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बहुत मशहूर फिल्मी गीत था हम बेवफा हरगिज़ ना थे पर हम वफा कर ना सके ये लाइने एकदम सटीक बैठती है सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) पर जो जाते तो कई पार्टियों में लेकिन वहां वफा नहीं कर पाते. यूपी की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर एक नाम हैं जो अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. जिनके बारे में कहा जाता है कि उनका पूर्व में अनुमान लगाना मुश्किल है.
2017 में ओपी राजभर बीजेपी के साथ मंत्री थे फिर 2022 में अखिलेश के साथ आए और वो साथ भी खत्म हो गया है. अब ओम प्रकाश राजभर का रुख किस तरफ होगा इन बातों के लिए सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने क्विंट से बातचीत में बताया की "भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) से गठबंधन की चर्चाओं में कोई सच्चाई नहीं है. ये सिर्फ अटकलें हैं राजभर का नाम आने पर सभी राजनैतिक पार्टियां उन्हे बुलाने का काम करती हैं और गठबधन चुनाव के कुछ महीनो पहले होता है अभी लोकसभा चुनाव में डेढ़ साल बचे हैं. सुभासपा पार्टी दलितों के हित में काम करने वाली पार्टी है जो दलितों के हित में होगा हमारे मुद्दों को उठाएगा हमारी पार्टी उसी के साथ जाएगी."
साथ ही राजभर ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा.
शिवपाल यादव की पार्टी में वापसी को लेकर भी राजभर ने कहा कि, समाजवादी पार्टी कुछ कर ले अब किसी तरह से भी मजबूत नही हो पाएगी आज यहां चर्चाएं आम है की समाजवादी पार्टी गुंडाराज की पार्टी हैं. सच्चाई ये है शिवपाल यादव 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के चिन्ह पर चुनाव जीते हैं देखा जाए तो पहले से ही सपा के विधायक हैं. अगर उन्होने अपनी प्रगतिशील पार्टी बनाई है तो विधानसभा चुनाव अपने सिंबल पर क्यों नहीं लड़े. इसलिए अब इसका कोई असर नहीं है शिवपाल के जाने से या आने से समाजवादी पार्टी को ना कोई लाभ है ना नुकसान.
चीन की घुसपैठ को लेकर विपक्ष के हमलावर होने पर राजभर ने कहा कि जब सवाल देश का हो तो भारतीय सुहेल देव समाज पार्टी सरकार के साथ रहती है. अगर विपक्ष को ऐसा लगता है कि सरकार बैक फुट पर है, और लगातार हो रही घुसपैठ का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाल पा रही है तो, विपक्ष अबतक क्यों सोया था. अगर विपक्ष आरोप लगा रहा है तो उसको साक्ष्य देना चाहिए. साथ ही जाति जनगणना को एक अहम मुद्दा बताते हुए राजभर ने कहा कि जाति जनगणना की संविधान में व्यवस्था है तो आज नहीं कल जातिवाद जनगणना निश्चित होगी सबको एकमत होना पड़ेगा क्योंकि, अब जातियां जाग रही हैं अपने हक के लिए सचेत हो रही हैं.
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