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राहुल गांधी को केजरीवाल, अखिलेश का समर्थन, क्या एक छत के नीचे आएगा विपक्ष?

क्या अब समर्थन से आगे बढ़कर गठबंधन की बात करेगा विपक्ष?

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राहुल गांधी को 'मोदी सरनेम' वाले बयान पर 2 साल की सजा सुनाए जाने पर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है. विपक्षी पार्टी के नेताओं ने भी कांग्रेस के सुर में सुर मिलाया है. अखिलेश यादव हों, या तेजस्वी यादव सभी ने राहुल गांधी के समर्थन में अपने बयान दिए हैं. लेकिन, इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल का बयान माना जा रहा है. ऐसे में इन बयानों के मायने समझने की कोशिश करते हैं.

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राहुल गांधी के समर्थन में केजरीवाल के बयान को कांग्रेस से हाथ मिलाने के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन, सवाल ये है कि आखिर कुछ दिन पहले G-8 गुट की बात करने वाले केजरीवाल (जिनके जी-8 गुट में कोई भी कांग्रेसी मुख्यमंत्री शामिल नहीं था) राहुल गांधी के हमदर्द कैसे बन गए? क्या राहुल गांधी की आड़ में भ्रष्टाचार में बंद सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को पाक साफ करने की एक कोशिश है? सवाल ये भी है कि क्या साल 2024 का चुनाव AAP कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ेगी? इन सवालों के जवाब जानने से पहले ये जान लेते हैं कि आखिर अरविंद केजरीवाल ने राहुल गांधी के समर्थन में कहा क्या है?

गैर बीजेपी नेताओं और पार्टियों को खत्म करने की साजिश हो रही है. कांग्रेस से मतभेद है, लेकिन राहुल गांधी को इस तरह से मानहानि के मुकदमे में फंसाना ठीक नहीं है. हम अदालत का सम्मान करते हैं, लेकिन इस फैसले से असहमत हैं.
अरविंद केजरीवाल, AAP संयोजक

अस्तित्व की लड़ाई, खत्म हो रहे वैचारिक मदभेद?

BHU के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा का कहना है कि...

मौजूदा वक्त में पूरा विपक्ष अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. और जब अस्तित्व की लड़ाई लड़ी जाती है तो वैचारिक मदभेद खत्म हो जाते हैं. राहुल गांधी के मुद्दे पर हर आदमी को समझ आ गया है कि अगर बयानों को लेकर सजा होने लगी तब तो पूरा विपक्ष न्यायालय के कठघरे में है. अगर राहुल गांधी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे तो कांग्रेस कहां से चुनाव लड़ेगी, किसके बल पर चुनाव लड़ेगी. यही हाल AAP का भी है. ऐसे में जाहिर है कि विपक्ष के नेताओं का राहुल गांधी का समर्थन करना मजबूरी है.
प्रोफेसर कौशल किशोर, BHU
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साल 2024 में कांग्रेस से गठबंधन में आएंगे केजरीवाल?

राहुल गांधी पर कोर्ट के फैसले के बाद जिस प्रकार से राहुल गांधी के समर्थन में विपक्षी नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं, उससे विपक्षी एकता में एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. 2024 में लोकसभा के चुनाव होने हैं. विपक्ष कोशिश में है कि कैसे केंद्र की मोदी सरकार को पटखनी दी जाए? लेकिन, अभी तक विपक्ष बंटा हुआ था. केजरीवाल जी-8 बनाकर आगे बढ़ रहे थे, तो अखिलेश यादव थर्ड फ्रंट की बात कर रहे थे, इन दोनों में ही कांग्रेस शामिल नहीं थी. अखिलेश यादव ने तो यहां तक कह दिया था कि साल 2024 में कांग्रेस अपना रोल तय कर ले. लेकिन, अब अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी को समर्थन दिया है. ऐसे में अब सवाल है कि क्या अब सभी विपक्षी पार्टियां एक छत के नीचें आएंगी और अभी तक कांग्रेस के खिलाफ बैटिंग कर रही AAP साल 2024 में कांग्रेस के साथ गठबंधन में रहेगी?

इस सवाल के जवाब में प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा कहते हैं कि...

ये जरूर है कि अभी तक कई खेमों में बंटा विपक्ष एक होने के सवाल पर मंथन करेगा. लेकिन, जहां तक गठबंधन की बात रही तो वह संभव होना नहीं दिख रहा है. अगर AAP कांग्रेस के साथ गठबंधन करती है तो खुद उसके अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो जाएगा, क्योंकि जो उसका वोट बैंक है वो कांग्रेस का ही दो तिहाई वोट बैंक है.
प्रोफेसर कौशल किशोर, BHU

राहुल से हमदर्दी या अपने नेताओं के पाक साफ करने की कोशिश?

राहुल गांधी को लेकर अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह से समर्थन दिखाया है, उससे तो यही लगता है कि विपक्ष को समझ आ गया है कि अगर एक नहीं हुए तो 2024 में हार के बाद अस्तित्व की लड़ाई भी लड़ने लायक नहीं रहेंगे. लेकिन, सवाल ये भी है कि केजरीवाल के मसले पर कांग्रेस ने कभी नरम रुख नहीं दिखाया है. AAP के दो दो मंत्री जेल में हैं, लेकिन कांग्रेस ने हमदर्दी तो छोड़ो उसने हमला ही किया. ऐसे में जानकारों का मानना है कि कहीं राहुल गांधी की आड़ में AAP की हमदर्दी अपने दो दो नेताओं को जनता के बीच पाक साफ करने की तो नहीं है.

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