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Parliament Winter Session: संसद में गूंजेगा महंगाई,ED-CBI का मुद्दा,16 बिल आएंगे

Parliament winter session : महंगाई, चीन सीमा विवाद, चुनाव आयुक्त की नियुक्ति किन मुद्दों पर घिर सकती है सरकार?

Published
कुंजी
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संसद का शीलकालीन सत्र (Parliament Winter Session) शुरू हो चुका है. यह 29 दिसंबर तक चलेगा. इस पूरे सत्र में लगभग 17 बैठकें आयोजित की जाएंगी. शीतकालीन सत्र में जहां सरकार की ओर कई विधेयक (बिल) पेश किए जाएंगे, वहीं विपक्ष प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा. विपक्ष की ओर से कहा गया है कि 17 दिनों के इतने छोटे से सत्र में 24-25 मुद्दों पर चर्चा कैसे हो सकती है? आइए जानते हैं कि इस सत्र में किनते बिल पेश होंगे और विपक्ष किन मुद्दों को उठाएगा, साथ ही चुनौतियां क्या होंगी?

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सरकार की ओर से कितने बिल प्रस्तुत किए जाएंगे

इस बार के सत्र में सरकार के एजेंडे में 25 बिल होंगे, जिसमें से 16 नए, 7 पेंडिंग और 2 फाइनेंस बिल शामिल हैं.

संसद के इस सत्र में पेश किए जाने वाले 16 विधेयक कौन-कौन से हैं?

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  1. व्यापार चिह्न (संशोधन) विधेयक, 2022

  2. वस्तुओं का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2022

  3. बहु-राज्य सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक, 2022

  4. छावनी विधेयक, 2022

  5. पुराना अनुदान (विनियमन) विधेयक, 2022

  6. संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022

  7. संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2022

  8. संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022

  9. संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022

  10. निरसन और संशोधन विधेयक, 2022

  11. राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक, 2022

  12. नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन बिल, 2022

  13. वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2022

  14. तटीय जलीय कृषि प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2022

  15. उत्तर पूर्व जल प्रबंधन प्राधिकरण विधेयक, 2022

  16. कलाक्षेत्र फाउंडेशन (संशोधन) विधेयक, 2022

कुछ ऐस बिल भी हैं जो पहले ही पेश किए जा चुके हैं, लेकिन इस सत्र में उन्हें चर्चा के लिए रखा जाएगा, ताकि उन्हें पास किया जा सके. ऐसे 7 बिल हैं, जो इस प्रकार हैं....
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  1. समुद्री डकैती रोधी विधेयक, 2019

  2. मध्यस्थता विधेयक, 2021

  3. नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (संशोधन) विधेयक, 2022

  4. संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) विधेयक,2022

  5. जैविक विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021

  6. वन्य जीवन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021

  7. ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022

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इन 16 बिलों में क्या है?

बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 (The Multi-State Cooperative Societies (Amendment) Bill) : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 के मसौदे को मंजूरी दे दी है. इसमें बहुराज्य सहकारिता समिति अधिनियम, 2002 में संशोधन का प्रावधान किया गया है. सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस फैसले से बहुराज्य सहकारी समितियों के संचालन में सुधार होगा. इसके साथ ही पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी. निष्पक्ष और समय पर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी.

राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक, 2022 (The National Dental Commission Bill) : सरकार इस सत्र में राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक, 2022 पेश करेगी. इस विधेयक में एक राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग स्थापित करने और दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 को निरस्त करने का प्रस्ताव है. डेंटल काउंसिल की जगह राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग बनाया जायगा.

राष्ट्रीय परिचर्या और प्रसूति विद्या आयोग विधेयक,2022 (The National Nursing and Midwifery Commission Bill) : इस विधेयक में राष्ट्रीय नर्सिंग आयोग (NNMC) को स्थापित करने और भारतीय परिचर्या परिषद अधिनियम 1947 को निरस्त करने का प्रस्ताव है.

छावनी विधेयक, 2022 (The Cantonment Bill, 2022) : यह विधेयक छावनियों को व्यापक लोकतंत्रिकरण, आधुनिकीकरण और दक्षता प्रदान करने के लिए है. इस विधेयक का लक्ष्य छावनियों में जीवन यापन की सरलता को सुगम बनाना भी है.

वन संशोधन (संरक्षण) विधेयक, 2022 (The Forest (Conservation) Amendment Bill, 2022) : इस विधेयक का आशय वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में संशोधन करना है. कहा जा रहा है कि इस विधेयक से गैर-वनक्षेत्रों में वृक्षारोपण को बढ़ावा मिलेगा और वनों को संरक्षण मिलेगा.

तटीय जल कृषि प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक 2022 (The Coastal Aquaculture Authority (Amendment) Bill) : इस बिल का लक्ष्य वर्तमान कानून में संशोधन करना है, जिससे तटीय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों से समझौता किए बिना विभिन्न हितधारकों पर नियामक अनुपालन बोझ को कम किया जा सके. इस बिल में जल कृषि के सभी कार्यक्षेत्रों और गतिविधियों को शामिल किया जाएगा. इस बिल में क्षेत्रीय जरूरतों और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर नियमों में बदलाव का भी प्रस्ताव है. इससे तटीय जल कृषि फार्मों और अन्य गतिविधियों के पंजीकरण में आने वाली कठिनाइयों को कम करने में आसानी होगी.

उत्तर-पूर्व जल प्रबंधन प्राधिकरण विधेयक, 2022 (The North East Water Management Authority Bill,2022) : इस बिल में ब्रह्मपुत्र बोर्ड को समाप्त करके उसकी जगह उत्तर पूर्व जल प्रबंधन प्राधिकरण (NEWMA) गठित करने का प्रस्ताव है. उत्तर पूर्व जल प्रबंधन प्राधिकरण सिक्किम, पश्चिम बंगाल सहित देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र और बराक बेसिन के लिए एकीकृत जल संसाधन और बेसिन प्रबंधन संगठन के रूप में कार्य करेगा.

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व्यापार चिन्ह संशोधन विधेयक, 2022 (The Trade Marks (Amendment) Bill,2022) : इस बिल के जरिए मैड्रिड रजिस्ट्रीकरण प्रणाली में ट्रांसफॉर्मेशन और रिप्लेसमेंट से संबंधित कुछ प्रावधान जोड़े जाएंगे. इस बिल के माध्यम से ट्रेड मार्क आवेदनों की प्रक्रिया को तेजी लाने के लिए कारण बताओ, सुनवाई, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन जैसे विषयों में सुधार किया जाएगा.

माल का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) (संशोधन) विधेयक (The Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Amendment Bill,2022) : इस विधेयक के जरिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भौगोलिक उपदर्शन (Geographical Indications) से जुड़े कानून में संशोधन किया जाना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा हितधारक इसका लाभ उठा सकें.

कला क्षेत्र प्रतिष्ठान (संशोधन) विधेयक, 2022 (The Kalakshetra Foundation (Amendment) Bill,2022) : इस विधेयक का उद्देश्य कला क्षेत्र प्रतिष्ठान अधिनियम, 1993 में संशोधन करना है. इस संशोधन से कला क्षेत्र प्रतिष्ठान को प्रमाण पत्र, डिप्लोमा, पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा, ग्रैजुएट-पोस्ट ग्रैजुएट, डॉक्टरेट और पोस्ट डॉक्टरेट कोर्स के डिग्री देने के लिए सशक्त करने में मदद मिलेगी. विधेयक के प्रस्तावों से नृत्य, पारंपरिक रंगमंच, नाटक, पारंपरिक संगीत, दृश्य कला, शिल्प कला के क्षेत्रों में अनुसंधान करने को बढ़ावा भी मिलेगा.

पुराना अनुदान विधेयक ( विनियमन) 2022 (The Old Grant (Regulation) Bill, 2022) : इस विधेयक में गवर्नर जनरल आदेश द्वारा दी गई जमीन को विनिमित और ट्रांसफर करना शामिल है. इस विधेयक में ऐसी जमीनों के बेहतर प्रबंधन का प्रस्ताव किया गया है. इस बिल का उद्देश्य ऐसी जमीनों पर सरकारी अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए जीवनयापन को सरल बनना है.

निरसन और संशोधन विधेयक, 2022 (The Repealing and Amending Bill) : इस विधेयक का उद्देश्य अनावश्यक और अप्रचलित कानूनों को रद्द करना है.

संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक 2022 (The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Fifth Amendment) Bill, 2022) : इस विधेयक के माध्यम से छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन करना है.

संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक 2022 (The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Fourth Amendment) Bill,2022) : इस विधेयक का आशय कर्नाटक की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन करना है.

संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक 2022 (The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Second Amendment) Bill,2022) : इस विधेयक का उद्देश्य तमिलनाडु की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन करना है.

संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक 2022 (The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Third Amendment) Bill,2022) : इस विधेयक का मकसद हिमाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन करना है.

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क्या है विपक्ष की रणनीति, किन मुद्दों के जरिए सरकार को घेरेगा?

शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने भारत- चीन सीमा के हालात, लगातार बढ़ रही महंगाई, कश्मीरी पंडितों के ऊपर हो रहे हमलों, संघीय ढांचे, आरक्षण, EWS कोटे और संवैधानिक संस्थानों के दुरुपयोग सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से सदन में चर्चा कराने की मांग की थी. विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों पर भी चर्चा का पर्याप्त समय देने की मांग की थी.

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  • मूल्य वृद्धि पर फोकस

  • बेरोजगारी

  • चीन सीमा विवाद

  • केंद्र का टकराव

  • न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली पर उच्चतम न्यायालय

  • कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी की मांग

  • 2020-21 किसानों के विरोध की प्रमुख मांग जिसने सरकार को मजबूर किया था कि कृषि के निगमीकरण पर तीन कानूनों को वापस ले

  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत कोटा, जिसे हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था

  • देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स पर हाल के साइबर-आतंकवादी हमले पर सरकार से सवाल

बैठक के बाद कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि "सरकार को भारत-चीन सीमा के वास्तविक हालात की जानकारी सदन को देनी चाहिए." चौधरी ने सरकार द्वारा लाए जा रहे विधेयकों और आइटम्स की संख्या पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 17 दिनों के छोटे से सत्र में 24-25 आइटम्स पर चर्चा कैसे हो सकती है? उन्होंने सरकार से बिल पर चर्चा के लिए विपक्ष को पर्याप्त समय देने की भी मांग की थी. अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि विपक्ष बहु-राज्यीय सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक, 2022 और वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजे जाने की मांग करेगा.

चौधरी का कहना था कि देश में आज मुद्दे ही मुद्दे हैं और विपक्ष सदन में चर्चा और सिर्फ चर्चा करना चाहता है. ऐसे में चर्चा के लिये पर्याप्त समय देकर सरकार को सदन में कामकाज का माहौल तैयार करना चाहिए.

सर्वदलीय बैठक में अकाली दल ने पंजाब में बढ़ रहे नशे और किसानों का मुद्दा उठाया था. बीजू जनता दल (BJD) ने महिला आरक्षण और कोलेजियम का मुद्दा उठाया था.

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तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा था कि हम सत्र के दौरान महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी एजेंसियों के कथित दुरूपयोग के साथ केंद्र राज्य संबंध के विषय को भी उठाना चाहते हैं.

कांग्रेस नेता नासीर हुसैन ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कोटा के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की थी. राज्यसभा में कांग्रेस व्हिप सैयद नसीर हुसैन ने कहा है कि "अगर हम प्रक्रियाओं, शून्यकाल, प्रश्नकाल और इसी तरह के लिए आवश्यक समय को हटा दें, तो प्रभावी रूप से 25 विधेयकों पर बहस के लिए केवल 56 घंटे उपलब्ध हैं. यह एक बड़ी समस्या है."

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पुरानी पेंशन योजना पर चर्चा कराने और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिये कानून बनाने की मांग की थी. इसके साथ ही कांग्रेस और कई अन्य दलों द्वारा क्रिसमस के दौरान सत्र की समय-सारणी पर भी सवाल उठाया गया.

रिपोर्ट्स के अनुसार सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सहित 31 दलों ने CBI और ED जैसी जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर चर्चा की मांग की थी.

वहीं सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी द्वारा कहा गया है कि सरकार ने विभिन्न दलों के सदन के नेताओं के साथ सत्र में उठाए जाने वाले विषयों के बारे में विस्तृत चर्चा की है और उन्हें शुरू में ही बता दिया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की अनुमति से नियमों के तहत उनके उठाए मुद्दों पर चर्चा कराने को सत्ता पक्ष तैयार है.

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सरकार क्या चाहती है? सामने कौन सी चुनौतियां हैं?

इस सत्र में सरकार की कोशिश 16 नये विधेयकों और अनुदान की अनुपूरक मांगों को पारित कराने की रहेगी. सरकार चाहती है कि सत्र के दौरान ज्यादा से ज्यादा विधायी कार्य निपटाए जाएं.

संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से कहा गया है कि ‘‘हम सत्र में सुचारू रूप से कामकाज सुनिश्चित करना चाहते हैं. हम कम से कम 10 विधेयक पारित कराना चाहते हैं. इस बारे में चर्चा होगी और यह सब निर्भर करेगा कि परिस्थितियां कैसी रहती हैं."

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा भी है कि सरकार सत्र के सुचारू संचालन को लेकर विपक्ष का सहयोग चाहती है और आशा है कि विपक्षी दल भी इस सत्र के संचालन में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे. 

संसद सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए क्या बोले पीएम मोदी?

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद में हंगामे और व्यवधान के चलते देश का बहुत नुकसान होता है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से शीतकालीन सत्र को अधिक से अधिक सार्थक बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया.

शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने पर भी चिंता जताई.

वहीं, 'विवादास्पद' विधेयकों या प्रस्तावों के पारित होने का विरोध करने से लेकर राज्यसभा में गतिरोध लाने तक, कांग्रेस और तृणमूल सहित विपक्ष अब पहले से कहीं अधिक बल के साथ राज्यसभा के सभापति के कक्ष में प्रवेश कर सकता है. उस संभावित स्थिति से निपटना धनखड़ के लिए 'बड़ी चुनौती' है.

उधर, सरकार ने इस सत्र के लिए जो विधेयक एजेंडे में रखे हैं, उनमें से बायोडायवर्सिटी संशोधन बिल, 2021, अंतरराज्यीय सहकारी समिति संशोधन बिल और वन संरक्षण संशोधन बिल का कांग्रेस ने विरोध करने का फैसला किया है. पार्टी की मांग है कि इन बिलों को स्थाई समिति को भेजा जाए.

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