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Gujarat Ground Report:पाटीदार आंदोलन के नेता आगे बढ़े,जिनके अपने मरे- वो वहीं पर

Gujarat Election Ground Report : मीडिया से क्यों नहीं बात करना चाहते पाटीदार आंदोलन के पीड़ित?

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पाटीदार समुदाय ( Patidar Aandolan) के लोगों ने OBC के दर्जे की मांग के लिए साल 2015 में गुजरात (Gujarat) में प्रदर्शन किया था. इस आंदोलन के दौरन 14 लोगों की मौत हो गई थी. ब्रजेश पटेल के चाचा कानू पटेल (Kanu Patel) उन 14 लोगों में से एक थे. इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल (Hardik Patel) अब प्रदर्शन छोड़ पॉलिटिक्स में आ गए हैं और जिस बीजेपी (BJP) का विरोध कर रहे थे उसी के सदस्य बन गए हैं. लेकिन आंदोलन में जिन लोगों ने अपनों को खोया उनकी जिंदगी आज भी वहीं ठिठकी हुई है. उन्हें आज भी इंसाफ का इतंजार है. ऐसे ही एक शख्स ब्रजेश से क्विंट ने खास बातचीत की.

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ब्रजेश पटेल ने क्विंट को बताया कि जब भी वह इस घटना को याद करते हैं, तो उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं, क्योंकि हमने घर का एक सदस्य खो दिया. उस दिन जब हार्दिक पटेल को गिरफ्तार किया गया था, तब गुजरात के लोग इकट्ठा हुए थे, वैसे ही हमारे गांव में लोग इकट्ठे हुए थे. मेरे घर में से मेरे चाचा और एक और परिवार के सदस्य की मौत हो गई. उन्हीं लोगों में से कुछ लोगों ने हमें कॉल किया और बताया कि आपके चाचा की गोली लगने से मौत हो गई है.

कनु भाई पटेल के दो बच्चे और पत्नी आज भी उनकी मौत से जुड़े सवाल तलाश रही है. ब्रजेश पटेल बताते हैं कि जैसा उन्होंने कहा उसी के आधार पर हमने पोस्टमार्टम कराया. इसके बाद गोलियां रखी और एफएसएल के लिए भेजीं. 2015 से 2022 आज तक उस एफएसएल की रिपोर्ट हमें नहीं मिली. हमें यह भी पता नहीं चला कि किस व्यक्ति और पुलिस वाले ने गोली चलाई थी. हमने बीजेपी सरकार और प्रशासन से भी गुहार लगाई लेकिन आज तक हमें पता नही चला गोली किसने चलाई.

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7 साल बाद ब्रजेश पाटीदार आंदोलन के बारे में क्या सोचते हैं ?

ब्रजेश ने बताया कि मैं इस पर किसी को ब्लेम नहीं कर सकता हूं. न ही मैं ऐसे पद पर हूं, जो किसी पर ब्लेम कर सकूं. सब ने उन 14 लोगों के परिवारों की मदद की है. चाहे वह हार्दिक पटेल हो या और कोई. ब्रजेश ने आगे बताया कि हार्दिक पटेल का कांग्रेस से बीजेपी में जाना ये उनका निजी फैसला है. हम चाहते हैं कि वह चुनाव जीते और सरकार बनाकर उन 14 लोगों के परिवारों को इंसाफ दिलाएं.

पीड़ित परिवारों में से ज्यादातर अब मीडिया से बातचीत नहीं करना चाहते हैं. वहीं, इस मामले में गुजरात पुलिस का कहना है कि हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए एक्शन जरूरी था.

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