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मोदी कैबिनेट से शिंदे-अजित का 'दिल टूटा', BJP को विधानसभा चुनाव में भारी पड़ेगी यह कसक?

Maharashtra | "शिवसेना को बीजेपी का पुराना दोस्त माना जाता है. लेकिन ऐसा लगता है कि बीजेपी हमारे साथ सौतेला व्यवहार कर रही है."

क्विंट हिंदी
पॉलिटिक्स
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<div class="paragraphs"><p>महाराष्ट्र: क्या एकनाथ शिंदे और अजित पवार की नाराजगी आगामी विधानसभा चुनाव पर भारी पड़ेगी?</p></div>
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महाराष्ट्र: क्या एकनाथ शिंदे और अजित पवार की नाराजगी आगामी विधानसभा चुनाव पर भारी पड़ेगी?

(फोटो- क्विंट हिंदी)

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मोदी सरकार (Modi Cabinet) में 71 मंत्रियों ने शपथ ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) से 6 नेताओं को मंत्री पद दिया गया. लेकिन इसमें से 4 तो BJP से हैं, 1 एकनाथ शिंदे की शिवसेना (Shiv Sena) से और एक आरपीआई के रामदास अठावले.

यानी अजित पवार (Ajit Pawar) की एनसीपी (NCP) को कोई मंत्री पद नहीं मिला. साथ ही शिंदे की सारी मांगे पूरी नहीं की गई. ऐसे में पार्टी के भीतर से सवाल खड़े हो रहे हैं, और ऐसा दिख रहा है जैसे पवार और शिंदे नाखुश हैं. इससे ये भी संकेत मिलते हैं कि पवार और शिंदे का पलड़ा एनडीए में भारी नहीं हैं.

ध्यान देने वाली बात है कि बिहार में जीतन राम मांझी ने एक सीट जीती है. यूपी में अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल ने एक सीट जीती है- और दोनों को कैबिनेट में जगह दी गई है. लेकिन महाराष्ट्र में जहां विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, वहां शिंदे की शिव सेना ने 7 सीटें जीतीं लेकिन उन्हें केवल एक ही मंत्री पद दिया गया. उधर अजित पवार की पार्टी एक ही सीट निकाल पाई लेकिन उन्हें कोई मंत्री पद नहीं दिया गया. आखिर क्यों?

पहले अजित पवार की बात करते हैं. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि "एनसीपी को राज्य मंत्री का पद ऑफर किया गया लेकिन उन्होंने मना कर दिया, हालांकि आगे जब भी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तक एनसीपी को ध्यान में रखा जाएगा."

वहीं एनसीपी नेता प्रफुल पटेल ने कहा कि वे पहले भी कैबिनेट में रह चुके हैं, ऐसे में अगर उन्हें कैबिनेट मंत्री की जगह राज्य मंत्री का पद मिलेगा तो ये उनके लिए डिमोशन हैं. उन्होंने कहा वे इंतजार करने के लिए तैयार हैं और बीजेपी और एनसीपी के बीच सब ठीक है.

उन्होंने ये भी कहा कि, "हमारे पास एक लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद (सुनील तटकरे और प्रफुल पटेटे) हैं. आने वाले महीनों में, हमारे पास दो और राज्यसभा सांसद होंगे. फिर हमारे पास चार सांसद होंगे और हमें कैबिनेट बर्थ मिलनी चाहिए. हम इंतजार करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें कैबिनेट बर्थ चाहिए."

ये बात तो साफ है कि अजित पवार की एनसीपी को कैबिनेट में जगह चाहती है. लेकिन वो इंतजार करने के लिए भी तैयार है, ऐसे में आगे एनसीपी की राजनीति पर नजर रखना दिलचस्प होगा.

पवार और शिंदे दोनों ने अपनी मूल पार्टियों से अलग होकर और बीजेपी के साथ गठबंधन करके एक बड़ा फैसला लिया है. महाराष्ट्र को उम्मीद थी कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी, दोनों को कैबिनेट में जगह मिलेगी. हमारे पास सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के रूप में दो सांसद हैं. हमारी पार्टी की उम्मीद थी कि कम से कम पटेल को इस बार कैबिनेट में जगह मिलेगी. इसलिए इन पार्टियों के कार्यकर्ता हमारी पार्टियों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर रखे जाने से नाराज हैं. पटेल पहले भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं.
पुणे के पिंपरी से NCP विधायक अन्ना बनसोडे

शिव सेना ने सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया

उधर एकनाथ शिंदे की शिव सेना से भी नाराजगी देखने को मिली. मावल से तीसरी बार जीत दर्ज करने वाले शिवसेना नेता श्रीरंग बारणे ने कहा, "हमारी पार्टी ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा, इनमें 7 सीटों पर जीत हासिल की है. ऐसे में हमें एक कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ एक राज्य मंत्री का पद भी दिया जाना चाहिए था. उन्होंने आगे कहा, जेडीएस के दो सांसद हैं और एचडी कुमारस्वामी को कैबिनेट में जगह दी गई है. इसी तरह, हिंदुस्तान अवामी मोर्चा से एकमात्र सांसद हैं और जीतन राम मांझी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पांच सांसद हैं और चिराग पासवान को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हम भी स्ट्राइक रेट को देखते हुए निश्चित रूप से कैबिनेट बर्थ और एक राज्य मंत्री के हकदार थे.

उन्होंने आगे कहा, "चूंकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महज तीन महीने का समय बचा है. ऐसे में बीजेपी शिवसेना को एक कैबिनेट और राज्यमंत्री का पद दे सकती थी. बीजेपी ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे सिर्फ 9 सीटें मिलीं. जबकि शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना ने 15 में से 7 सीटें जीतीं. शिवसेना को बीजेपी का पुराना दोस्त माना जाता है. लेकिन ऐसा लगता है कि बीजेपी हमारे साथ सौतेला व्यवहार कर रही है."

हालांकि, एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे ने बारणे के बयान को लेकर कहा कि, "वो मोदी सरकार को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं. इस देश को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की जरूरत है और इसकी मांग भी है. सत्ता के लिए कोई सौदेबाजी या बातचीत नहीं है. हमारी पार्टी और इसके सभी विधायक और सांसद एनडीए के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं."

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नाराज शिव सेना और NCP का असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा?

शिव सेना और एनसीपी की नाराजगी का प्रभाव महाराष्ट्र में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है. कैबिनेट में जगह को लेकर जिनकी मांग पूरी नहीं हुई क्या उनका दबदबा विधानसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग में देखने को मिलेगा? इसका जवाब शिव सेना और एनसीपी के बयानों में संकेतों के रूप में देखने को मिल सकता है.

  • शिवसेना नेता श्रीरंग बारणे कहते हैं, "जेडी(यू) और टीडीपी के बाद शिवसेना बीजेपी की तीसरी सबसे मजबूत सहयोगी है. आने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शिवसेना को न्याय मिले, यह हमारी मांग है. एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद मिलने की हमें आशा थी. बीजेपी के 61 नेताओं और अलायंस पार्टियों के 11 नेताओं ने शपथ ली है. पार्टी के नेता एकनाथ शिंदे के सामने हम यह बात रख चुके हैं."

  • विधानसभा सीटों में समान हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने कहा कि पार्टी के पास पहले से ही 50 से अधिक सीटें हैं. इन सीटों के बारे में तो कोई सवाल ही नहीं है. हमें अतिरिक्त सीटें भी मिलेंगी."

  • एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे कहते हैं, “हमारे साथ पहले से ही 53 विधायक और कुछ अन्य निर्दलीय विधायक हैं. हमें जो भी मिलेगा, वह इससे कहीं अधिक होगा. मैं आपको नंबर भी बता सकता हूं. लेकिन मैं चाहता हूं कि सीटों के बंटवारे पर कोई टिप्पणी न हो क्योंकि इससे अन्य दलों को प्रतिक्रिया मिलती है और इससे गठबंधन में माहौल खराब हो जाएगा."

  • पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल भी कहते हैं, “पिछली बार यह कहने के लिए मेरी आलोचना की गई थी कि हमें कम से कम 80 सीटें मिलनी चाहिए. हम स्वीकार करते हैं कि बीजेपी बड़ा भाई है, लेकिन हमारे पास भी एकनाथ शिंदे की तरह 40-45 विधायक हैं... इसलिए, हमें उनके (शिंदे सेना) जितनी सीटें मिलनी चाहिए."

इन बयानों से संकते मिलते हैं कि कैबिनेट से नाखुश शिव सेना और एनसीपी विधानसभा चुनाव में दबदबा रखने की कोशिश करेगी. हालांकि बीजेपी इससे कैसे निपटेगी और इसे कैसे संभालेगी, ये देखने वाली बात होगी. आगे महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर बनाए रखिए, बहुत कुछ मिलने वाला है.

पवार और शिंदे ने लोकसभा चुनाव में कितने झंडे गाढ़े?

NCP (अजीत पवार) ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल एक ही सीट पर जीत हासिल की. साथ ही अजित पवार दो हाई प्रोफाइल सीट भी जीतने में नाकामयाब रहे. एक बरामाति जहां शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले मैदान में थी और सामने अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार खड़ी थीं. दूसरी शिरूर सीट है जहां शरद पवार के उम्मीदवार सामने थे लेकिन दोनों सीटों पर शरद पवार की पार्टी ने जीत दर्ज की.

उधर शिव सेना (एकनाथ शिंदे) 15 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 7 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई. जिन 13 सीटों पर ठाकरे गुट की सेना थी वहां 7 सीटों पर शिंदे के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.

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