मीना कुमारी:जानिए ‘ट्रेजेडी क्वीन’ को करीब से, उनकी शायरी के जरिए 

जानिए कैसे ‘ट्रेजेडी क्वीन’ मीना कुमारी की एक रियल लाइफ ट्रेजेडी ने उनकी शायरी को प्रभावित किया.

Updated01 Aug 2020, 04:22 PM IST
पॉडकास्ट
2 min read

गेस्ट: रश्मी अग्रवाल, भारतीय सूफी कलाकार

होस्ट, राइटर और साउंड डिज़ाइनर: फ़बेहा सय्यद

एडिटर: शैली वालिया

म्यूजिक: बिग बैंग फज

हिंदी सिनेमा की 'ट्रेजेडी क्वीन' कही जाने वाली अभिनेत्री मीना कुमारी की कला इस मयार की थी कि कहा जाता है खुद 'ट्रेजेडी किंग' दिलीप कुमार तक उनके सामने परफॉर्म करते हुए नर्वस हो जाया करते थे. मीना 1 अगस्त 1933 में बॉम्बे में पैदा हुई. उनके पिता पारसी थिएटर के वेटेरन, अली बक्श और मां, स्टेज आर्टिस्ट इकबाल बेगम, के घर के हालात माली तौर पर ज्यादा अच्छे नहीं थे. और इस बात को एक वजह माना जाता है जो मीना ने सिर्फ 4 साल ही की उम्र से काम करना शुरू कर दिया.

मीना कुमारी ने करियर की शुरुआत में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट 'बेबी मीना' के नाम से फिल्में की. और आगे जाकर इस बुलंदी पर पहुंची कि इंडस्ट्री में जो भी नया एक्टर आता वो मीना के साथ काम करना चाहता, क्योंकि ऐसा करने से फिल्म का हिट होना तय था. इंडियन सिनेमा के ओरिजिनल 'ग्रीक गॉड' धर्मेंद्र के बारे में भी यही माना जाता है कि उनके करियर को बढ़ावा देने में मीना कुमारी का अहम किरदार था. लेकिन इस पावरफुल स्टार का स्टारडम की चकाचौंध से परे एक ऐसा चेहरा है जिससे अगर आप वाकिफ नहीं हैं, तो ये पॉडकास्ट आपको सुनना चाहिए.

आज इस पॉडकास्ट के जरिए हम जानेंगे 'ट्रेजेडी क्वीन' मीना कुमारी की जिंदगी की एक रियल लाइफ ट्रेजेडी जिसने उनकी शायरी को काफी हद तक प्रभावित किया है. साथ ही पॉडकास्ट में सुनिए सूफी आर्टिस्ट, रश्मि अग्रवाल को मीना कुमारी की गजल 'चाँद तन्हा' गाते हुए. रश्मि अग्रवाल को 2013 में हुए 9वे अंतर्राष्ट्रीय विश्व संगीत समारोह में 'ग्रौं प्री' पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था.

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Published: 01 Aug 2020, 12:11 PM IST
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