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आपदा में IPL: क्रिकेट के सितारे क्यों चुप?

IPL के बॉसेस, खिलाड़ी, सेलिब्रिटी कमेंटेटर्स आप इस संकट की घड़ी में थोड़ी सी सहानुभूति दिखाइये, थोड़ा दिल दिखाइये!

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वीडियो प्रोड्यूसर: मौसमी सिंह, शोहिनी बोस

वीडियो एडिटर: मोहम्मद इरशाद आलम, अभिषेक शर्मा

कैमरा: इरा खन्ना

ये जो इंडिया है ना…यहां क्रिकेट के हम सभी दीवाने हैं. और आईपीएल के और भी ज्यादा. लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के बीच क्या आईपीएल होना चाहिए? रोजाना हजारों कोविड मरीजों के अंतिम संस्कार का दुखद तमाशा.

वहीं, एक क्रिकेट स्टेडियम के अंदर- आईपीएल खेलना विकेट गिरने पर वो हाई-फाइव, ये पूरा माहौल असंवैधानिक है. आईपीएल के स्टेडियम से कुछ ही दूर, सैकड़ों लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. 28 अप्रैल से दिल्ली भी एक आईपीएल वेन्यू बन गया. फिरोजशाह कोटला मैदान दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल के ठीक बगल में है. जब एंबुलेंस स्टेडियम के पास से ही, जिंदगी और मौत के बीच जूझते मरीजों को लेकर जाएगी, और वहां पर क्रिकेट का मैच चल रहा होगा तो क्या ये अपमानजनक नहीं होगा?

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इंडिया के जाने-माने शूटर और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट, अभिनव बिंद्रा ने कहा-

इंडियन क्रिकेटर्स और बीसीसीआई सिर्फ बोल(Bowl) में नहीं रह सकते, जो कुछ बाहर हो रहा है उसके बारे में अंधे और बहरे नहीं हो सकते.

हो सकता है कि बिंद्रा सही है. विराट कोहली के पास ट्विटर पर 4 करोड़ और इंस्टाग्राम पर 11 करोड़ फॉलोअर्स हैं. धोनी के पास 1 करोड़ ट्विटर और 3 करोड़ इंस्टाग्राम फॉलोअर्स हैं. रोहित शर्मा, इंस्टॉलेशन और ट्विटर दोनों पर उनके 2 करोड़ फॉलोअर्स हैं. इसके बावजूद, कोरोना संकट पर उनकी चुप्पी चुभती है. हम दादा सौरव गांगुली, जो कि बीसीसीआई के चीफ भी हैं, उन्हें फैंटेसी क्रिकेट के विज्ञापन में देखते हैं. धोनी, कोहली, रोहित, हार्दिक पांड्या, ऋषभ पंत.. इन्हें भी विज्ञापन में देखते हैं.

पुराने स्टार्स सहवाग, गावस्कर, द्रविड़ को भी हम ब्रेक के दौरान देखते हैं. लेकिन हर एक आईपीएल मैच के 4-5 घंटों के टेलीकास्ट में एक 60 सेकेंड का कोविड से जुड़ा सोशल मैसेज आता है. अभिनव बिंद्रा सौरव गांगुली से ये भी पूछते हैं कि बीसीसीआई, जिसके पास14,500 करोड़ की संपत्ति है, उसने अबतक कोविड की दूसरी लहर के खिलाफ लड़ाई में कुछ योगदान क्यों नहीं किया?
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आईपीएल के इस बेपरवाही पर टिप्पणी करते हुए, वरिष्ठ खेल पत्रकार शारदा उग्रा कहती हैं कि ऐसा लगता है कि आइपीएस पृथ्वी पर नहीं, कहीं और खेला जा रहा है. वो पूछती हैं-

प्लेयर्स के बाजुओं पर कोई काली पट्टी क्यों नहीं दिखती, खेल शुरू होने से पहले एक मिनट का मौन क्यों नहीं होता.. मैच के दौरान टीवी स्क्रीन पर अलग-अलग शहरों के लिए कोविड हेल्पलाइन नंबर्स क्यों नहीं दिखाए जाते? हेल्थ वर्कर्स, मेडिकल सप्लाई के लिए फंड रेज क्यों नहीं किए जाते?

दादा से एक और सवाल- टीम इंडिया के बीसीसीआई के ट्विटर हैंडल के 1.5 करोड़ फॉलोअर्स हैं. IPL के ट्विटर हैंडल के 62 लाख फॉलोअर्स हैं. IPL टेलीकास्ट को करोड़ों लोग टीवी पर देखते हैं.. लेकिन हाल में ये 60 सेकंड तक का सोशल मैसेज छोड़कर, कोविड के बारे में ऐसी गहरी चुप्पी क्यों? कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि उन सभी पर चुप रहने का दबाव है.

ये चुप्पी सरकार के रवैये से मिलती-जुलती है, जो हर मौके पर इस संकट की गंभीरता से इनकार करती आई है. ये योगी आदित्यनाथ के उस रुख को भी दिखाती है जो ऑक्सीजन या आईसीयू बेड या वैक्सीन की कमी की बात करने पर जेल भेजने और संपत्ति जब्त कराने की धमकी देते हैं और यहां ये भी मत भूलिए कि ज्यादातर राज्य क्रिकेट एसोसिएशन, नेताओं के ही कंट्रोल में हैं. यहां तक कि मौजूदा बीसीसीआई सेक्रेटरी- जय शाह, गृह मंत्री अमित शाह के ही बेटे हैं.

लेकिन फिर भी, चलिए IPL की ही बात करते हैं- 27 अप्रैल को दिल्ली और बैंगलोर के बीच करीबी मुकाबला था. ऋषभ पंत दिल्ली को जीत के करीब ले गए, लेकिन आखिरी बॉल में 1 रन से हार गए. मैच के बाद, चहल, कोहली, मोहम्मद सिराज, जिनके यॉर्कर्स ने पंत को आखिरी ओवर में परेशान किया था- ये सारे RCB के खिलाड़ी, ऋषभ को घेरे उसे चीयर अप कर रहे थे. देखा जाए तो, यही खेल भावना, यही स्पोर्टिंग स्पिरिट, IPL का जज्बा है. इस IPL में संजु सैमसन और देवदत्त पड्डिकल ने शानदार शतक लगाए हैं. वरिष्ठ खिलाड़ी गेल, शिखर धवन, रैना, डीविलयर्स ने दिखाया कि वो आज भी दमखम रखते हैं.

हर्षल पटेल की बढ़िया बोलिंग, रविंद्र जडेजा के शानदार 5 लगातार छक्के! तो प्वाइंट ये है कि सभी खेल की तरह IPL भी हमें प्रेरित कर सकता है, हमारा हौसला बढ़ा सकता है. यहां तक कि अभिनव बिंद्रा जैसे आलोचक भी स्वीकार कर सकते हैं कि "अभी इतनी ज्यादा नेगेटिविटी है, कि हमें भी आगे बढ़ने के लिए किसी चीज की जरूरत है."

तो ऐसे में IPL का हम सब पर पॉजिटिव असर, एक तरह से बहुत जरूरी है.

मेरी समझ के मुताबिक अगर आईपीएल कोविड के सुरक्षा प्रोटोकॉल्स का पालन नहीं करता तो बंद कर दीजिए. अगर वो उन संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है जो कोविड की लड़ाई में जरूरी हैं तो बंद कर दीजिए. अगर कोई खिलाड़ी घर लौटना चाहते है तो जरूर. लेकिन इसके अलावा हमें ये भी ध्यान रखना चाहिए कि आईपीएल से काफी इकनॉमिक एक्टिविटी जुड़ी हुई है. सेलिब्रिटी प्लेयर्स और कमेंटेटर्स के अलावा सैंकड़ों लोगों की रोजी-रोटी भी आईपीएल से जुड़ी हुई है.

आईपीएल पर बैन लगाने की बजाय ये जो इंडिया है न, उन आईपीएल के बॉसेस और सेलिब्रिटी खिलाड़ी और सेलिब्रिटी कमेंटेटर्स से कहना चाहता है कि वो बस इस संकट की घड़ी में थोड़ी से सहानुभूति दिखाएं, थोड़ा दिल दिखाएं!

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