‘पंगा’ रिव्यू: कंगना की एक्टिंग बेमिसाल, फिल्म की कहानी शानदार
इस फिल्म की कहानी को लाखों संभावनाओं के साथ इस वादे पर खत्म किया गया है कि ये सभी संभावनाएं पूरी होंगी
इस फिल्म की कहानी को लाखों संभावनाओं के साथ इस वादे पर खत्म किया गया है कि ये सभी संभावनाएं पूरी होंगीफोटो:Twitter 

‘पंगा’ रिव्यू: कंगना की एक्टिंग बेमिसाल, फिल्म की कहानी शानदार

फिल्म पंगा एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो अपने सपनों को जीने की कोशिश कर रही है. अश्विनी अय्यर तिवारी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को एक स्पोर्ट्स ड्रामा कहा जा सकता है. ये एक कबड्डी प्लेयर की कहानी जो टीम में वापस आने की जद्दोजहद में लगी है. फिल्म में किसी बड़े एथलेटिक इवेंट के जरिए कोई रोमांच पैदा करने की बजाय, बेहद ही सादगी और सरल तरीके से कहानी को आगे बढ़ाया गया है.

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जया का किरदार एक मां का है जो घर और ऑफिस के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है.
जया का किरदार एक मां का है जो घर और ऑफिस के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है.
फोटो:Twitter 

जया का किरदार एक मां का है, जो घर और ऑफिस के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है. जया रेलवे में टिकट काउंटर में नौकरी करती है, जया निगम के किरदार में कंगना रनौत एक समय कबड्डी की नेशनल प्लेयर और कैप्टन रही हैं, मगर अब वह 7 साल के बेटे की मां और प्रशांत जस्सी गिल की पत्नी बनकर घर संभाल रही हैं.

‘सात साल दो महीने हुए मुझे कबड्डी छोड़े हुए’ जया अपनी दोस्त और कबड्डी कोच मीनू को ये बताती है कि वो अपना पसंदीदा खेल कितना मिस कर करती है. अपनी बुलंदियों को पीछे छोड़ चुकी जया अपना वर्तमान किसी भी वजह से खराब नहीं करना चाहती, लेकिन फिर भी अपने खेल कब्ड्डी की यादों से बाहर आना उसके लिए मुश्किल है.

अश्विनी और निखिल मेहरोत्रा, जिन्होंने स्क्रिप्ट लिखी है और नितिन तिवारी, जिन्होंने फिल्म का स्क्रीनप्ले तैयार किया है, उन्हें इस फिल्म को बनाने के लिए श्रेय दिया जाना चाहिए, क्योंकि फिल्म पंगा के जरिए इन लोगों ने एक अहम सवाल उठाया है. कि, एक महिला को अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल सक्सेस में से किसी एक को क्यों चुनना पड़ता है?

फिल्म में ये देखना काफी इंटरेस्टिंग है कि जया की जिंदगी में कोई विलेन नहीं है. एक मां है जो उसे हर उस चीज के लिए सपोर्ट करती है जो जया करना चाहती है. एक पति जो उसे बेइंतहा प्यार और सपोर्ट करता है. और एक छोटा सा बेटा यज्ञ भसीन जिसकी चुलबुली नादानियां दर्शकों का दिल खुश कर देंगी. मददगार पड़ोसी, ईमानदार दोस्त यहां तक कि हौसला बढ़ाने वाले खेल अधिकारी सब जया के साथ देते है, सिवाय एक खड़ूस बॉस और कबड्डी टीम की कैप्टन जो जया की दुश्मन है. ऐसे में जया का खेल में वापसी करना थोड़ा मुश्किल नजर आता ह.

‘सात साल दो महीने हुए मुझे कबड्डी छोड़े हुए’ जया अपनी दोस्त और कबड्डी कोच मीनू को ये बताती है कि वो अपना पसंदीदा खेल कितना मिस कर करती है.
‘सात साल दो महीने हुए मुझे कबड्डी छोड़े हुए’ जया अपनी दोस्त और कबड्डी कोच मीनू को ये बताती है कि वो अपना पसंदीदा खेल कितना मिस कर करती है.
फोटो:Twitter 

शानदार स्क्रीनप्ले, और किरदारों की दमदार परफॉर्मेंस के साथ ‘पंगा’ एक बेहतरीन फिल्म है. फिल्म में कंगना बेमिसाल हैं. ऋचा चड्ढा ने एक वफादार दोस्त का किरदार शानदार तरीके से निभाया है. और स्क्रिन पर नीना गुप्ता की एक्टिंग दर्शकों के दिल में ठंडक पहुंचाने का काम जरूर करेगी.

इस ग्रैंड कहानी का अंत काफी कमजोर है. इस फिल्म की कहानी को लाखों संभावनाओं के साथ इस वादे पर खत्म किया गया है कि ये सभी संभावनाएं पूरी होंगी और यही ‘पंगा’ की खूबसूरती है. जब हम बहुत कुछ कर सकते हैं तो खुद को सीमित क्यों रखें?

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