महाराष्ट्र की पहेली गहराई, सेना-BJP में बढ़ी लड़ाई

महाराष्ट्र की पहेली गहराई, सेना-BJP में बढ़ी लड़ाई

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सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा? महाराष्ट्र में अब ये महापहेली बन चुकी है? महाराष्ट्र में क्या बीजेपी शिवसेना की सरकार बनेगी? क्या शिवसेना एनसीपी के साथ मिलकर कुछ गुल खिलाएगी?या फिर अब राज्य राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रहा है?

बीजेपी कह रही है कि महाराष्ट्र में हम सरकार जरूर बनाएंगे लेकिन शिवसेना के बयानों को देखकर लगता है कि दोनों के बीच तल्खियां और बढ़ती जा रही हैं. गुरुवार 7 नवंबर को शिवसेना के विधायकों की बैठक हुई. उद्धव ठाकरे ने फिर वही दोहराया- “ढाई साल सीएम होगा हमारा...”

उधर बीजेपी नेताओं ने भी राज्यपाल से मुलाकात की लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया.

संजय राउत बोले - अगर आप राज्यपाल से मिले, तो आपका ये फर्ज बनता है कि आप राज्यपाल को बहुमत के लिए जरूरी 145 विधायकों की लिस्ट भी दें.

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हालांकि संजय राउत ने एक बात कही जिससे एकबार को लगा कि शिवसेना अब खुद इस डेडलॉक से बाहर आना चाहती है.

उन्होंने कहा- उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के  हित में कोई फैसला करेंगे. अब महाराष्ट्र का हित तो यही है कि सरकार बने. कुछ काम शुरू हो. 

राज्य में बेमौसमी बरसात के कारण किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. उनकी जान पर बन आई है लेकिन यहां तो कुर्सी की किचकिच ही खत्म नहीं हो रही.

लेकिन शिवसेना जो सामने से अड़ी हुई दिख रही है, अगर वो ऐसे ही अड़ी रही तो क्या होगा?

शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस का समीकरण भी नहीं जुड़ रहा है. विचारधारा इस में सबसे बड़ी अड़चन है. हालांकि महाराष्ट्र कांग्रेस के कई विधायक बीजेपी का सीएम ना हो इस मुद्दे पर शिवसेना को समर्थन देने के पक्ष में हैं लेकिन कांग्रेस आलाकमान तैयार नहीं है. ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है कि शिवसेना को हर हाल में सरकार बनाने को लेकर उनके साथ आना होगा. बीजेपी सूत्रों के हवाले से खबर है कि बिना शिवसेना वो सरकार नहीं बनाएगी, इंतजार करेगी.

उधर शिवसेना ने भी अपने विधायकों को मुंबई में रुकने को कहा है. अगर ये सब नहीं होता है तो महाराष्ट्र की 14वीं विधानसभा का कार्यकाल 8 नवंबर रात बार बजे खत्म होगा यानी राजनीतिक दलों के पास सिर्प 2 दिनों का समय बचा है.

एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभकोनी भी राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से राजभवन पहुंचकर मिले हैं. अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि क्या दोनों के बीच इस डेडलाइन को आगे खींचने को लेकर कोई बात हुई होगी? लेकिन इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि नई डेडलाइन पर भी बीजेपी-शिवसेना का डेडलॉक खत्म होगा.और ये डेडलॉक खत्म नहीं हुआ तो महाराष्ट्र को राष्ट्रपति शासन के लिए तैयार  रहना चाहिए.

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