दिल्ली ब्लास्ट के जख्म: भुलाए नहीं भूलती 13 सितंबर 2008 की वो शाम

दिल्ली ब्लास्ट के जख्म: भुलाए नहीं भूलती 13 सितंबर 2008 की वो शाम

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दिल्ली सीरियल ब्लास्ट 2008 में हुआ था. 2008 वो साल था जब देश को शायद एक साल में सबसे ज्यादा और सबसे बड़े आतंकवादी हमले झेलने पड़े. दिल्ली में एक बड़ी आतंकी वारदात को महज 3 साल हुए थे. 2005 में सरोजिनी नगर में बड़ा धमाका कर आतंकियों ने कई मासूमों की जान लेली. 13 सितंबर 2008 को दिल्ली एक बार फिर दहली. इस बार 5 धमाकों से.

करोलबाग का गफ्फार मार्केट, दिल्ली का दिल क्नॉट प्लेस और ग्रेटर कैलाश का एम ब्लॉक मार्केट आतंकियों के निशाने पर आ गए. 30 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि 100 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए. जो जख्म 9 साल पहले मिले थे, वो अब भी ताजा हैं. वक्त हर जख्म भर देता है...कभी-कभी ये दिल को समझाने को कही गई एक बात भर लगती है. लेकिन, अपनों के बिना जिंदगी जीने के लिए दिल को समझाना भी तो जरूरी है. क्विंट हिंदी ने दिल्ली ब्लास्ट के पीड़ितों से बात कर उनके दर्द को साझा करने की कोशिश की. साथ ही ये पता करने की भी कि तब से अब तक हालात किस तरह बदले हैं? ये सब समझने के लिए देखिए ऊपर दिया वीडियो.

कैमरामैन: शिव कुमार मौर्या

एडिटर: मोहम्मद इरशाद आलम

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