जो नहीं चली उसे भी चला कर छोड़ा, मिलिये घंटाघर की घड़ी एक्सपर्ट से

जो नहीं चली उसे भी चला कर छोड़ा, मिलिये घंटाघर की घड़ी एक्सपर्ट से

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मुंबई के सेंट थॉमस चर्च का घंटा घर 14 दिसंबर 1998 को करीब एक शताब्दी के बाद फिर से चलने लगा था. जिस घड़ी के पार्ट भी नहीं मिल रहे थे उसे मोहम्मद इब्राहिम दमानी ने फिर चला दिया. उन्होंने इस पुरानी घड़ी पर लगातार 19 महीने तक काम किया.

दमानी इस वक्त 72 साल के हैं, लेकिन अपना बिजनेस शुरू करने के लिए उन्होंने 32 साल पहले ईस्टर्न वॉच कंपनी छोड़ दी थी. इसके बाद वो सेंट थॉमस चर्च पहुंचे. उन्होंने चर्च के पादरी से कहा कि वो घंटा घर की घड़ी को ठीक करना चाहते हैं. लेकिन पादरी ने उन्हें मना कर दिया और कहा कि जब ब्रिटिशर्स इसे ठीक नहीं कर पाए तो आप कैसे करेंगे.

हताश-निराश दमानी वहां से चले गए और अल्लाह से वादा किया कि वो एक दिन इस घड़ी में जरूर जान फूकेंगे. कुवैत में करीब 15 साल काम करने के बाद वो बॉम्बे (अब मुंबई) लौटे. वो दोबारा से उसी चर्च के पास से जा रहे थे और देखा कि उसके घंटा घर की घड़ी अभी भी नहीं चल रही थी. उन्होंने एक बार दोबारा कोशिश की और इस बार एक नए पादरी ने उन्हें घड़ी ठीक करने की इजाजत दे दी.

दमानी बताते हैं कि जब वो चर्च के घंटा घर के अंदर गए तो वहां उन्हें 3 से 4 फुट तक कबूतर की बीट मिली. उन्होंने 1 साल 7 महीने तक काम किया. कुछ पार्ट खराब थे तो कुछ गायब थे. उन्होंने खुद ये पार्ट बनाए और घड़ी को आखिरकार चलाकर ही छोड़ा.

इसी तरह 2014 में मुंबई पार्ट ट्रस्ट ने अर्से ने जब Sassoon Dock की एक पुरानी घड़ी को ठीक कराने की सोची तो उनके मन में सबसे पहला नाम दमानी का ही आया. दमानी के लिए ये बड़ी चुनौती थी. करीब 500 किलो तक का सामान गायब था, फिर भी उन्होंने ये घड़ी भी ठीक कर डाली.

आज ऐसी कई पुरानी घड़ियां दमानी की बदौलत चल रही हैं, वो चाहते हैं कि ये कला अब आगे भी बढ़े, लेकिन इसके लिए उनको किसी का साथ बड़े स्तर पर नहीं मिल रहा है.

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