इमरजेंसी में मुंबई की मदद करने वाला कोरोना वॉर रूम

शिवसेना के साथ मिलकर पूर्व पत्रकार चला रहे कोविड वॉर रूम

वीडियो एडिटर: शुभम खुराना

कोरोना की दूसरी लहर का केंद्र बने महाराष्ट्र में मरीजों के आंकड़े कम हो रहे है. लेकिन चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से अभी भी आम आदमी जूझता नजर आ रहा है. ऐसे में सत्तारूढ़ शिवसेना को सरकार में होने के बावजूद पार्टी स्तर पर लोगों की मदद के लिए कोविड वॉर रूम चलाना पड़ रहा है. पत्रकारिता से हेल्थ एक्टिविस्ट बने मंगेश चिवटे शिवसेना के मंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मुंबई से सटे ठाणे में कोविड वॉर रूम चला रहे है. जिसकी मदद से राज्य भर में हजारों मरीजों की जान बचाई जा रही है.

वॉर रूम में काम कर रहे बेड कॉ-ऑर्डिनेटर रविन्द्र ननावरे बताते हैं-

“एक बेड के लिए 10 से 15 मरीज कतार में लगे रहते हैं. हमे भी बुरा लगता है, जब हम सिर्फ किसी एक को बेड दिलवा पाते है और बाकी लोगों को नहीं.”

तो दूसरी ओर ऑक्सीजन कॉ-ऑर्डिनेटर प्रवीण मंडावकर का कहना है- " पूरे महाराष्ट्र से दिन भर में 100 से ज्यादा कॉल ऑक्सीजन के लिए आते हैं. ऑक्सीजन बेड या फिर सिलिंडर की मांग काफी बढ़ गई है."

बता दे कि ठाणे में चल रहे इस कोविड वॉर रूम में 10 से 15 स्वयंसेवी तीन शिफ्ट में काम करते हैं. बेड, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर, ब्लड प्लाज्मा, रेमडेसिविर इंजेक्शन, एंबुलेंस और मेडिकल बिल में राहत जैसे कई गुहार लगाते हुए 24×7 फोन आते रहते हैं.

कोई मुंबई-पुणे जैसे बड़े शहरों से तो कोई नांदेड़-गढ़चिरौली जैसे दूर दराज जिलों से फोन करता है. हर किसी को अपने परिजनों की जान बचानी है लेकिन जरूरी व्यवस्थाओं की कमी के कारण सभी को मदद पहुंचाने में इन्हें काफी दिक्कत होती है.

“हमने वॉर रूम के हेल्पलाइन नंबर सोशल मीडिया पर रिलीज कर दिए हैं. साथ ही सभी अस्पताल, ब्लड बैंक्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, ऑक्सीजन प्लांट्स और सभी जिले के अधिकारियों के नंबर इकट्ठा कर डेटा बुक बनाई है. जहां से फोन आए, उस जगह के संबंधित लोगों से संपर्क कर हम मरीजों को राहत पहुंचाने का काम करते हैं.” 
मंगेश चिवटे

चिवटे बड़े गर्व के साथ बताते हैं कि,"टीम में शामिल राहुल नाम का सदस्य तो शादी के बाद तुरंत ही इस मदद कार्य से जुड़ गया. हनीमून पर ना जाते हुए लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता दी. राहुल अपनी पत्नी को गांव छोड़कर वॉर रूम के काम में जुट गए हैं."

बावजूद इसके आम इंसान खत्म हो रहे विकल्पों से परेशान है. दर-दर भटक रहे मरीज के परिजन निखिल गायकवाड़ अपने पिता के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन ढूंढते हुए वॉर रूम पहुंचे. निखिल का कहना है कि," अस्पतालों की मांग का एक तिहाई हिस्सा रेमडेसिविर इंजेक्शन मिल रहा है. उसमें सिर्फ क्रिटिकल मरीजों का इलाज हो पाता है.  बाकियों को दवाई नहीं मिल पा रही है."

वॉर रूम में तैनात दीपाली चव्हाण का दावा है कि,"उन्होंने अब तक 200 से 300 मरीजों को रेमडेसिविर उपलब्ध कराई है. फिलहाल सिर्फ अस्पतालों से इंजेक्शन दिया जा रहा है. फिर भी उनका डिस्ट्रीब्यूटर से लेकर मरीजों को मदद करने का प्रयास जारी है."

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