याचिका

स्टॉकिंग को बनाएं एक गैर-जमानती अपराध

क्या आप जानते हैं कि भारतीय आपराधिक कानून में स्टॉकिंग एक जमानती अपराध है? जिसकी वजह से स्टॉकिंग के आरोपी को बिना किसी गंभीर जांच के जमानत मिल जाती है. इससे पीड़ितों पर एसिड अटैक और हत्या का खतरा और बढ़ जाता है.

क्विंट ने सांसद डॉ. शशि थरूर और वरिष्ठ एडवोकेट कामिनी जायसवाल के साथ हाथ मिलाया है ताकि स्टॉकिंग को गैर-जमानती अपराध बनाए जाने से जुड़ा प्राइवेट बिल संसद में पेश किया जा सके.

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"वो लगातार 12वें दिन मेरा पीछा कर रहा था"
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केस: प्रियदर्शिनी मट्टू की स्टॉकिंग और हत्या

  • 25 फरवरी 1995 संतोष सिंह बाइक पर प्रियदर्शिनी मट्टू का पीछा करता है. उसे रोकने की कोशिश करता है. प्रियदर्शिनी ने शिकायत दर्ज कराई.
  • 16 अगस्त 1995 संतोष के मट्टू के घर में घुसने की कोशिश पर एक और शिकायत दर्ज
  • 27 अक्तूबर 1995 मट्टू ने दिल्ली यूनिर्सिटी लॉ फैकल्टी के डीन को दी शिकायत
  • 30 अक्तूबर 1995 संतोष ने डीयू में मट्टू के खिलाफ शिकायत दी. एक साथ दो कोर्स का आरोप
  • 1 नवंबर 1995 डीयू ने मट्टू को कारण बताओ नोटिस जारी किया.
  • 6 नवंबर 1995 कैंपस पर बांह पकड़ने के बाद, मट्टू, संतोष पर एक और शिकायत दर्ज करती हैं
  • 23 जनवरी 1996 सुबह 9 बजे- मट्टू के सुरक्षाकर्मी राजिंदर सिंह वक्त पर नहीं पहुंचते. मट्टू, पैरेंट्स के साथ घर से निकलती हैं.
  • 23 जनवरी 1996 सुबह 10.30 बजे- मट्टू लॉ फैकल्टी पहुंचती हैं
  • 23 जनवरी 1996 सुबह 11.15 बजे- मट्टू ने क्लास अटेंड की, सुरक्षाकर्मी राजिंदर सिंह कैंपस पहुंचे
  • 23 जनवरी 1996 दोपहर 1.45 बजे- राजिंदर सिंह को पुलिस स्टेशन छोड़ने के बाद मट्टू घर पहुंचीं
  • 23 जनवरी 1996 दोपहर 2.30 बजे- घर में काम करने वाला वीरेंद्र प्रसाद घर से बाहर चला गया
  • 23 जनवरी 1996 शाम 4.50 बजे- मट्टू के पड़ोसी ने संतोष को उसके फ्लैट के पास देखा
  • 23 जनवरी 1996 शाम 4.55 बजे- वीरेंद्र घर लौटता है, फार्मेसी के लिए निकलता है, वापस आता है और कुत्ते को घुमाने ले जाता है
  • 23 जनवरी 1996 शाम 5.30 बजे- मट्टू के पड़ोसी, एडवोकेट ओपी सिंह ने संतोष को बाइक पर निकलते देखा
  • 23 जनवरी 1996 शाम 5.40 बजे- सुरक्षाकर्मी राजिंदर सिंह, कॉन्स्टेबल देव के साथ मट्टू के घर पहुंचे. दरवाजा हल्का खुला था. भीतर मट्टू की लाश थी, उसके साथ रेप हुआ था.
  • 25 जनवरी 1996 केस सीबीआई के पास पहुंचा. FIR दर्ज
  • 11 अप्रैल 1996 सीबीआई ने संतोष सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
  • 11 अगस्त 1997 एससी मित्तल की कोर्ट में सुनवाई शुरू
  • 3 जनवरी 1998 अभियोजन पक्ष की चर्चा खत्म. 50 गवाह पेश पर बचाव पक्ष का कोई गवाह नहीं
  • 18 अप्रैल 1998 मामले में बहस खत्म. फैसले से पहले पैसे के लेन-देन के लगे आरोप. केस ट्रायल कोर्ट को ट्रांसफर किया गया
  • 3 दिसंबर 1999 निचली अदालत ने अपने फैसले में संतोष सिंह को बरी किया
  • 29 फरवरी 2000 सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की
  • 17 अक्तूबर 2006 हाई कोर्ट ने संतोष सिंह को दोषी करार दिया
  • 30 अक्तूबर 2006 हाई कोर्ट ने संतोष सिंह को फांसी की सजा सुनाई
  • 6 अक्तूबर 2010 सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्र कैद में बदला

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    असर
    • शिप्रा सैनी: मेरे अनुभव को वेबसाइट पर पब्लिश करने के लिए क्विंट का शुक्रिया. इस स्टोरी के बाद पुलिस मेरे केस की गंभीरता से जांच कर रही है.
    • प्रियु वत्स: अपनी कहानी को लिखना एक राहत भरा एहसास रहा. मुझे पता है कि स्टॉकर पकड़ा नहीं जाएगा लेकिन जिस तरह मैंने पूरी बात सामने रखी है, एक लड़ाई तो शुरू हो ही चुकी है.
    • गुमनाम: स्टॉकिंग की वजह से मुझे देश तक छोड़ना पड़ा. कम से कम अपनी कहानी तो साझा कर ही सकती थी. शुक्रिया!
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