श्रीनगर ग्राउंड रिपोर्ट 5: दो बेकरार दिल और ‘370’ उलझनें

कश्मीर की ग्राउंड रियलिटी जानने क्विंट हिंदी की टीम श्रीनगर पहुंची.

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वीडियो एडिटर: आशुतोष भारद्वाज/विशाल कुमार

वीडियो प्रोड्यूसर: हेरा खान

एक फैसला दिल्ली में हुआ. दो दिल टूटे कश्मीर में. दोनों एक दूसरे के ख्वाबों में खोए थे, कि अचानक ‘370’ मुसीबतें खड़ी हो गईं. आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर की ग्राउंड रियलिटी जानने क्विंट हिंदी की टीम श्रीनगर पहुंची. कश्मीर ग्राउंड रिपोर्ट सीरीज की पांचवीं कड़ी में देखिए किस तरह वहां इस वक्त शादी ब्याह में भी दिक्कत हो रही है.

आतिफ निसार मीर की शादी की तैयारी महीनों से चल रही थी. 16-18 अगस्त के बीच उनकी शादी थी. लेकिन अब पता नहीं क्या होगा? क्विंट से बात करते हुए, दूल्हे के पिता डॉ. निसार अहमद मीर ने कहा कि अचानक हुए इस फैसले ने शादियों को स्थगित करने या रद्द करने को मजबूर कर दिया.

मेरे बेटे की शादी 16-18 अगस्त को थी. 17 को मेहंदी और 18 को रिसेप्शन था. दु्ल्हन को 17 अगस्त को आना था. लेकिन अभी की परिस्थितियों को देखते हुए हमें सब कुछ कैंसिल करना पड़ा. हम और क्या कर सकते थे?
डॉ. निसार अहमद मीर, दूल्हे के पिता

आर्टिकल 370 को हटाए जाने के बाद जम्मू और कश्मीर, खासकर श्रीनगर में लोगों के पास शादियों को रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं, क्योंकि कर्फ्यू और कम्युनिकेशन ठप होने की वजह से इनकी जिंदगी ठहर सी गई है.

दूल्हे आतिफ निसार मीर का कहना है शादी समारोह स्थगित कर दिया गया है “कुछ भी ऐसा नहीं हो रहा जिसका सपना हमने देखा था. हमारा एक अलग कल्चर और रिवाज है, जो कि 7 दिन का होता है”

सब कुछ चल रहा था, लेकिन यहां जो हालात हो गए हैं  इनकी वजह से ये सब नहीं हो पाया. हमें सिर्फ तारीख मालूम है कि 16 को हमारी शादी होने वाली है. इसके अलावा हमें एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं पता.  
आतिफ निसार मीर, दूल्हा

बिखरे पड़े कमरे को दिखाते हुए दूल्हे की बहन गौसिया निसार कहती हैं कि हालात की गंभीरता को देखते हुए मजदूर काम को बीच में ही छोड़ कर चले गए.

17 अगस्त तो भाई की शादी है और उसका कमरा ऐसे ही पड़ा है, क्योंकि सभी मजदूर भाग गए. सिटिंग रूम का काम भी पेंडिंग है और बेड के लिए बेडिंग भी नहीं है.
गौसिया निसार, दूल्हे की बहन

कम्युनिकेशन की कोई गुंजाइश नहीं होने की वजह से परिवार ज्यादा परेशान हैं. इन्हें दुल्हन के परिवार के बारे में भी कुछ पता नहीं है.

अगर फोन होता (नेटवर्क) तो कम से कम हम बात कर पाते. हमें पता ही नहीं है कि हमारी बहू कहां है. उनके घरवाले कहां हैं और वो क्या तैयारियां कर रहे हैं. हम कैसे निकाह (शादी) के लिए जाएंगे.
दूल्हे की मां

दूल्हे आतिफ निसार मीर का कहना है कि “अगर हमें अपनी दुल्हन को लेने जाना है तो हमें CRPF की इजाजत लेनी होगी. वो अगर हमें लिखकर देंगे कि आप 3-4 लोग जा सकते हो, तो ही हम जा सकेंगे, वर्ना नहीं जा सकेंगे.”

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