ममता के धरने की वजह कमिश्नर राजीव या प्रधानमंत्री बनने की मंशा..

ममता के धरने की वजह कमिश्नर राजीव या प्रधानमंत्री बनने की मंशा..

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3 दिन के हाई वोल्टेज ड्रामे के दौरान कोलकाता नेशनल मीडिया की सुर्खी बना रहा. ‘लोकतंत्र बचाओ’ का नारा लगाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार और सीबीआई के खिलाफ धरने पर बैठ गईं.

वैसे लोकतंत्र बचाने का तो नहीं पता लेकिन ममता की ये कोशिश 2019 आम चुनाव से पहले नेशनल पॉलिटिक्स में अपना हिस्सा बचाने की जरूर थी.

क्या...?? आपको लगा कि वो मोर्चा ममता ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के लिए खोला था. Well, get with the times, guys because ये है धरने की असली कहानी.

बंगाल में दीदी ही है बॉस

इससे पहले कि आप हमें ट्रॉल करना शुरु करें तो मैं बता दूं हम ये नहीं कह रहे. ममता खुद ही ये संदेश देती हुईं नजर आ रही थीं. नजरिया ये है कि राज्य सरकारों या देश भर की एंटी-मोदी पार्टियों को ED और CBI जैसे ‘मोदी के हथियारों’ का शिकार बनाया जाता है.

ममता दीदी ने ये दिखाने की कोशिश की जैसे मोदी जी इडेन गार्डन में आकर सौरव गांगुली के सामने बॉलिंग कर रहे हैं. तो भइया विकेट नहीं गिरेगा बल्कि गेंद बाउंडरी के पार जाएगी. तो सीबीआई अफसरों को गिरफ्तार करना और राजीव कुमार के खिलाफ कड़े कदम पर कोर्ट के स्टे ऑर्डर की बात कहना उसी का हिस्सा था. बाद में पता लगा कि कोलकाता हाई कोर्ट ने ऐसा कोई स्टे आर्डर नहीं दिया था.

ममता, 'महागठबंधन' में मुख्य चेहरा

अगर कोई महागठबंधन होता है जो चुनाव लड़ता है और अगर वो जीत जाता है ...

मुझे पता है, मुझे पता है ... बहुत सारे 'अगर-मगर' हैं ...

लेकिन अगर ऐसा होता है, तो दीदी के पास अब गठबंधन में मायावती जैसी अपने competitors पर एक निर्णायक बढ़त हैआपको पता है, क्योंकि मोदीजी ने उनके पीछे अपनी पूरी फोर्स भेजी, और वो उनसे भिड़ गईं. ये पूरा घटनाक्रम मोदी जी को थोड़ा बैकफुट की स्थिति में ले आया.

तेजस्वी यादव जैसे नेता भी अपने पूरे परिवार को मोदी सरकार की ओर से निशाना बनाने की बात कहतेरहे हैं, लेकिन "जो ममता दीदी ने किया, वो कोई और नहीं कर पाया"

हमेशा सुरक्षाकर्मियों के साथ

ममता के धरने के दौरान सुरक्षा कर्मियों के सम्मान के मुद्दे को लगातार चर्चा में रखा. कोलकाता पुलिस का annual investiture ceremony का आयोजन भी धरना स्थल पर ही किया गया, और ममता ने बार-बार दोहराया कि किस तरह पुलिस वाले रात भर जागते हैं और हम दुर्गा पूजा का आनंद लेते हैं.

ऐसा वो बार-बार इसलिए कह रही थीं जिससे की यह धारणा बन सके कि मोदी सरकार ईमानदार पुलिस वाले को टारगेट कर रही है. लेकिन दीदी इस तरह की चीजें नहीं बर्दाश्त कर सकती. बहुत से लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि इसी मुख्यमंत्री ने तब ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था जब उनके मंत्रियों को गिरफ्तार किया जा रहा था.

स्ट्रीट फाइटर के रूप में ममता की छवि को मजबूत करना

खुले आसमान के नीचे 3 रातें बिताकर ममता ने साबित कर दिया है कि वह हमेशा की तरह, लड़ाई को सड़कों तक ले जाने से नहीं डरतीं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो मुख्यमंत्री हैं. उन्हें अब भी याद है कि वो सीएम की कुर्सी तक कैसे पहुंचीं.

धरने के दौरान उन्होंने एक बार वाकई कहा था कि वो फर्श पर नहीं बैठ सकतीं क्योंकि करियर में काफी मार खाने के बाद उनकी कमर में एक दिक्कत आ गई है. ये साफ तौर पर दिखाता है कि ये उनके लिए नई बात नहीं है.

ये लड़ाई अब दिल्ली तक जाती है, सीधे पीएम नरेंद्र मोदी के दरवाजे तक. और एक बार फिर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है. चुनावों तक इस लड़ाई के नए-नए रंग आपको दिखते रहेंगे.

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