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C से सिलिंडर, D से डेथ, O से ऑक्सीजन... A टू Z का बदला मतलब

ये जो इंडिया है ना... यहां कोविड की सेकेंड वेव ने हमारी लाइफ बिल्कुल बदल दी है! कोविड के A टू Z पर एक नजर.

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वीडियो एडिटर: विवेक गुप्ता

ये जो इंडिया है ना... यहां A टू Z... कोविड की सेकेंड वेव ने हमारी लाइफ बिल्कुल बदल दी है! इसलिए आज कोविड के A टू Z पर नजर डालते हैं.

A से अदार पूनावाला का! सिर्फ भारत नहीं, दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक कंपनी के मालिक, लेकिन पूनावाला को भारत के नेताओं से 'आदर' नहीं मिला... उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए को वित्तीय सहायता नहीं मिली. केवल दबाव और धमकी! इसलिए अदार निकल गए इंग्लैंड और बन गए अदार लंडनवाला!

B से B.1.617... इंडिया का डबल म्यूटेंट कोरोना स्ट्रेन, जिसका 5 अक्टूबर 2020 को पता लग चुका था, लेकिन सरकार के पास 115 करोड़ रुपये नहीं थे. 115 करोड़ जो B.1.617 का शोध करने के लिए जरूरी थे, और क्योंकि जांच में कई महीनों देरी हुई, आज B.1.617 दूसरी कोविड लहर का मुख्य कारण बन गया है!

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C है सिलेंडर के लिए, ऑक्सीजन सिलेंडर, जिसकी कमी देशभर में हो रही है. C कर्नाटक का चामराजनगर के लिए भी है, जहां ऑक्सीजन की कमी के कारण 24 क्रिमेशन्स किए गए. C यानी क्रिमेशन्स (अंतिम संस्कार)... जो देश के हर श्मशान घाट पर रोज दिख रहे हैं. फुटपाथ पर अंतिम संस्कार, श्मशान घाट के बगल की जमीन पर अंतिम संस्कार! C सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए भी है, जिसपर काम, कोविड से अंजान, बड़े मजे से चल रहा है. C यानी कोविशील्ड और कोवैक्सीन. दोनों वैक्सीन जो आज कल शॉर्ट सप्लाई में है!

D यानी डेथ! मौक के आंकडे़! हमारे अब तक 2.50 लाख नागरिक कोविड से जिंदगी की जंग हार चुके हैं. रोज करीब 4000 लोगों की मौत! वियतनाम में पिछले 15 महीनों में सिर्फ 35 मौतें हुई हैं. वहीं, भारत में 35 मौतों सिर्फ कुछ मिनटों में हो रही है. D से एक और बात - पीएम मोदी के वो दो शब्द - "दीदी.. ओ दीदी!" जाहिर है दीदी को हराना, कोविड को हराने से ज्यादा जरूरी था, लेकिन हुआ क्या? मोदी सरकार दोनों मोर्चों पर हार गई. दीदी से भी, और कोविड से भी!

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E से होता है इलेक्शन कमिशन, जिसने सुपर-स्प्रेडर चुनावी रैलियों की इजाजत दी. EC को सार्वजनिक रैलियों पर बैन लगाना चाहिए था, लेकिन इस काम के लिए उनके पास न तो संवेदनशीलता थी, और न ही रीढ़ की हड्डी!

F है फेक न्यू के लिए! कोरोना को ठीक करने के लिए अपनी नाक में नींबू का रस डालें, दूसरी लहर के लिए 5G टेस्टिंग जिम्मेदार है, ऑक्सीजन के लिए घर में गाय का गोबर जलाएं. कोरोना से जुड़ी काफी फेक न्यूज फैली हुई है, उसके झांसे में न आएं!

G है जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए है, जिसकी वायरल रिसर्च के लिए बड़े पैमाने पर जरूरत है, जिसे हमने भारत में प्राथमिकता नहीं दी है. जैसे हमने इंडियन डबल म्यूटेंट स्ट्रेन B.1.617 को नजरअंदाज किया. भारत में, हम अपने साइंटिस्ट्स को सशक्त नहीं करते हैं, हम उन्हें फंड नहीं देते हैं और हम उन्हें उतना नहीं सुनते हैं जितना हमें सुनना चाहिए!

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H हर्षवर्धन और स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए होना चाहिए, लेकिन क्योंकि वे कोविड से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए ये H हाईकोर्ट के लिए है - इलाहाबाद हाईकोर्ट, कर्नाटक हाईकोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट, मद्रास हाईकोर्ट, कोलकाता हाईकोर्ट, पटना हाईकोर्ट, हैदराबाद हाईकोर्ट, अहमदाबाद हाईकोर्ट, जिन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को कोविड पर काम करने के लिए कहा. असल में देखा जाए तो, हाईकोर्ट भारत के सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा काम कर रहे हैं!

I ICU बेड के लिए है. ये हताशा भरे सोशल मीडिया मैसेज... 'ICU बेड की जरूरत है, कोई लीड, कोई फोन नंबर...' कहानी बताते हैं. I आईपीएल के लिए भी है, जिसने कोविड के शोर के बीच बहरेपन के साथ शुरुआत की, क्योंकि आईपीएल के सबसे बड़े सितारों और बीसीसीआई ने ऐसा रवैया दिखाया मानो कोविड था ही नहीं, और फिर, जैसे ही उन्होंने अपना सोशल मैसेजिंग शुरू किया, उनका बायो-बबल फूट गया और दुख की बात है कि आईपीएल, रद्द हो गया!

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J जैब के लिए है, वैक्सीन की एक जैब. जान है तो जहान है. अगर आप एलिजिबल हैं, तो प्लीज अब अपना जैब लें!

K कुंभ मेले के लिए है, और कंगना. वाह, क्या जोड़ी है! एक कोरोना का सुपर-स्प्रेडर... दूसरा, नफरत का सुपर-स्प्रेडर. कुंभ और कंगना, दोनों पर लगा बैन, लेकिन दोनों मामलों में, नुकसान होने के लंबे समय के बाद! K कब्रिस्तान के लिए भी है- दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान में 4 एकड़ एक्स्ट्रा जमीन भी अब भरी हुई है!

L है लॉकडाउन के लिए, जो 12 महीने बाद, हमारी जिंदगी में फिर से वापस आ गया है! L मतलब लोग ही लोग, और कैसे ये जरूरत से ज्यादा भीड़… इस भीड़ तक पहुंच गई.

M से मर्डर, जो शब्द इंसानी गलतियों की वजह से हुई कोविड मौतों के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने इस्तेमाल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने इसे कठोर कहा था, लेकिन असहमत नहीं था. न ही हम असहमत हैं!

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N है N95 मास्क के लिए, जो आज के समय में जिंदगी बचा सकता है. डबल मास्किंग भी ऐसा कर सकती है. प्लीज डबल मास्किंग कर लो भाई... इससे जिंदगी बच सकती है!

O और किसके लिए होगा, ये है ऑक्सीजन के लिए, और इसकी कमी. ऑक्सीजन प्लांट्स, ऑक्सीजन टैंकर, ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी से सिर्फ दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में 25 मौतें, 12 मौतें बत्रा अस्पताल में, 25 दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में. लगभग भारत की 40% ऑक्सीजन कमी से मौतें, दिल्ली में दर्ज हुई हैं. ये एक त्रासदी है और शर्म की बात है!

P है पीएम केयर्स फंड के लिए, जिसमें हजारों करोड़ रुपये कोविड इमरजेंसी के लिए इकट्ठा किए गए थे, लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल कैसे हुआ? हमें नहीं पता, क्योंकि पीएम केयर्स प्रधानमंत्री ऑफिस चलाता है, लेकिन RTI का जवाब नहीं देता है. क्विंट ने हाल ही में एक स्टोरी की थी कि पीएम केयर्स ने 1 साल पहले 6300 वेंटीलेटर के लिए फंडिंग दी थी, लेकिन वो अभी तक डिलीवर नहीं हुए! ऐसा लगता नहीं कि पीएम केयर्स!

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Q है क्वॉरन्टीन के लिए. दूसरी वेव की वजह से पूरा देश क्वॉरन्टीन में है. साथ ही कई देशों ने भारत पर ट्रेवल बैन भी लगा दिया है. पड़ोसी श्रीलंका से लेकर न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, UAE.... कोई भी दुनिया की नई कोविड कैपिटल से लोगों को आने नहीं देना चाहता!

R है रेमडेसिविर के लिए! वो ड्रग जिसका कोविड में सीमित इस्तेमाल है, लेकिन लाखों लोग इसे ब्लैक में हजारों रुपये में खरीद रहे हैं. वैसे ही, जैसे ब्लैक मार्केट में ऑक्सीजन सिलिंडर, एंबुलेंस हायर करना और ICU बेड बुक करना जारी है!

S मतलब है सर्ज, सेकेंड वेव और सुपर स्प्रेडर. ये सारे शब्द आज हमारे जीवन को परिभाषित करते हैं. S से SOS भी है, ये उनके लिए जो ऑक्सीन, बेड, दवाओं के लिए सोशल मीडिया पर सर्च कर रहे होते हैं!

T से हैं तीरथ सिंह रावत. इनके बयानों ने इस कोरोना संकट में खूब हेडलाइन बनवाईं. इन्होंने कहा गंगाजल कुंभ मेला के लाखों श्रद्धालुओं की रक्षा करेगा. अब उत्तराखंड ये मुख्यमंत्री चुप हैं, लेकिन अभी भी वो अपने पद पर बरकरार हैं. इससे साफ है कि बीजेपी का मानना है कि रावत ने न तो कुछ गलत कहा और न ही किया!

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U से आता है अंडर रिपोर्टिंग. भले ही एक्टिव केस और मौतों के मामलों में हमने दुनियाभर के रिकॉर्ड तोड़ दिए हों. भरोसा करने वाली न्यूज रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सरकार ने किस तरह से मौत के आंकड़े कम दिखाए हैं, जबकि असल में ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार हो रहा है. ये भी सरकार के न मानने वाले रवैए का एक उदाहरण है!

V से जाहिर तौर पर आता है वैक्सीनेशन! वैक्सीनेशन ही सिर्फ एक ऐसी दवा है, जो हमें इस संकट से बचा सकती है, लेकिन यही वैक्सीन डोज भारत के पास पर्याप्त मात्रा में नहीं है. इसका कारण है कि हमने पिछले साल अपना वैक्सीन प्रोडक्शन नहीं बढ़ाया. हमने प्रोड्यूसर्स से वैक्सीन की प्री-बुकिंग नहीं की. हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन देने की बजाय, दिन-ब-दिन वैक्सीन कम लोगों को दे रहे हैं. V से विकास भी आता है, विकास का मतबल है आर्थिक प्रगति, ज्यादा देर तक वेंटिलेटर पर कौन रहता है!

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W से आता है वॉर्निंग (चेतावनी). कई लोगों ने दूसरी लहर के लिए वॉर्निंग दी थी, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया!

X से है एक्स-रे. कोरोना संक्रमण का पता लगाने में कम इस्तेमाल किया जाने वाला, लेकिन पुख्ता तरीका है एक्स-रे. अब जब कोरोना संकट गावों में ज्यादा है और वहां पर सीटी स्कैन करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए एक्स-रे इसका समाधान है!

Y से आते हैं योगी आदित्यनाथ. एक मुख्यमंत्री, जिसके पास ऑक्सीजन की कमी से लड़ाई का रास्ता है, कि जो भी इसके बारे में बात करे, उसे जेल में डाल दो और उसकी प्रॉपर्टी जब्त कर लो!

Z से है Zzzzzzzz… ये है सोए हुए सरकारी सिस्टम की आवाज!

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

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