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रघुराम राजन ने धीमे वैक्सीनेशन और पढ़ाई पर जताई चिंता- खास बातचीत की बड़ी बातें

Raghuram Rajan ने महामारी के दौरान लोगों की आय कम होने पर जताई चिंता

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भारत
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रघुराम राजन ने धीमे वैक्सीनेशन और पढ़ाई पर जताई चिंता- खास बातचीत की बड़ी बातें

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने कोरोना वैक्सीनेशन और देश की इकनॉमी रिवाइवल के साथ-साथ कई अन्य मुद्दों पर क्विंट से बातचीत की. एशिया सोसाइटी इंडिया सेंटर द्वारा आयोजित "कोविड के बाद भारत की आर्थिक रिकवरी" विषय पर क्विंट के एडिटर इन चीफ राघव बहल के साथ बातचीत में रघुराम राजन ने कहा कि कोरोना वैक्सीन की कमी दुनियाभर के तमाम देशों के लिए सबसे बड़ी समस्या है. जानिए रघुराम राजन के साथ हुई इस खास बातचीत की बड़ी बातें.

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इकनॉमिक रिवाइवल के लिए वैक्सीनेशन जरूरी

रघुराम राजन ने क्विंट से बात करते हुए कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि भारत समेत बाकी देशों को सिर्फ मौजूदा वैक्सीन की कमी के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि आने वाले समय में अब बूस्टर डोज को लेकर भी चिंता करनी चाहिए.

राजन से जब पूछा गया कि इकनॉमिक रिवाइवल के लिए वैक्सीनेशन का होना कितना जरूरी है, तो इस पर उन्होंने कहा कि दुनियाभर में या फिर देशों में वैक्सीनेशन को लेकर समानता नहीं है. अमेरिका वैक्सीन की बूस्टर डोज देने की बात कर रहा है, लेकिन अफ्रीका जैसे कई देश ऐसे हैं जहां पर इसकी भारी कमी है.
  • राजन ने वैक्सीन को लेकर फेक न्यूज और इसे लेकर कम जानकारी को लेकर भी चिंता जताई. एक तरफ डेल्टा वायरस लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ लोग वैक्सीन लेने से इनकार कर रहे हैं. ये कई देशों में नजर आ रहा है.

  • रघुराम राजन ने कहा कि, इस वक्त हम लोगों को सब कुछ छोड़कर वैक्सीनेशन पर ध्यान देना चाहिए. अफ्रीका जैसे देशों में 1 फीसदी लोगों को भी पूरी वैक्सीन नहीं लगी है. भारत की बात करें तो यहां भी अब तक करीब 12 फीसदी लोगों को ही दोनों डोज लगाई गई हैं. हमें वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ाना होगा.

  • रघुराम राजन ने कोविड मैनेजमेंट को लेकर कहा कि, यहां पर कोरोना टेस्ट के लिए आरटी-पीसीआर का दाम कोरोना वैक्सीन से भी ज्यादा है. जो चिंता का विषय है. क्योंकि टेस्टिंग काफी जरूरी है.

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लोगों को सीधे पैसे ट्रांसफर करना जरूरी

कोरोना महामारी के चलते लोगों की आय के साधन खत्म हो गए हैं और आय लगभग न के बराबर हो चुकी है. इस पर रघुराम राजन ने कहा कि, लोगों को आर्थिक मदद देना काफी जरूरी है. क्योंकि उनकी आय कम हुई है और किसी ने लोन लिया है तो किसी को अपने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाना है. भारत को छोड़ दें और अमेरिका की बात करें तो वहां के लोगों की आय महामारी में कम होने की बजाय ज्यादा हुई है. क्योंकि वहां सीधे लोगों तक आर्थिक मदद पहुंचाई गई.

रघुराम राजन ने कहा कि, जिन देशों में लोगों को सीधा पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ, वहां लोअर मिडिल क्लास गरीब रेखा से नीचे जा चुके हैं. भारत में गरीबों का ज्यादा नुकसान हुआ है. गरीब बच्चों को ऑनलाइन क्लास लेने को नहीं मिलीं. बच्चे सब कुछ भूल चुके हैं. अगर आप डेढ़ साल स्कूल से दूर रहते हैं तो मान लीजिए कि आप तीन साल पीछे चले गए. मुझे उम्मीद है कि हमारी सरकार बच्चों को स्कूल भेजने के लिए काफी कुछ सोच रही होगी. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम अपनी एक पूरी जेनरेशन को खो देंगे.

इकनॉमिक ग्रोथ को लेकर राजन ने कहा कि, अगर हमारे ज्यादा से ज्यादा लोग बेरोजगार हो रहे हैं और गरीबी की तरफ बढ़ रहे हैं, साथ ही उनके बच्चे भी स्कूल नहीं पढ़ पा रहे तो इससे हमारी भविष्य में होने वाली ग्रोथ का अंदाजा लगाया जा सकता है. जब तक इस सेक्टर में काम नहीं होगा, तब तक फॉर्मल सेक्टर की ग्रोथ देखकर खुश नहीं हो सकते हैं.

राजन ने कहा कि महामारी के दौरान हमारे देश में कुछ बड़े बिजनेस हाउस ऐसे हैं जिन्होंने काफी अच्छी ग्रोथ की. लेकिन भारत में कम कॉम्पिटिशन एक बड़ी समस्या है. ये देश के लिए चिंता की बात है.

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चीन को लेकर राजन ने कहा कि, यहां की कम्युनिस्ट सरकार सबसे बड़ी दिक्कत है. जिसका चीन की कंपनियों पर काफी ज्यादा दबाव है. आज अगर चीन की कोई कंपनी किसी देश में अपना बिजनेस करना चाहे तो चीनी सरकार का हाथ हमेशा उसके ऊपर रहता है. मुझे लगता है कि ये बाकी देशों के लिए एक मौका है, जिनके पास अपना सिक्योरिटी लॉ है.

वैक्सीन पासपोर्ट पर जवाब देते हुए राजन ने कहा कि, मुझे लगता है कि इस पर ग्लोबल लीडरशिप की कमी नजर आती है. हम ये नहीं कह सकते हैं कि ये वैक्सीन यूरोप में बनी है तो इसे वैक्सीन पासपोर्ट दिया जाएगा और ये इंडिया में बनी है तो इसे नहीं मिलेगा.

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