(फोटो: BloombergQuint)
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क्यों मुंबई प्रवासी मजदूरों के लिए है स्वर्ग?

महाराष्ट्र में 2011 की जनगणना के अनुसार 21 लाख से ज्यादा प्रवासी रहते हैं और इनमें से ज्यादातर मुंबई में बसते हैं. कुछ लोग पहले से ही नौकरी लेकर आते हैं और कुछ यहां आकर नौकरी की तालाश करते हैं. और बेहतर जिंदगी ढूंढने की जद्दोजहद में लग जाते हैं. वो सिर्फ अपने लिए ही नहीं कमाते बल्कि उनको घर पर भी पैसे भेजने होते हैं.

BloombergQuint ने ऐसे ही दो प्रवासियों से बात की, जो एक अच्छी जिंदगी के लिए मुंबई चले आए.

मन्नीलाल अपना दूध का काम छोड़कर राजस्थान से आए तो वहीं कमल दास ने मुंबई का टिकट लेने के लिए अपना मोबाइल बेच दिया. मन्नीलाल की अब चाय की दुकान है. वह 30 साल पहले इस शहर में आए थे, उनके कंधो पर अपने परिवार को बोझ भी है जिसके सदस्यों की संख्या बढ़कर अब 20 हो चुकी है.

लेकिन कमल दास हाल ही में मुंबई आए है, थोड़ी बहुत मजदूरी करनी शुरु कर दी है. उनके पश्चिम बंगाल के गांव नादिया में तो रोजगार था नहीं, इसलिए वह यहां चले आए.

प्रवासियों का ऐसा ही बुरा हाल दिल्ली में भी हुआ और ये लोग घर लौटने को मजबूर हो गए. जबकि इनमें से कइयों को घर लौटकर शायद कुछ भी काम न मिलें.