स्मार्टफोन योजना का होम पेज खोला. सबसे ऊपर लिखा है, समाजवादी स्मार्टफोन, स्मार्ट युवा, स्मार्ट प्रदेश, उत्तर प्रदेश

यानी स्मार्टफोन के बहाने सूबे के युवा वोटर को लुभान की कोशिश है. पेज पर बनी तस्वीर के बायें हिस्से में महिलाओं की एक लंबी कतार है, जबकि दायें हिस्से में एक शख्स मुस्कुराती महिला को उसके दरवाजे पर मोबाइल फोन थमा रहा है.

पेज के बीचोंबीच सपने जगाता एक नारा है- ना कोई कतार ना लंबा इंतजार, फोन पहुंचेगा आपके द्वार, हाथों में होंगे अवसर अपार.

पेज के निचले हिस्से में 'पंजीकरण करें' का निमंत्रण देता एक बटन है.



(फोटो: बेवसाइट का स्‍क्रीनग्रैब)
(फोटो: बेवसाइट का स्‍क्रीनग्रैब)

मैंने रजिस्‍ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की. नाम, अभिभावक का नाम, जन्म तिथि‍ और मौजूदा मोबाइल नंबर के अलावा मुझे ये प्रमाणित करना पड़ा कि मेरी सालाना वार्षिक कमाई 6 लाख रुपये से कम है और खुद मैं या मेरे अभिभावकों में से कोई क्लास-1 या क्लास-2 का सरकारी अफसर नहीं है.

ये तमाम जानकारी देने के बाद अगला पेज खुला, तो मैं हैरान रह गया. मेरी आवेदन संख्या थी 11 करोड़ 40 लाख 13 हजार 793.

उत्तर प्रदेश में वोटरों की कुल तादाद 13 करोड़ 43 लाख 51 हजार 297 है. ऐसे में 11.40 करोड़ की संख्या मुहाने पर खड़े चुनावों के नजरिये से बेहद अहम हो जाती है. ज्यादा जानकारी के लिए मैंने सूचना तकनीकी मंत्रालय के सचिव संजीव सरन को फोन लगाया और उनसे बात करने के बाद मेरा सारा उत्साह थोड़ा कम हो गया. संजीव सरण ने बताया:

करोड़ों की संख्या का मतलब सिर्फ ये है कि इतने लोगों ने पेज पर हिट किया है. 9 जनवरी तक समाजवादी स्मार्टफोन योजना में असल रजिस्ट्रेशन करीब 1 करोड़ 30 लाख हैं. उनमें से 95 फीसदी की उम्र 18 से 35 साल के बीच है.
(फोटो: बेवसाइट का स्‍क्रीनग्रैब)
(फोटो: बेवसाइट का स्‍क्रीनग्रैब)

यानी निशाना लगा तो ठीक युवाओं पर है, लेकिन सवाल ये है कि अब तक रजिस्ट्रेशन करवाने वालों की तादाद कुल वोटरों का महज दस फीसदी ही क्यों है. एक अधिकारी ने क्विंट हिंदी को बताया:

मियाद खत्म होने तक कुल रजिस्ट्रेशन डेढ़-पौने दो करोड़ तक पहुंच सकता है.

दिलचस्प बात है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी स्मार्टफोन योजना 10 अक्टूबर को लॉन्‍च की थी और उसकी आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी. लेकिन 26 दिसंबर को हुई समीक्षा में सरकार ने पाया कि महज 1 करोड़ 9 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया, जो कि उम्मीद से बेहद कम था.

योजना को फ्लॉप के ठप्पे से बचाने के लिए अंतिम तारीख 31 जनवरी तक बढ़ा दी गई. शिक्षा मित्र, लेखपाल, आंगनबाड़ी की महिलाओं, होमगार्ड, आशा बहू जैसे गांव-देहात में काम करने वाले वर्कर्स को रजिस्ट्रेशन में लोगों की मदद के निर्देश दिए गए. लेकिन लोगों ने मुफ्त के इस फोन की घंटी बजाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई.

दोबारा उसी सवाल पर आते हैं कि मुफ्त की कोई चीज न छोड़ने की आदत के बावजूद आखिरकार अखिलेश यादव के फोन पर लोग क्यों नहीं लपके. दरअसल स्मार्टफोन रजिस्ट्रेशन की कुछ शर्ते हैं.

  • आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए
  • आवेदक की उम्र 1 जनवरी 2017 को 18 वर्ष या इससे ज्यादा होनी चाहिए
  • आवेदक की सालाना पारिवारिक आय 6 लाख रुपये से कम होनी चाहिए
  • आवेदक कम से कम हाई स्कूल पास होना चाहिए
  • आवेदक या उसके माता-पिता क्लास-1 या क्लास-2 के शासकीय अधिकारी न हों

यूपी सरकार के एक अफसर के मुताबिक सूबे में हाई स्कूल या उससे ज्यादा पढ़े-लिखे करीब 3.25 करोड़ लोग हैं. यानी 31 जनवरी तक पौने दो करोड़ आवेदन आ भी गए, तो कुल योग्य लोगों का आधा भर होंगे.

अब आते हैं समाजवादी स्मार्टफोन योजना से लोगों की बेरुखी की वजहों पर.

अखिलेश ने पूरे नहीं किए कई सारे वादे

2012 के चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी ने दसवीं पास तमाम बच्चों को टैबलेट देने का वादा किया था, लेकिन टैबलेट कभी नहीं बंटे.

बारहवीं पास बच्चों को लैपटॉप बांटने की घोषणा भी हुई थी, लेकिन 60 लाख योग्य बच्चों में से सिर्फ 18 लाख को ही लैपटॉप मिल पाए.

इंटरनेट कनेक्टिविटी और जागरूकता

समाजवादी स्मार्टफोन के लिए आवेदन सिर्फ वेबसाइट पर किया जा सकता है और यूपी के अंदरूनी इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का हाल बेहाल है.

फाइलों में शिक्षा का आंकड़ा जो भी हो, लेकिन असल में जागरूकता की बेहद कमी है.

समाजवादी पार्टी का घमासान

अक्टूबर में योजना लॉन्‍च करने के बाद घरेलू दंगल में उलझे अखिलेश यादव इसके प्रचार पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए.

झगड़े से उकताए शहरी वोटरों ने स्मार्टफोन योजना को महज चुनावी स्टंट मानकर नजरअंजाद कर दिया.

तो साफ है कि चुनावी लॉलीपॉप से वोटरों को पटाने की स्कीम हर बार नहीं चलती. अभी उत्तर प्रदेश में तमाम पार्टियों के घोषणापत्र आने बाकी हैं. देखना दिलचस्प होगा कि सियासी दल समाजवादी स्मार्टफोन योजना से सबक लेते हुए वोटर और मुद्दों के प्रति गंभीरता दिखाएंगे या फिर एक बार फिर सिर्फ चुनावी चारा फेंकेंगे.