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"मैं INDIA के साथ": दिल्ली सेवा बिल पर वोटिंग में क्यों नहीं पहुंचे जयंत चौधरी?

Jayant Chaudhary ने कहा कि इसी महीने महाराष्ट्र में होने वाली विपक्ष की बैठक में मैं शामिल रहूंगा.

पीयूष राय
पॉलिटिक्स
Published:
<div class="paragraphs"><p>जयंत चौधरी</p></div>
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जयंत चौधरी

(फोटो- ट्विटर/@jayantrld)

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राज्यसभा में दिल्ली सेवा बिल की चर्चा और वोटिंग के दौरान राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है. हालांकि, बाद में चौधरी ने अपनी गैर मौजूदगी पर सफाई देते हुए क्विंट हिंदी से कहा, "मैं अपने व्यक्तिगत कारणों से वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं रह पाया. इसके पीछे कोई राजनीतिक वजह नहीं है."

जयंत चौधरी को लेकर लगाए जा रहे हैं कयास

इसी साल जून में हुए गठबंधन की पहली मीटिंग में चौधरी शामिल नहीं हो पाए थे. जयंत चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे एक पत्र में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हवाला देते हुए विपक्ष की मीटिंग में शामिल होने पर असमर्थता जताई थी. यहीं से चर्चाओं का एक अलग दौर शुरू हो गया और कई मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कयास लगाए जाने लगे कि चौधरी बीजेपी के संपर्क में हैं.

इन चर्चाओं को और बल तब मिला, जब पिछले महीने 6 जुलाई को जयंत चौधरी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, "खिचड़ी, पुलाव, बिरयानी, जो पसंद है खाओ! वैसे चावल खाने ही हैं तो खीर खाओ!"

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'हम लोग गठबंधन के साथ हैं'

राजनीतिक गलियारों की चर्चाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के दावों को खारिज करते हुए चौधरी ने क्विंट हिंदी से बातचीत के दौरान बताया कि उनकी विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A में सक्रिय सहभागिता है और जारी रहेगी.

हम सब शुरुआत से उत्साहित हैं और आगे इसी महीने महाराष्ट्र में होने वाली चर्चाओं के दौरान मैं शामिल रहूंगा. मैं बेवजह की अफवाहों पर जवाब नहीं देता. हम लोग गठबंधन के साथ हैं और संसद के अंदर और बाहर की गतिविधियों में हिस्सा लेते रहेंगे.
जयंत चौधरी, RLD, अध्यक्ष

SP-RLD में दिखे मतभेद

जहां RLD विपक्ष के गठबंधन I.N.D.I.A में अपना समन्वय स्थापित करने में लगी हुई है वहीं दूसरी तरफ राज्य में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को मजबूती से बनाए रखना भी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है. दोनों पार्टियों में चुनाव के दौरान सीट के बटवारे को लेकर मतभेद उभर कर आते हैं. यही कारण है कि इस साल हुए निकाय चुनाव में दोनों ही पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं हो पाया.

'छोटे-मोटे मतभेद होते रहते हैं'

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राज्य के अंदर गठबंधन के समीकरण पर बात करते हुए जयंत चौधरी ने कहा: "विधानसभा का सत्र चल रहा है. हमारे सारे विधायक अखिलेश जी और फ्लोर के नेताओं से जाकर मिले. हम लोग समन्वय बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य के कठिन सवालों को सदन में उठा रहे हैं. दो पार्टियां जब एक साथ काम करती हैं तो छोटे-मोटे मतभेद होते रहते हैं. इसको बड़ा बनाकर पेश नहीं करना चाहिए."

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