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नोटबंदी नहीं रिप्लेसमेंट: RBI का नोट वापसी का फैसला अर्थव्यवस्था में रुकावट नहीं

RBI का नोटों को वापस लेने का कदम गलती से चलन में डाल दिए गए एक खास मूल्यवर्ग के नोटों का औपचारिक चरणबद्ध खात्मा है.

सुभाष चंद्र गर्ग
नजरिया
Published:
<div class="paragraphs"><p>RBI का नोट वापसी का फैसला अर्थव्यवस्था में रुकावट नहीं डालेगा</p></div>
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RBI का नोट वापसी का फैसला अर्थव्यवस्था में रुकावट नहीं डालेगा

(फोटो: क्विंट हिंदी)

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भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने अपनी क्लीन नोट पॉलिसी के तहत भारतीय पेपर करेंसी नोटों की सामान्य उम्र चार से पांच साल होने का आकलन जाहिर किया है. यह दावा करते हुए कि मार्च 2017 से पहले जारी किए गए 2000 रुपये के करेंसी नोटों में से तकरीबन 90 फीसद अपने सक्रिय जीवन के अंतिम दौर में हैं, RBI ने 19 मई 2023 को 2000 रुपये मूल्य के नोटों को औपचारिक रूप से सर्कुलेशन से वापस लेने का ऐलान किया है.

इस कदम ने मीडिया और उन लोगों में, जिनके मन में नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपये के नोटों की बेहद तकलीफदेह नोटबंदी की याद है, थोड़ी सनसनी पैदा कर दी है.

RBI की तरफ से करेंसी नोटों की वापसी कोई नोटबंदी नहीं है. करेंसी नोटों की कानूनी मुद्रा की स्थिति को वापस लेने का अधिकार सरकार के पास है, RBI के नहीं. इसलिए 2000 रुपये के नोट पूरी तरह वैध मुद्रा बने रहेंगे. RBI के उपाय मोटे तौर पर इन नोटों को रखने वाले लोगों को सर्कुलेशन में चल रहे दूसरे करेंसी नोटों से बदल लेने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास है.

  • RBI द्वारा 2000 रुपये के नोटों को वापस लेना नोटबंदी नहीं है. करेंसी नोटों की कानूनी मुद्रा की स्थिति को वापस लेने का अधिकार सरकार के पास है, RBI के नहीं.

  • 2000 रुपये के करेंसी नोट को एक सोचे-समझे उपाय के रूप में नहीं, बल्कि एक फौरी कदम के तौर पर जारी किया गया था, जो इस्तेमाल के लिए आसानी से उपलब्ध हो.

  • नोटबंदी के बाद 2000 रुपये के करेंसी नोटों के चलने में आने के बाद जल्द ही इसके चलन से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी.

  • 2000 रुपये के करेंसी नोटों का तुलनात्मक महत्व और भी कम हो गया है. मार्च 2017 के अंत में 2000 के करेंसी नोट चलन में मुद्राओं के 2/3 से ज्यादा थे, जबकि मार्च 2018 के अंत तक यह घटकर 37.3 फीसद हो गया.

  • सर्कुलेशन से 2000 रुपये के नोटों को वापस लेना कोई बड़ी घटना नहीं है और सिर्फ एक अनुचित मूल्यवर्ग के नोट को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की औपचारिक प्रक्रिया है, जिसे नोटबंदी के समय मोटे तौर पर तात्कालिक वजहों से चलन में लाया गया था.

2000 के नोट: जारी होना और वापसी

नवंबर 2016 में नोटबंदी के समय 2000 रुपये के करेंसी नोटों की शुरुआत एक तरह से अटपटा फैसला था. नोटबंदी इस आधार पर की गई थी कि 1000 और 500 के करेंसी नोट काले धन की जमाखोरी और भ्रष्टाचार की आमदनी के लिए इस्तेमाल किए जाने के लिए बहुत कारगर थे. फिर भी, जब 86 फीसद करेंसी एक झटके में ही अवैध हो गई थी, तो सरकार ने सर्कुलेशन में घटी हुई करेंसी की भरपाई के लिए 2000 रुपये के बहुत ज्यादा मूल्य के नोट जारी किए.

2000 रुपये के करेंसी नोट को एक सोचे-समझे उपाय के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे उपाय के रूप में पेश किया गया था, जो फौरी तौर पर आसानी से किया जा सकता था. सरकार ने शायद ऊंची कीमत के नोट चलन में लाने के लिए नोटबंदी से कुछ महीने पहले 2000 रुपये के नोटों की छपाई को मंजूरी दी थी.

2000 रुपये के नोट की किस्मत इसके आने से पहले ही तय हो चुकी थी. बस इसे जल्द से जल्द अपने खात्मे का सफर तय करना था.

RBI ने अपनी प्रेस रिलीज में यह भी कहा है कि नोटबंदी के बाद नवंबर 2016 में 2000 के नोट को खासकर अर्थव्यवस्था में करेंसी की जरूरत को तेजी से पूरा करने के लिए जारी किया गया था.

RBI ने आगे कहा है कि 2000 रुपये के नोट को जारी करने का मकसद पूरा हो गया है, और नोटबंदी के बाद एक बार दूसरे मूल्यवर्ग के करेंसी नोट भरपूर मात्रा में उपलब्ध हो जाने के बाद इसकी उपयोगिता खत्म हो गई है. सीधे शब्दों में कहें तो, सर्कुलेशन में मुद्रा के हिस्से के रूप में 2000 के नोट बेमानी हो गए थे.

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नोटबंदी के बाद ही चरणबद्ध ढंग से खात्मा शुरू हो गया था

नोटबंदी के बाद बहुत जल्द ही 2000 रुपये के नोटों के खात्मे की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. जब जुलाई-अगस्त 2017 में 2000 के नोटों की छपाई रोकने का सैद्धांतिक फैसला लिया गया, उस समय 2000 के नोटों का कुल मूल्य लगभग सात लाख करोड़ रुपये था.

मार्च-अप्रैल 2018 में छोटे करेंसी नोटों की कमी के संकट से निपटने के लिए 2000 रुपये के नोटों की एक छोटी मात्रा छापी गई थी. RBI की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 2018-19 में 2000 के नोटों की छपाई पूरी तरह से बंद कर दी गई थी. 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद होने से इन नोटों के खात्मे का रास्ता मजबूती से पक्का हो गया था. भले ही अब औपचारिक रूप से इन नोटों को अलविदा कहने का फैसला लिया गया है, मगर सरकार ने 2018-19 में ही 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने का रास्ता आसान बनाने के लिए 500 रुपये के नोटों की सामान्य रूप से जरूरत की तुलना में बहुत ज्यादा छपाई की थी.

इसके बाद 2000 के नोट जारी करने की प्रक्रिया धीमी करने की शुरुआत हुई. बैंकों द्वारा अपने सामान्य सर्कुलेशन में मिले नोटों का एक बड़ा हिस्सा खत्म करने के लिए RBI को वापस कर दिया गया था. बैंकों ने धीरे-धीरे काउंटरों या एटीएम से लोगों को 2000 रुपये के नोटों की डिलीवरी बंद कर दी. कुछ महीने पहले बैंकों ने ATM से 2000 रुपये की ट्रे हटाना शुरू किया था. नतीजतन, सर्कुलेशन में 2000 रुपये के नोटों की मात्रा काफी कम हो गई. RBI ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में यह भी जिक्र किया है कि सर्कुलेशन में 2000 के नोटों का कुल मूल्य 31 मार्च 2018 के सर्वोच्च स्तर पर 6.73 लाख करोड़ रुपये से घटकर 3.62 लाख करोड़ रुपये रह गया था.

2000 रुपये के नोटों का तुलनात्मक महत्व और भी कम हो गया है. जैसा कि RBI ने बताया है मार्च 2017 के अंत में 2000 रुपये के नोट करेंसी सर्कुलेशन के 2/3 से ज्यादा थे, मार्च 2018 के अंत तक यह घटकर 37.3 फीसद हो गया था. RBI ने आगे सही कहा है कि 2000 रुपये के नोटों का आमतौर पर लेनदेन में इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

वैध मुद्रा बने रहेंगे 2000 रुपये के नोट

19 मई को 2000 रुपये के नोटों को वापस लेना 2000 के नोटों के अंतिम सफर का अंतिम कदम है. सितंबर के अंत तक (शायद इससे भी पहले) सर्कुलेशन से तकरीबन सभी बाकी 2000 रुपये के नोट RBI की मंजिल तक पहुंच जाएंगे और ये नोट भारतीय मुद्रा प्रणाली के इतिहास में दर्ज हो चुके होंगे.

इस कदम से लोगों के मन में इससे जुड़े कुछ सवाल पैदा होते हैं. पहला, ऐसा मामला लोगों के पास मौजूद इन नोटों को RBI को सौंपने की प्रक्रिया से जुड़ा है. चूंकि 2000 रुपये के नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे, इसलिए लोग इनका इस्तेमाल 23 मई 2023 से सरकार, कारोबार और सेवाओं के लिए पेमेंट करने के लिए कर सकते हैं या इन्हें अपने बैंक खाते में जमा कर सकते हैं या दूसरे मूल्य के नोटों से बदलने के लिए कर सकते हैं.

इस प्रक्रिया में किसी तरह की घबराहट, जल्दबाजी या डर की जरूरत नहीं है. सर्कुलेशन में तकरीबन सभी 2000 के नोटों के RBI में वापस आने की उम्मीद काफी आसान है. किसी को कोई परेशानी या नुकसान होने की उम्मीद नहीं है.

2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन की करेंसी का एक छोटा सा हिस्सा हैं और रोजमर्रा के लेन-देन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इसके अलावा पिछले पांच-छह वर्षों में ग्लोबल ट्रेंड के हिसाब से भारत में काफी भुगतान डिजिटल मोड में होने लगा है. 2000 रुपये के नोटों का खात्मा, जो असल में दूसरे मूल्य के नोटों से रिप्लेसमेंट है, सर्कुलेशन में कुल मुद्रा पर असर नहीं डालेगा और इसलिए इसका मौद्रिक नीति पर कोई असर नहीं होगा. न ही यह भारत की आर्थिक और वित्तीय प्रणाली के संचालन पर असर डालेगा. इसका GDP ग्रोथ या जन कल्याण पर शून्य असर होने वाला है.

सर्कुलेशन से 2000 रुपये के नोटों को वापस लेना कोई बड़ी घटना नहीं है और सिर्फ एक गैरजरूरी मूल्यवर्ग के नोट को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की औपचारिक प्रक्रिया है, जिसे नोटबंदी के समय मोटे तौर पर तात्कालिक वजहों से चलन में लाया गया था.

(लेखक भारत सरकार के वित्त और आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव हैं. यह एक ओपिनियन पीस है. यहां लिखे विचार लेखक के अपने हैं. क्विंट हिंदी का उनसे सहमत होना जरूरी नहीं है.)

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