किसानों की ‘किलेबंदी’ पर चिदंबरम के सवाल- ‘क्या ये लोकतंत्र है?’

पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने पूछा, “क्या हम एक लोकतंत्र हैं?”

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दिल्ली की तीन सीमाओं सिंघु, टिकरी और गाजीपुर पर किसान काफी समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे इस प्रदर्शन को लेकर अब केंद्र सरकार ने इन तीन सीमाओं पर किलेबंदी शुरू कर दी है. बैरिकेडिंग के अलावा, कटीली तार और बड़े बड़े कीले लगाए गए हैं. कुछ जगह पर सड़कें भी खोद दी गई हैं. दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की इस कार्रवाई और किसान प्रदर्शन को लेकर क्विंट ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम से बातचीत की.

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम ने कहा कि 'केंद्र सरकार किसानों के साथ वैसा व्यवहार कर रही है, जैसा चीन भारत सरकार के साथ कर रहा है.'

“क्या हम एक लोकतंत्र हैं? लोकतंत्र में क्या कंक्रीट के बैरियर लगाए जाते हैं, सड़कें खोदे जाती हैं, पुलिस को मेटल की लाठियां पकड़ाई जाती हैं? जैसा चीन की सरकार भारत के साथ बर्ताव कर रही है, वही व्यवहार केंद्र किसानों के साथ कर रहा है. चीन ग्यारह राउंड की बातचीत करता है लेकिन एक इंच पीछे नहीं हटता है. आज एक न्यूज रिपोर्ट आई है कि चीन एक बॉर्डर पॉइंट पर और रडार ले आया है.”  

चिदंबरम ने कहा कि ऐसा ही भारत सरकार किसानों के साथ कर रही है कि नौ राउंड की बातचीत हो गई लेकिन एक इंच पीछे नहीं होंगे.

घेराबंदी की जो तस्वीरें आई हैं, उस इंतजाम के लिए क्या कोई SOP है?

ये सवाल लगातार उठ रहा है कि सिंघु, टिकरी और गाजीपुर सीमाओं पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम किस आदेश या SOP के तहत किए गए हैं. इस पर पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि 'SOP बिलकुल है लेकिन ये सरकार उसके बारे में सोचती कहां है.'

“आप किसी को टॉयलेट एक्सेस करने से कैसे रोक सकते हैं? प्रदर्शनकारी किसानों को लंगर तक एक्सेस नहीं है. किसान दिल्ली सरकार की तरफ से दिए गए टॉयलेट्स इस्तेमाल नहीं कर सकते. हम अपने लोगों के साथ कर क्या रहे हैं. वो विदेशी नहीं हैं, घुसपैठिये नहीं हैं, दुश्मन भी नहीं हैं. और हम एक 80 साल के किसान को गिरफ्तार कर लेते हैं.”  

चिदंबरम ने पूछा कि क्या 'एक 80 साल का व्यक्ति देश के लिए खतरा है'. उन्होंने कहा, "ये पूरी तरह अलोकतांत्रिक है. ये फांसीवादी बर्ताव है. ऐसा एक फांसीवादी सरकार की पुलिस ही करेगी."

'किसानों को कानून नहीं चाहिए तो वापस क्यों नहीं लेते'

चिदंबरम ने कहा कि अगर मान भी लिया जाए कि कृषि कानून 'अच्छे इरादे, संसद में बातचीत और व्यापक सलाह-मशविरा' के बाद पास किए गए थे, तो जब किसानों को वो चाहिए ही नहीं तो उन्हें वापस क्यों नहीं लिया जाता है.

“तथ्य ये है कि जो बातचीत और सलाह-मशविरा किया ही नहीं गया, लेकिन अगर ऐसा मान भी लिया जाए तो भी कृषि समुदाय को वो कानून चाहिए ही नहीं. तो आप उसे वापस क्यों नहीं लेते? किसानों से कहिए कि हमने तो अच्छे इरादे से कानून बनाया था, लेकिन आपको नहीं चाहिए तो वापस ले लेते हैं और फिर से बातचीत करते हैं.”  

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि 'सरकार अगर किसानों को विश्वास दिला लेती है कि ये कानून अच्छे हैं, तो यही कानून दोबारा पास करा ले.' चिदंबरम ने कहा, "पता नहीं सरकार जिद्दी क्यों बन रही है. अगर किसान कोई क्लॉज बदलवाना चाहते हैं तो उसे बदल कर दूसरा कानून पास हो सकता है."

कांग्रेस नेता ने कहा कि अब किसान प्रदर्शन का जिक्र अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रहा है क्योंकि सिर्फ पॉपस्टार रिहाना ही नहीं, क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थन्बर्ग ने भी इसके समर्थन में ट्वीट किया है.

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