गैंगरेप, लूटपाट और मारपीटः ‘गे डेटिंग ऐप्स’ का खौफनाक सच

गैंगरेप, लूटपाट और मारपीटः ‘गे डेटिंग ऐप्स’ का खौफनाक सच

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मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर: कुणाल मेहरा
कैमरापर्सन: मुकुल भंडारी, सुमित बडोला, अभिषेक रंजन और शिव कुमार मौर्य
प्रोडक्शन सपोर्ट: अविरल शाह और हुसैन

अपना साथी ढ़ूंढ़ने के लिए डेटिंग ऐप्स आज के दौर में कई लोगों का सहारा बनती हैं, लेकिन कई बार इनका दूसरा साइड भी देखने को मिलता है, जो उतना हसीन नहीं है, जिसके सपने इनका इस्तेमाल करने वाले यूजर्स देखते हैं.

इन्हीं में से समलैंगिकों के लिए बनी कुछ डेटिंग ऐप्स का बेहद डरावना रूप हाल के सालों में दिखा है.

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द क्विंट की पड़ताल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें समलैंगिक ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले पुरुषों को प्रताड़ना, मारपीट और लूटपाट का शिकार होना पड़ा.

डिनर के नाम पर गैंग-रेप

द क्विंट ने बात की रोहन (बदला हुआ नाम)से, जो इसी तरह एक डेटिंग ऐप के जरिए शिकार बने. 2015 में रोहन ग्राइंडर ऐप के जरिए एक शख्स से लगातार बात कर रहे थे. मैसेज से शुरू हुई बातचीत फोन कॉल में बदल गई.

एक दिन उस शख्स ने रोहन को डिनर के लिए बुलाया. रोहन को लगा बात सिर्फ एक डिनर की है, क्योंकि वो एक अपने लिए लाइफ पार्टनर ढूंढ़ रहे थे, न कि सेक्स के लिए किसी साथी की तलाश कर रहे थे. 26 साल के उस शख्स ने रोहन से कहा कि वो उन्हें मुंबई से आए अपने एक दोस्त से मिलाना चाहता है.

रोहन गए तो डिनर के इरादे से थे, लेकिन फिर जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी बदल दी. रोहन पहले से तय जगह पहाड़गंज पहुंचे, लेकिन उनके उस साथी जगह बदलकर गोल मार्केट के पास आने के लिए कहा. रोहन उस जगह पहुंचे लेकिन तभी मोटरसाइकिल पर आए दो लोगों ने रोहन को रोका और उन्हें पकड़ लिया.

“दो लोग एक मोटरसाइकिल पर आए और उन्होंने मुझे रोका. एक ने मेरी गर्दन पकड़ी. उन्होंने कहा कि उनके पास पुलिस की कॉल आ रही है और वो मुझे जेल भेज देंगे अगर उसने 5000 रुपये नहीं दिए तो. तभी 2 लोग पीछे से आए और उन्होंने मुझे एक गाड़ी में धकेल दिया. मुझे पीटा गया और मैं बेहोश हो गया.”
रोहन (बदला हुआ नाम)

जब जब रोहन को होश आया तो लोगों ने बेहोशी के इंजेक्शन लगाए. रोहन को ये एहसास हो चुका था कि उन लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया है. 3 दिन के बाद रोहन को कूड़े के ढ़ेर के पास फेंक दिया.

किसी तरह रोहन अपने घर पहुंचे लेकिन वो कभी भी अपने घरवालों को इस हादसे के बारे में नहीं बता सके क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनकी मां कुछ गलत कदम न उठा ले. लेकिन इस हादसे ने रोहन के मन में सवाल खड़ा किया कि वो क्यों इस तरह से पैदा हुए.

वो डरावनी डेट

मार्च 2018 में दिल्ली के ही अंकित (बदला हुआ नाम) को भी ऐसे ही हादसे का शिकार होना पड़ा. अंकित भी डेटिंग ऐप के जरिए एक शख्स से मिले थे और फोन के जरिए होने वाली उनकी बात एक मुलाकात में बदली.

अंकित अपने डेटिंग पार्टनर से मिलने पहुंचे तो वो उन्हें एक रेस्ट्रां में ले गया और वहां खाना ऑर्डर करने लगा. अंकित ने उसे रोका तो वो बदसलूकी पर उतर आया, क्योंकि अंकित के पास उस वक्त रुपये नहीं थे. उसने कहा कि वो ‘पेड’ सर्विस पर है और उसे मिलने से पहले सोचना चाहिए था.

अंकित के ‘पार्टनर’ ने उसे बदनाम करने की धमकी दी और अपने दोस्तों को बुलाकर पीटने की भी धमकी दी. अंकित उस शख्स के साथ अपने घर गया और किसी तरह से 3000 रुपये का इंतजाम कर उसे दिए और अपना पीछा छुड़ाया.

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ग्राइंडर का जवाब, लेकिन प्लैनेट रोमियो खामोश

द क्विंट ने इनके अलावा भी 4-5 आदमियों से बात की जिन्होंने डेटिंग ऐप्स से जुड़े अपने डरावने अनुभव बांटे. ये मामले उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए थे और उनमें भी ऐसी ही समानता थी कि पीड़ित को एक मैसेज आता था और वो उसके जाल में फंसते जाते थे और फिर होता था लूटपाट का खेल.

इनमें से ज्यादातर पीड़ित पुरुष ग्राइंडर डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करते थे जबकि एक मामला प्लैनेट रोमियो का भी सामने आया. द क्विंट ने इन दोनों ऐप्स का जवाब जानने के लिए इनसे संपर्क किया. प्लैनेट रोमियो ने तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन ग्राइंडर ने द क्विंट के सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी-

ग्राइंडर अपने यूजर्स की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. किसी भी तरह की धोखाधड़ी हमारी नियम और शर्तों का उल्लंघन है और हम इसे गंभीरता से लेते हैं. 

ग्राइंडर ने अपने जवाब में बताया कि वो कई सारे सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समलैंगिक समुदाय के लिए एक समान वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचाने का प्रयास करते हैं.

द क्विंट के संपर्क किए जाने के करीब एक हफ्ते बाद ग्राइंडर ने अपने रजिस्ट्रेशन के तरीके को बदला और इसे ई-मेल के बजाए फोन नंबर या फेसबुक अकाउंट से जोड़ने की शर्त रखी. हालांकि दो दिन बाद ही ये ऐप अपने पुराने तरीके पर लौट आई और ईमेल आईडी के आधार पर रजिस्ट्रेशन करने लगी. हालांकि इस बार ऐप ने कुछ सख्ती दिखाई और ईमेल के जरिए वेरिफिकेशन को जरूरी बनाया. ऐसा न करने पर यूजर्स को ब्लॉक करने का भी सिस्टम शुरू किया गया.

क्या है हकीकत?

हमसफर ट्रस्ट के मुताबिक 2017-18 में दिल्ली-एनसीआर में समलैंगिक डेटिंग ऐप के जरिए हैरासमेंट के करीब 18 मामले दर्ज हुए थे. उसी साल पश्चिम बंगाल में 40, महाराष्ट्र में 21, कर्नाटक में 19 और केरल में 20 मामले इस तरह के दर्ज हुए.

लेकिन ये आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं हैं, क्योंकि कई पीड़ित ऐसे मामलों की शिकायत करने का साहस नहीं दिखा पाते, क्योंकि वो अपना दर्द किसी के साथ बांटने से घबराते हैं.

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