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एस सोमनाथ कौन हैं? जो बने हैं ISRO के नए प्रमुख

डॉ. सोमनाथ 2018 से विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के डायरेक्टर हैं जो केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है.

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साइंस
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इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) को नया प्रमुख मिल गया है. रॉकेट साइंटिस्ट एस सोमनाथ (S Somnath) को इसरो के प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया गया है. एस सोमनाथ, के सिवन की जगह शुक्रवार, 14 जनवरी को लेने वाले हैं. इसी दिन सिवन का कार्यकाल खत्म हो रहा है जो पहले बढ़ाया जा चुका है.

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केंद्र ने बुधवार, 13 जनवरी को डॉ. एस सोमनाथ को अंतरिक्ष विभाग का सचिव और अंतरिक्ष आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है. एक आदेश में कहा गया है कि उन्हें अगले तीन साल के लिए नियुक्त किया जाएगा.

कौन हैं डॉ. सोमनाथ?

डॉ. सोमनाथ 2018 से विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के डायरेक्टर हैं जो केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है. वह अपने करियर के शुरुआती दौर में ही PSLV के लिए बनाई गई टीम के लीडर थे. यहां उन्होंने 1985 से काम करना शुरू किया था.

डॉ. सोमनाथ का जन्‍म जुलाई 1963 में हुआ था. उन्‍होंने केरल विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, जिसमें उनका दूसरा स्थान आया था. फिर उन्होंने बैंगलोर के इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की जहां उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला.

कई विषयों के एक्सपर्ट हैं एस सोमनाथ 

वैज्ञानिक एस सोमनाथ एक नहीं बल्कि कई विषयों के एक्सपर्ट हैं, वह लॉन्च व्हीकल डिजाइनिंग जानते हैं, उन्होंने लॉन्च व्हीकल सिस्टम इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल डिजाइन, स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स, इंटीग्रेशन डिजाइन और प्रक्रियाओं, मैकेनिज्‍म डिजाइन और पायरोटेक्निक में विशेषज्ञता हासिल की है.

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए व्यापार के अवसर प्रदान करने के वास्ते विकसित करने की जरूरत है और भावी पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में बदलाव करने की भी आवश्यकता है.
एस सोमनाथ

आगे उन्होंने अंतरिक्ष बजट को बढ़ाने की बात भी कही. उन्होंने कहा, मौजूदा अंतरिक्ष बजट को 15,000-16,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20,000-50,000 करोड़ रुपये से अधिक किये जाने की आवश्यकता है.

साथ ही उन्होंने कहा, लेकिन अंतरिक्ष बजट में वृद्धि केवल सरकारी धन या समर्थन से नहीं हो सकती है, जैसे दूरसंचार और हवाई यात्रा जैसे क्षेत्रों में जो बदलाव हुए, वही बदलाव यहां भी होना चाहिए. इससे रोजगार के अधिक अवसर सृजित हो सकते हैं और अनुसंधान, विकास बढ़ सकता है.

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