दिल्ली: जानलेवा हमलों और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझते डॉक्टर

दिल्ली: जानलेवा हमलों और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझते डॉक्टर

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36 घंटों की लंबी शिफ्ट और कई बार बदसलूकी की शिकार होने के बावजूद डॉ अंजलि* (बदला हुआ नाम) प्राइवेट सेक्टर की तरफ जाना नहीं चाहतीं. अप्रैल 2019 में एक मरीज के घरवालों ने डॉक्टर अंजलि को थप्पड़ मार दिया था. घरवालों का कहना था कि डॉक्टर मरीज को सही इलाज नहीं दे रहे हैं.

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वो हम पर चिल्ला रही थी. कह रही थी कि मैं पांच मिनट में तुम लोगों को सस्पेंड करवा सकती हूं. तुम अपने आप को क्या समझती हो. इसके बाद उसने डॉक्टर्स के खिलाफ चिल्लाना शुरू कर दिया. मैंने उससे चुप रहने की अपील की. उसने मुझे चेहरे पर थप्पड़ मार दिया.
डॉ अंजलि

दिल्ली के RML हॉस्पिटल में हिंसा और गालीगलौज आम है. अंजलि पिछले कुछ सालों से इसी हॉस्पिटल में काम कर रही हैं.

हालांकि डॉ अंजलि के पास दस साल का अनुभव है. इसके बावजूद वे प्राइवेट सेक्टर की ओर मुड़ना नहीं चाहतीं. वे लोगों की सेवा करने के जज्बे से भरी हुई हैं.

यहां तक कि चाय पीने से पहले भी हमें दस बार सोचना पड़ता है. वह भी तब जब हम इमरजेंसी वार्ड में 10 से 13 घंटे तक लगातार काम करते हैं.

हालांकि दिल्ली में मेडिकेयर प्रोफेशनल के लिए 2008 में एक एक्ट आया था. लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर्स पर होने वाले हमलों में कमी नहीं आई. हॉस्पिटल की तरफ से की गई FIR मददगार साबित नहीं होतीं. पुलिस किसी की गिरफ्तारी ही नहीं करती.

वहीं हिंदूराव हॉस्पिटल में डॉक्टर दवाई की कमियों को लेकर परेशान हैं. डॉ राहुल चौधरी जो 2011 से मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे हैं, वो कहते हैं-

हम पीजी कोर्स चला रहे हैं लेकिन हमारे पास उल्टी-दस्त की तक दवाएं नहीं हैं. वो कहते हैं कि हॉस्पिटल के पास क्रिटिकल पेशेंट से निपटने के लिए जरूरी साजो-सामान नहीं है. एक गंभीर पेशेंट क्रोनिट स्टेज-5 किडनी डिसीज से पीड़ित होकर आता है. उसे वेंटिलेटर की तुरंत जरूरत है लेकिन हमारे पास इमरजेंसी में वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं है.
डॉ राहुल चौधरी, प्रेसिडेंट, हिंदूराव रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन

डॉक्टर और पेशेंट के बीच टकराव में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ा कारण है.

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