भल्ला, तेजा और रॉबर्ट (फोटो: यूट्यूब)
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हट बुड़बक! भारत के चोरों को तो चुराना भी नहीं आता...

फिल्मों में आपने कई चोरियां देखी होंगी, कितने सुपर कूल होते हैं चोर, और उसमें हॉलीवुड फिल्मों की तो बात ही अलग है. प्लानिंग और गैजेट्स के सहारे वो काफी बड़े-बड़े कारनामे कर जाते हैं. उनसे प्रेरित हो कर लोग स्मार्ट चोरी जैसी वारदातों तक को अंजाम देने की हिम्मत करते हैं.

अब बॉलीवुड चोरी के नाम पर धूल नहीं फांकता, धूम जैसी फिल्मों को देखकर हमारे यहां भी लोग दिमाग तो लगाते हैं लेकिन टांय-टांय फिस्स हो जाते हैं. अब पिछले साल तमिलनाडु में चलती ट्रेन से पैसे चुराए गए. क्या सॉलिड स्टाइल था बॉस, किसी को पता भी नहीं चला, भयंकर रिसर्च की थी ट्रेन की टाइमिंग पर लेकिन चुराने से पहले ये नहीं पता लगाया कि वो नोट रद्दी के भाव के थे.



ट्रेन में जो पैसा था उसमें सारे फटे पुराने खराब नोट थे इसलिए सारे पैसे चेन्नई ले जाए जा रहे थे आरबीआई को वापस करने के लिए. चोरी की लेकिन मिला क्या बाबा जी का ठुल्लू.
ट्रेन में जो पैसा था उसमें सारे फटे पुराने खराब नोट थे इसलिए सारे पैसे चेन्नई ले जाए जा रहे थे आरबीआई को वापस करने के लिए. चोरी की लेकिन मिला क्या बाबा जी का ठुल्लू.
अॉस्टीन क्लेओन (Austin Kleon) की तो किताब का शीर्षक ही था ‘स्टीलिंग लाइक एन आर्टिस्ट’. सही मायने में चोरी के लिए प्रेरित होना पड़ता है, फिर रिसर्च, प्लानिंग और काम चालू. लेकिन अफसोस बॉलीवुड की तरह ही भारतीय चोर भी इसमें फेल होते नजर आ रहे हैं.

अब पिछले ही हफ्ते की बात है, नोबेल सम्मान विजेता कैलाश सत्यार्थी के घर चोरी हुई. वैसे तो चोरों को सोना चांदी चुराना था पर नोबेल पुरस्कार आम तौर पर घरों में तो मिलता नहीं है, तो उन्होंने वो भी चुरा लिया.

बिग गलती कर दी!

(फोटो: kailashsatyarthi.net)
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भला कोई जिंदगी भर की मेहनत के बाद कमाया नोबेल अपने घर की अलमारी में रखेगा क्या? तो सत्यार्थी साहब ने भी नहीं रखा, उसका रेप्लिका घर में सजाया था. चोरों ने ठीक से रिसर्च नहीं की और नोबेल की रेप्लिका ही चुरा ले गए, सोचा होगा बेचेंगे तो लाखों में बिकेगा. लेकिन ये रेप्लिका उनके गले की फांस बन गई और उन्होंने 2 दिन में ही इससे पिंड छुड़ा लिया, नतीजा दिल्ली पुलिस ने ऐलान किया कि उन्होंने कैलाश सत्यार्थी का नोबेल बरामद कर लिया है.

अगर आपको चोरी की ये कहानी बेहद निराशाजनक लगी है तो हमारे पास ऐसे और बुड़बक चोरों के कारनामे हैं जो इस धंधे को मंदा करने के लिए काफी है.

गाड़ी नहीं चाबियों की चोरी

(फोटो: iStock)
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केरल के एर्नाकुलम में 300 स्कूटरों की चाबियां चुराई गईं, सिर्फ चाबियां. चोरी पेशे की इससे बड़ी बेइज्जती इससे पहले आपने नहीं देखी होगी.

दरअसल एर्नाकुलम में कलेक्टर के घर के आस-पास कहीं 300 स्कटूर्स रखे गए थे. ये स्कूटर विकलांगों को बांटे जाने थे. मजे की बात ये है कि सभी स्कूटर की गर्दन में चाबी लगी हुई थी. चोरों की मौज हो गई, इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है, चोर बन-ठन कर पहुंचे चोरी करने और 300 चाबियां ही चुरा पाए.

जानते हैं क्यों? क्योंकि उन स्कूटरों में पेट्रोल ही नहीं था.

अंदाज अपना अपना फिल्म के ‘गोगो’ तरह चोरों ने भी सोचा ‘आए है तो कुछ तो लेकर जाएंगे’, तो उन्होंने चाबियां चुरा ली.

ATM की चोरी में हुए कन्फ्यूज



(फोटो: iStock)
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बकलोल चोर किसे कहते हैं ये गुवाहाटी के इन चोरों के कारनामे से सही-सही पता चलता है. गुवाहाटी में SBI का ATM चुराने गए 4 चोर हड़बड़ी में ATM मशीन और पासबुक प्रिंट करनेवाले मशीन में कन्फूज हो गए. इन्हें मशीन ले जाते हुए देखा गया और फिर पकड़ा भी लिया गया और तब पता चला कि मिशन तो ATM मशीन चुराने का था, पर ‘गलती से मिस्टेक हो गया’. ये किस्सा नोटबंदी से पहले का है, तब ATM में पैसे होते ही थे. तो प्लान गलत नहीं था बस मशीन गलत थी.

चोरी कर और OLX पर बेच दे

हैलो मिस्टर चोर, धूम के जॉन नहीं बन सकते तो कम से कम अभिषेक बच्चन तो बन लो भाई, ये जनाब चले थे स्मार्ट चोरी करने वो भी OLX पर.

लोगों को कुत्तों से काफी लगाव होता है और लोग उन्हें काफी अच्छी रकम देकर खरीद भी लेते हैं. इसलिए चेन्नई के दो नौजवानों ने आसान रास्ता अपनाया, एक घर से कुत्ते को भगा ले गए. और फिर उसे बेचने के लिए और भी आसान तरीका अपनाया, फोटो लिया और OLX पर डाल दिया.

स्मार्टनेस वहीं की वहीं धरी रह गई, कुत्ता खरीदने के लिए पुलिस ने OLX पर कॉन्टैक्ट कर लिया.

नोटबंदी के बाद चोरी हुई मुश्किल



(फोटो: iStock)
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नोटबंदी ने तो काफी मुश्किलें बढ़ा दी हैं, चोरी कमबख्त है भी तो इनफॉर्मल सेक्टर तो डिजिटल ट्रांजैक्शन का तो ऑप्शन ही नहीं है. जैसे गुरूग्राम में एक दिहाड़ी मजदूर शाम को अपनी दिहाड़ी के पैसे लेकर घर वापस लौट रहा था. उसे बीच रास्ते में रोक कर एक चोर उसके पैसे छीन कर भाग गया. पर जब चोर ने देखा कि ये तो सारे 500 के नोट हैं, तो उसने उस मजदूर को ढूंढा और पैसे वापस दे आया, फिर जाते जाते एक तमाचा मारा और कहा कि नोटबंदी हो गई है, ये नोट नहीं चलेंगे, 100 का नोट लेकर घूमना.

चोरी वो करो जो हजम हो पाए

मुंबई में रास्ते पर चलते हुए एक शख्स की चेन एक चोर छीनकर रफ्फूचक्कर हो गया, पर नसीब इतनी खराब की भागते- भागते पुलिस की गाड़ी के पास से गुजरा. पुलिस वालों की नजर पड़ी तो पीछा शुरू किया और थोड़ी देर में चोर को घर दबोचा. चोर ने कहा- साहब नो चोरी, पुलिसवालों ने तलाशी ली लेकिन चेन कहीं नहीं मिला. पर पुलिसवाले तो पुलिसवाले ठहरे, चोर पर कैसे भरोसा करें, थोड़ी सख्ती बरती तो चोर ने बताया चेन निगल ली है. पुलिसवालों को अब कुछ नहीं करना था बस नमक और पानी मंगवाना था. घोल कर पिलाते गए और चोर उगलता गया.

इन चोरों की कहानी से ये साफ है की इनका फोकस ही कमजोर था. चोरी को अगर निष्ठा से अंजाम दो तो चोरी की लाज बची रहेगी.