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कोरोना वायरस: पीएम मोदी के 7 वादे vs कितनी डिलिवरी?

पीएम मोदी की कोविड को लेकर घोषणाओं और देश की हकीकत में काफी अंतर है

Updated

वीडियो प्रोड्यूसर: मयंक चावला

वीडियो एडिटर: विवेक गुप्ता

24 मार्च 2020 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड की वजह से दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन घोषित किया. पीएम आशावादी थे. उन्होंने 21 दिनों में वायरस को मात देने की उम्मीद जताई.

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पीएम ने कहा, 'जान है, तो जहान है'. लेकिन एक साल बाद, इसके उलट भारत में 'शमशान घाट' में एक साथ कई चिताएं जलती नजर आईं. घातक दूसरी लहर में होने वाली मौतों में वृद्धि का सामना करने में असमर्थ, हमने गंगा में सैकड़ों शवों और उसके तट पर लोगो को दफन किए जाने की तस्वीरें भी देखी. हमने अस्पतालों के बाहर खड़े ऑटो-रिक्शा में लोगों को ऑक्सीजन के लिए तड़पते हुए देखा, ऑक्सीजन, बेड और एम्बुलेंस की कमी देखी.

पीएम के वादे #1

25 मार्च 2020  को पीएम मोदी ने कहा कि महाभारत का युद्ध 18 दिनों में जीता गया था. आज कोरोना के खिलाफ युद्ध में 21 दिन लगने वाले हैं.

हकीकत ये है कि दुनियाभर की मीडिया ने भारत के कोविड डेटा और भारत सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. यहां तक कि उदासीनता ने लाखों लोगों को मार डाला

पीएम के वादे #2

14 अप्रैल 2020 को पीएम मोदी ने कहा- “सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखे तो ये महंगा जरूर लगता है. बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती"

हकीकत ये है कि एक साल बाद.. कोविड की दूसरी लहर के दौरान 24 मई 2021 तक 577 बच्चे अनाथ हो गए. यूपी पंचायत चुनाव ड्यूटी के बाद कोविड से 1,600 से ज्यादाशिक्षकों की मौत हो गई. 450 के करीब डॉक्टर कोविड की चपेट में आकर जान गंवा बैठे. महाराष्ट्र में कोविड के कारण 420 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की मौत हो गई.

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पीएम के वादे #3

15 अगस्त 2020 को पीएम ने कहा कि वैज्ञानिकों से जब हरी झंडी मिल जाएगी तो बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन होगा और उसकी तैयारी भी पूरी है. वैक्सीन कम समय में हर भारतीय के पास कैसे पहुंचे, इसका खाका भी तैयार है.

हकीकत ये है कि 9 महीने बाद भारत का मेगा वैक्सीन ड्राइव ध्वस्त हो गया. अधिकांश राज्य वैक्सीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कई राज्यों में 18-44 आयु वर्ग के टीके रोके गए. हजारों असहाय भारतीय दूसरे डोज का इंतजार कर रहे हैं.

पीएम के वादे #4

16 जनवरी 2021 को पीएम ने कहा- "देश के हर घर में सभी की जुबान पर यही सवाल था कि कोरोना की वैक्सीन कब आएगी. अब वैक्सीन आ गई है कई और वैक्सीन पर भी काम तेज गति से चल रहा है"

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने लगभग 960 मिलियन पात्र भारतीयों के लिए यानी 1.8 बिलियन से अधिक डोज केआवश्यक आपूर्ति के लिए कुछ किए बिना ही वैक्सीनेशन की इजाजत दे दी”
BBC 14 मई 2021

'मेड-इन-इंडिया' टीकों का भरोसा कर सरकार ने फरवरी 2021 में फाइजर को ना कहा. टीकों की कमी और कोविड से बढ़ते मौतों को देखते हुए आखिरकार सरकार जागी. केंद्र ने फाइजर और मॉडर्ना को मंजूरी दी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

पीएम के वादे #5

28 जनवरी 2021 को वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में पीएम ने कहा- "भारत ने कोविड 19 पर नियंत्रण करके दुनिया को बड़ी त्रासदी से बचाया है"

हकीकत ये थी कि ICU बेड, ऑक्सीजन, जरूरी दवाओं, हेल्थकेयर वर्कर्स, वैक्सीन की कमी के कारण हजारों लोगों की मौत हो गई. श्मशान घाटों में जगह नहीं बची.

पीएम के वादे #6

16 फरवरी 2021 को पीएम ने कहा- "कोरोना से भारत की लड़ाई दुनियाभर को प्रेरित कर रही है. भारत एक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण का अनुसरण कर रहा है'

हकीकत ये है कि हजारों बेनाम शव गंगा में फेंके गए, नदी किनारे दफन कर दिए गए.

पीएम के वादे #7

21 अप्रैल 2021 को पीएम ने कहा- ‘हमें देश को लॉकडाउन से बचाना है. राज्य भी लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करे"

हकीकत ये है कि पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, पुडुचेरी, सिक्किम, आंध्र प्रदेश समेत अधिकांश राज्यों ने सख्त लॉकडाउन बढ़ाया.

देश का कोविड से जंग वादे और हकीकत के बीच अंतर देख रहा है. क्या इससे सबक लिया गया? क्या 'सिस्टम' संभावित तीसरी लहर के लिए तैयार है?

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