जजों की ‘बगावत’ के मायने समझ‍िए SC की वकील करुणा नंदी से

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इन 4 जजों ने बहुत ही सरल बात कही है. जब कोई केस किसी जज को दिया जाता है, तो किसी प्रक्रिया के तहत दिया जाना चाहिए. अगर कोई कोर्ट जाता है, तो उसके दिमाग में ये नहीं होना चाहिए कि कोर्ट पक्षपात कर रहा है. देश में सिस्टम के तहत काम होना चाहिए. ये चाहते हैं कि कोर्ट की जो भी प्रक्रिया हो, उसमें पारदर्शिता होनी चाहिए. इन्होंने अहम मुद्दा उठाया है. 
करुणा नंदी, सुप्रीम कोर्ट वकील

बता दें, सुप्रीम कोर्ट में शीर्ष स्तर पर असंतोष तब खुलकर बाहर आ गया है. शुक्रवार को चार वरिष्ठ जजों ने सार्वजनिक रूप से शुक्रवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर मामलों को उचित बेंच को आवंटित करने के नियम का पालन नहीं करने का आरोप लगाया. इसमें से एक मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) के जस्टिस बी.एच. लोया की रहस्यमय परिस्थिति में हुई मौत से संबंधित याचिका को लेकर है.

जज जे. चेलमेश्वर के घर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए चारों जजों ने कहा:

सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है और यहां तक कि आज सुबह भी एक खास मुद्दे पर हम चारों एक खास रिक्वेस्ट के साथ चीफ जस्टिस से मुलाकात करने गए. अफसोस, हम उन्हें समझा पाने में सफल नहीं हुए. इसके बाद इस संस्थान को बचाने का इस देश से आग्रह करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं रह गया.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जे चेलमेश्वर के साथ अन्य तीन जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरिन जोसेफ मौजूद थे.

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