CBI vs CBI: कहानी एक ब्लॉकबस्टर फिल्म की

CBI vs CBI: कहानी एक ब्लॉकबस्टर फिल्म की

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कैमरा: सुमित बडोला और शिव कुमार मौर्या
क्रिएटिव प्रोड्यूसर: पुनीत भाटिया
स्क्रिप्ट और डायरेक्शन: बादशा रे
पात्र: नीरज गुप्ता, बादशा रे, सुशोवन सरकार, रोशन पुवैया, कनिष्क डांगी, साइरस जॉन, तुषार बैनर्जी, वरुण और कामरान.


URI: The Surgical Strike और The Accidental Prime Minister के चक्कर में बॉलीवुड वाले फंसे हुए हैं. असली मजा तो CBI की कहानी में है.
CBI vs CBI केस किसी पहेली से कम नहीं है . इसमें दोस्ती, ईमानदारी, वफादारी जैसा कुछ भी नहीं है, पर इसमें सस्पेंस है, इमोशन है और बदले की भावना है.

ये कहानी शुरू होती है कुरैशी से. कुरैशी पेशे से एक्सपोर्टर होता है. कुरैशी और उसका साथी सना दबा के चीजें एक्सपोर्ट और पेल के पैसा इंपोर्ट कर रहे होते हैं, जब CBI की रेड पड़ती है और दोनों अरेस्ट हो जाते हैं.
अब सना की अफसरों और नेताओं से सेटिंग थी, लेकिन ऐसे समय में उसे बचाता कौन? एंटर Mr X. सना Mr X को पूरे 2 करोड़ खिलाता है और इस बात की भनक लगती है अफसर अस्थाना को. अस्थाना तुरंत एक शिकायत दर्ज करता है वर्मा के नाम पर.

वर्मा अस्थाना का बॉस होता है और इन दोनों की दुश्मनी तब शुरू होती है, जब Central Vigilance Committee की अप्रेजल मीटिंग में अस्थाना के प्रमोशन पर वर्मा आपत्ति जता देता है. एक दिन जब अस्थाना, वर्मा की जगह CVC की मीटिंग में जाता है, तो उस पर भी वर्मा बवाल काट देता है ये कहकर कि "कौन परमिशन दिया?"

बाद में अस्थाना CVC को एक लेटर में लिखता है कि कैसे वर्मा ने उसे सना को गिरफ्तार करने से रोका. उधर वर्मा अस्थाना के सभी जरूरी केस जैसे दिल्ली गवर्नमेंट का केस, IRCTC स्कैम और पी चिदंबरम का केस अपने खास शर्मा को दे देता है.

बाद में सना मजिस्ट्रेट के सामने बयान देता है कि उसने अस्थाना को तीन करोड़ घूस दिए थे. और फिर, अस्थाना के खिलाफ CBI केस दर्ज करती है.

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मगर असली ड्रामा तो इसके बाद शुरू होता है.

वर्मा-अस्थाना की तनातनी देख, सरकार वर्मा और अस्थाना को जबरन छुट्टी पर भेज देती है और नागेश्वर को अंतरिम चीफ बना देती है. इस फैसले से नाराज वर्मा, सुप्रीम कोर्ट चला जाता है. सुप्रीम कोर्ट CVC से जांच करवाती है और 2 हफ्ते में रिपोर्ट जमा करने को कहती है. CVC अपनी रिपोर्ट जमा करती है और SC वर्मा को वापस CBI चीफ बना देती है.

लेकिन एक हाई पावर कमेटी (जिसमें PM, ऑपोजिशन लीडर और सुप्रीम कोर्ट का एक जज शामिल होते हैं) से कहती है कि वर्मा के खिलाफ अगर कोई कार्रवाई करनी हो तो आपस में तय कर लो.

PM और जज, वर्मा को पद से हटाने के पक्ष में वोट देते हैं और विपक्ष में अकेले खड़े, मेरा मतलब खड़गे रह जाते हैं 2 -1, और वर्मा CBI चीफ से Director General of Fire Services बना दिया जाता है.

इस फैसले से नाखुश वर्मा इस्तीफा दे देता है और दूर विदेश में Mr X आराम कर रहा होता है.
अब ये कहानी सच्ची है या काल्पनिक ये आप तय कीजिए. रहा सवाल CBI Vs CBI का, तो पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त.

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