क्या विपक्ष को राह दिखाएगा महाराष्ट्र का ये प्रयोग?

क्या विपक्ष को राह दिखाएगा महाराष्ट्र का ये प्रयोग?

ब्रेकिंग व्यूज

वीडियो एडिटर: संदीप सुमन

प्रोड्यूसर: कौशिकी कश्यप

कैमरापर्सन: सुमित बडोला

महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार बन गई. महाराष्ट्र पर अबतक आपने बहुत बड़ा कवरेज देखा. जो परिवार कभी सत्ता के पद पर नहीं आया, उसने परंपरा तोड़ी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली.

एक खास बात ये रही कि शपथ ग्रहण से पहले गठबंधन ने अपना 'कॉमन मिनिमम प्रोगाम' (सीएमपी) जारी किया. इसे गंभीर डॉक्यूमेंट की तरह पेश किया गया है. गठबंधन इसे इतना अहम इसलिए बता रही है क्योंकि उनका कहना है कि तीनों पार्टियां मिलकर भारत के सेक्युलर संविधान को बचाने का काम कर रही हैं. उसमें ये भी कहा गया है कि कोई ऐसा विषय जो संविधान से टकराए, तो तीनों पार्टियां इसपर मिलकर बात करेंगी और सीएमपी के दायरे के बाहर कुछ नहीं बोलेंगी.

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इस कॉमन मिनिमम प्रोग्राम(सीएमपी) की प्रस्तावना में ही कहा गया है कि इस गठबंधन का धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करने पर जोर रहेगा. गरीब, बेरोजगार, किसान, महिला, एससी/एसटी, अल्पसंख्यक का बाकायदा जिक्र करते हुए कहा गया कि सरकार इनके लिए खासतौर पर काम करेगी.

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महाराष्ट्र में आगे क्या देखने को मिलेगा?

गठजोड़ की सरकार बनने के साथ ही उसकी उल्टी गिनती भी शुरू कर दी जाती है. अहम के टकराव, विचारधारा का न मिलना, इंटरेस्ट का टकराव, लोकल कॉम्प्लेक्सिटी वगैरह कारण गिनाए जाने लगते हैं.

फिलहाल बीजेपी जख्मी भाव में है और वो सरकार गिराने के लिए काम करेगी क्योंकि महाराष्ट्र जैसे राज्य में सत्ता छिनना एक बहुत बड़ी दुर्घटना है. साथ ही साथ, बीजेपी को बहुत बड़ा मौका मिला है. वो विपक्ष की जोरदार पॉलिटिक्स करने की कोशिश करेगी. वहीं, महाराष्ट्र के पूरे घटनाक्रम से विपक्ष को बीजेपी से मुकाबला करने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर(SOP) मिल गया है. ये शरद पवार की देन है.

लोकसभा चुनाव से पहले क्विंट ने शरद पवार का इंटरव्यू किया था. 2018 में दिए उस इंटरव्यू में ही शरद पवार ने साफ कर दिया था कि गठबंधन की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका कितनी अहम है. पवार की उस दूरदर्शिता की झलक महाराष्ट्र की नई गठबंधन सरकार में दिखती है. उन्होंने कई प्रमुख बातें कही थीं. उन्होंने कहा था-

  • बीजेपी का मुकाबला कोई एक राजनीतिक पार्टी नहीं कर सकती.
  • जिस क्षेत्रीय पार्टी का जहां दमखम हो वो वहीं अपना दमखम दिखाए, दूसरे राज्यों में घुसने की कोशिश न करे.
  • पार्टियों को अपनी महत्वकांक्षाओं को पीछे रखना पड़ेगा.
  • बगैर सीएमपी के कोई प्रयोग सफल नहीं होगा.
  • पार्टियों को इस देश की एससी /एसटी, अल्संपख्यकों पर पूरा ध्यान देना होगा. ये बात उन्होंने मराठा आरक्षण के संदर्भ में कही थी.
  • उन्होंने शिवसेना और बीजेपी के गठबंधन के टूटने की बात कह दी थी, साथ ही ये भी कहा था कि इसका ज्यादा फायदा शिवसेना को होगा.

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यानी राजनीति के ‘धुरंधर विशेषज्ञ’ ने ये भांप लिया था और विपक्ष के लिए जगह बनाई. इससे संभावना खुली है कि क्या राष्ट्रीय स्तर पर भी बाकी पार्टियां एक साथ आ सकती हैं, क्योंकि शरद पवार इसको मार्गदर्शन दे रहे हैं.

महाराष्ट्र की नई सरकार ने मंत्री पद को लेकर ज्यादा हड़बड़ी नहीं दिखाई. अंदाजा लगाया जा रहा था कि डिप्टी सीएम पद और खासकर अजित पवार को लेकर भी कोई सिग्नल देने की कोशिश होगी लेकिन ऐसी कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई गई.

शिवसेना पर हिंदुत्व को लेकर अब बड़े हमले होंगे. ऐसे में बीजेपी के ट्रैप से बचना भी चुनौती होगी. महाराष्ट्र के घटनाक्रम का बिहार में असर दिखेगा. इसे लेकर चर्चा जोरों पर रहेगी कि क्या नीतीश कुमार भी बीजेपी के साथ को लेकर सोचेंगे?

तो सबसे अमीर राज्य-महाराष्ट्र, जो देश की जीडीपी में 14% योगदान देता है, जहां 40% कॉर्पोरेट हेडक्वार्टर हैं, टीवी पर जिसकी ज्यादा कवरेज है जो फिलहाल आगे भी कुछ महीनों तक चलती रहेगी, बीजेपी इससे असहज होगी. महा विकास अघाड़ी एक बड़ा ‘इवेंट’ हो गया है जो आगे भी बढ़ सकता है, फ्लॉप भी हो सकता है.

भूलना नहीं चाहिए कि दिल्ली के तख्त से भी प्रतिक्रिया दी जाएगी. बीजेपी जख्मी शेर की तरह उभरेगी. ठाकरे, मास्टरस्ट्रोक, शिवाजी की धरती..जैसे टर्म का जवाब देने की व्याकुलता दिल्ली की तख्त दिखाएगी ही.

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