लाला अमरनाथ, जिनकी बेकाबू जुबान ने खत्म किया उनका कॉमेंट्री करियर

लाला अमरनाथ, जिनकी बेकाबू जुबान ने खत्म किया उनका कॉमेंट्री करियर

क्रिकेट

कैमराः सुमित बडोला

वीडियो एडिटरः अभिषेक शर्मा

2006 में साउथ अफ्रीका और श्रीलंका के बीच कोलंबो में टेस्ट मैच चल रहा था. मैच के चौथे दिन कुमार संगाकारा प्वाइंट पर हाशिम अमला के हाथों कैच आउट हो गए. उस वक्त टीवी कॉमेंट्री कर रहे ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डीन जोंस अमला के लिए बोल पड़े “इस आतंकवादी ने एक और विकेट ले लिया”.

जोंस ने समझा कि माइक्रोफोन बंद है, लेकिन ऐसा नहीं था. नतीजा- भारी विरोध के बाद जोंस को ब्रॉडकास्टर ने निकाल दिया.

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लेकिन ये कोई पहला मौका नहीं था, जब कॉमेंट्री बॉक्स में ऐसी गलती हुई और उसका खामियाजा भुगतना पड़ा हो. ऐसा एक भारतीय कॉमेंटेटर के साथ भी हुआ था. लेकिन पहले उनके बारे में आपको थोड़ा बता देते हैं.

हम बात कर रहे हैं लाला अमरनाथ की- पंजाब से निकला एक ऐसा खिलाड़ी, जो अपने गेम और अपने जुझारू अंदाज के कारण तो हिट था ही, उसे और भी पॉपुलर बनाया उनकी रंगीन जुबान ने.

लाला के बारे में कहा जाता है कि वो पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने क्रिकेट मैनेजमेंट की आंखों में आंखें डालकर उनकी ही जुबान में जवाब दिया.

इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा. कई बार टीम से ड्रॉप भी हुए.

बात सिर्फ लाला तक ही नहीं है, बल्कि उनके विद्रोही तेवरों का खामियाजा उनके बाद उनके बेटों सुरिंदर और मोहिंदर को भी भुगतना पड़ा.

सुरिंदर को तो मौके कम ही दिए गए, जबकि मोहिंदर को भी जब-तब ड्रॉप कर दिया जाता था. इसको लेकर ही मोहिंदर ने एक बार कहा था- या तो ‘उन्हें’ मेरी शक्ल पसंद नहीं, या फिर मेरे नाम के पीछे लिखा अमरनाथ पसंद नहीं.

क्रिकेट से संन्यास के बाद लाला टीम के मैनेजर भी बने और फिर सेलेक्टर भी बने. लाला ने कॉमेंटेटर के तौर पर भी अपना टेलैंट दिखाया और वो जरा खास था.

कहते हैं कि लाला अपने मुंहफट अंदाज में ही कॉमेंट्री करते थे और किसी बल्लेबाज के शॉट पर बेधड़क उसकी गलतियां ऑन एयर ही बता देते थे.

लाला अमरनाथ के बड़े बेटे सुरिंदर अमरनाथ अपने शुरुआती दिनों का एक किस्सा बताते हैं-

लखनऊ में एक कैंप के दौरान लाला कोचिंग दे रहे थे और सुरिंदर भी वहां मौजूद थे. सुरिंदर एक शॉट को बार बार गलत तरीके से खेल रहे थे.

लाला ने उन्हें एक-दो बार समझाया भी कि भाई इस पर स्वीप शॉट खेलो, लेकिन सुरिंदर को समझ ही न आए. फिर क्या था- लाला ने बाउंड्री के पास से अपने बेटे को ऐसी गाली दी कि वहां खड़ा हर कोई हैरान. सबके अंदर खौफ आ गया कि बेटे का ये हाल है तो हमारा क्या होगा.

कुल मिलाकर बात इतनी थी कि लाला को पसंद था डिसिप्लिन. कोई चीज सिखाने पर भी अगर उसको गलत खेले तो लाला बेहद गुस्सा होते थे और डांटने-फटकारने से भी नहीं घबराते थे.

इसलिए ही उन्होंने एक बार रणजी मैच के दौरान अपने एक बेटे को भरे ड्रेसिंग रूम में सबके सामने थप्पड़ जड़ दिया. कारण था खराब शॉट खेल कर आउट होना.

एक बार तो टीम में जगह के लिए संघर्ष कर रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मुश्किल हालात में शतक लगाया तो उस पर लाला जी ने बिना घबराए साफ कहा- अजहर ने सेलेक्टर के मुंह पर तमाचा जड़ा है.

लाला जी भारतीय क्रिकेट इतिहास के पहले शतकवीर थे. 1933 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले ही मैच शतक लगाया था. इतना ही नहीं, वो आजाद भारत के भी पहले क्रिकेट कप्तान थे और उनकी कप्तानी में ही भारत ने पहली बार सीरीज भी जीती थी. 1951-52 में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराया था.

लेकिन अपने रनों और विकेटों से बढ़कर लाला एक पीढ़ी के बीच अपनी कॉमेंट्री के लिए पॉपुलर हुए थे.

कॉमेंट्री में अपने दौरे के किस्से, कहानियां, गेम की बारीकियां समझाना और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का बेलाग विश्लेषण.

लेकिन उनके इस मुंहफट अंदाज ने ही उन्हें कई बार परेशानी में डाला. फिर चाहे वो 1936 में कप्तान से विवाद के बाद उन्हें इंग्लैंड से वापस भेजना हो या फिर 1948 में क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ ही गलत व्यवहार की शिकायत हो... उन्हें कई बार नुकसान उठाना पड़ा.

लाला के बारे में एक किस्सा मशहूर है. वो ये कि.. ऑल इंडिया रेडियो के लिए कॉमेंट्री कर रहे लाला एक बार ये भूल गए कि माइक्रोफोन बंद नहीं हुआ.

और जब याद आई भी तब तक वो अपने पंजाबी अंदाज में ऐसे कई लफ्ज बोल चुके थे, जिनको सुनकर कोई भी कान बंद कर ले.

आखिर जिस जुबान ने उन्हें फैन फेवरिट बनाया, उसने ही उनके कॉमेंट्री करियर का भी अंत कर दिया.

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