वीडियो एडिटर: आशुतोष भारद्वाज
बिहार (Bihar) की सियासी मंच (Bihar Election 2020) पर एक के बाद एक ट्विस्ट आ रहा है, ट्विस्ट इतना कि फिल्म शुरू होते ही हर एक्टर क्लाइमेक्स शॉट दे रहा है. सपोर्टिंग रोल वाले मुकेश सहनी बीच सभा में गठबंधन के हीरो पर आरोप लगा देते हैं कि पीठ पर खंजर भोंक दिया तो फिल्मी दुनिया से सियासत में आने वाले रामविलास पासवान के चिराग नीतीश कुमार को डायरेक्टर मानने से इनकार कर देते हैं. लेकिन सवाल ये है कि चिराग का ये एक्सपेरिमेंट किस प्रयोगशाला में तैयार हुआ है.
आखिर ये क्या प्लॉट है कि आप एनडीए (NDA) में हैं भी और नहीं भी? बिहार बीजेपी ने कहा है कि सिर्फ JDU से गठबंधन है लेकिन केंद्र में LJP पर एक्शन नहीं!
बिहार के वोटर के लिए ये कैसा मायाजाल बुना जा रहा है. और जिस जाल में नीतीश फंस सकते हैं उसे बीजेपी क्यों नहीं तोड़ पाई? पीएम नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानने वाले चिराग को बीजेपी क्यों नहीं मना सकी. या फिर इस जाल को बुनने वाली मदर मकड़ी बीजेपी ही है? ऐन चुनाव से पहले एनडीए में होगी उठापटक तो बिहार का वोटर पूछेगा जरूर जनाब ऐसे कैसे?
राजस्थान चुनाव में वसुंधरा तेरी खैर नहीं और मोदी तुझसे बैर नहीं वाला कॉन्सेप्ट अचानक बिहार के एनडीए में दिखने लगा है. चिराग "मोदी तुझसे बैर नहीं नीतीश तेरी खैर नहीं" वाले मोड में हैं.
चिराग पासवान ने जेडीयू के साथ चुनाव न लड़ने के ऐलान के बाद एक खुला खत लिखा है. चिट्ठी में लिखा है,
“बिहार राज्य के इतिहास का ये बड़ा निर्णायक क्षण है करोड़ों बिहारियों के जीवन मरण का प्रश्न है क्योंकि अब हमारे पास खोने के लिए और समय नहीं है. जेडीयू के प्रत्याशी को दिया गया एक भी वोट कल आपके बच्चे को पलायन करने पर मजबूर करेगा.”
वहीं चिराग ने ये भी कहा है कि बिहार में बीजेपी-एलजेपी की सरकार बनेगी और वो पीएम मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे.
चलिए आपको कुछ राजनीतिक समीकरण समझाते हैं. जब नीतीश कुमार 2014 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए से अलग हुए थे तब भी एलजेपी बीजेपी के साथ थी, 2015 विधानसभा चुनाव में भी साथ थी. लेकिन 2016 में बीजेपी और जेडीयू दोबारा साथ आ गए. लेकिन तब भी एलजेपी बिहार सरकार में नहीं रही. अब एलजेपी बिहार में BJP की अगुवाई वाली सरकार चाहती है. मतलब चिराग पासवान के निशाने पर नीतीश कुमार हैं तो फिर उनके कंधे पर बंदूक किसकी है?
सवाल ये भी है कि LJP के पास कितना समर्थन है जो वो एनडीए के एक साथी के खिलाफ खड़ी हो गई? तीसरा सवाल है कि चिराग के फैसले से NDA पर कितना असर हो सकता है और इस कदम से JDU पर क्या असर पड़ेगा?
LJP का मुख्य आधार दुसाध या पासवान दलित समुदाय है. अन्य दलित समुदायों की तुलना में उन्हें राजनीतिक रूप से ज्यादा प्रभावी माना जाता है. दुसाध बिहार में कुल आबादी के लगभग 5 से 6 फीसदी और राज्य की दलित आबादी के लगभग 30-40 फीसदी हैं. बिहार के दक्षिणी और मध्य जिलों में अपेक्षाकृत मजबूत LJP की पूरे राज्य में मौजूदगी है. जो कभी स्पॉइलर तो कभी वोट स्पलायर बन सकती है.
LJP ने पिछले दो चुनाव बड़े दलों के साथ गठबंधन में लड़े थे. यह 2010 में RJD के साथ गठबंधन में 75 सीटों पर लड़ी थी तब 3 सीटों पर जीत हासिल हुई और 6.75% वोट मिले थे. वहीं 2015 में BJP के साथ गठबंधन में 42 सीटों पर लड़ी और सिर्फ 2 सीट हाथ लगी.
साल 2014 में यह पार्टी BJP की वफादार सहयोगी बन गई थी, ऐसे में मुसलमानों के बीच इसका समर्थन कम हो गया, जबकि 'अगड़ी' जातियों के बीच इसकी स्वीकार्यता मामूली रूप से बढ़ गई. हालांकि कुछ इलाकों को छोड़कर, LJP ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में नहीं दिखती. मगर जिन सीटों पर कड़ी लड़ाई है, वहां ये किसी का खेल जरूर बिगाड़ सकती है.
अब खुली जुबान में ये चर्चा आम हो चुकी है कि LJP के कदम से BJP को फायदा हो सकता है. क्योंकि LJP, JDU और HAM उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रही है, लेकिन BJP उम्मीदवारों को उसका समर्थन हासिल होगा, ऐसे में BJP का स्ट्राइक रेट उसके सहयोगियों की तुलना में बेहतर हो सकता है.अगर BJP ज्यादा सीटें जीत जाती है, तो वो मुख्यमंत्री पद या अहम विभागों पर मजबूती के साथ दावा कर पाएगी. ये भी साफ है कि जहां बीजेपी चुनाव लड़ेगी वहां एलजेपी का कोर वोटर बीजेपी के लिए वोट कर सकता है.
चिराग दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव न लड़ने का फैसला बिहार पर राज करने के लिए नहीं बल्कि नाज करने के लिए लिया गया है. लेकिन चिराग के फैसले से किसके सर पर ताज सजेगा?कल्पना कीजिए कि अगर बीजेपी और एलजेपी की सीटें जेडीयू से ज्यादा आ गईं तो नीतीश कप्तान की कुर्सी पर कब तक बने रहेंगे?
उधर चिराग से बिहार का वोटर ये जरूर जानना चाहेगा कि क्या वो चुनाव के पहले इस बात की गारंटी देंगे क्या कि अगर उनके समर्थन से ही नीतीश की सरकार बननी हो तो भी वो चुनाव पूर्व स्टैंड पर कायम रहेंगे और नीतीश को सपोर्ट नहीं करेंगे.अगर वो ये गारंटी नहीं दे सकते तो बिहार का वोटर पूछेगा जरूर..जनाब ऐसे कैसे.
(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)
