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नवरात्रि:मां कात्यायनी की पूजा, आरती का पढ़ाई में वर्ल्ड रिकॉर्ड

नौ दिनों की इस विशेष श्रृंखला में, हम आपको नव दुर्गा के साथ-साथ देश की ‘नारी शक्ति’ की भी कहानियां बताएंगे.

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धर्म और अध्यात्म
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(फोटो: फेसबुक, विकी कॉमन्स)
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दुर्गा पूजा (Durga Puja) के त्योहार में हर दिन मां के विभिन्न रूपों की पूजा-उपासना हो रही है. आज शरदीय नवरात्र (Navratri 2020) का छठवां दिन कात्यायनी मां के नाम है. दुर्गोत्सव शक्ति पूजा का प्रतीक है, इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों में हम आपको नव दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों के साथ-साथ देश की नारी शक्ति की भी कहानियां बताएंगे.

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं, कात्यायनी माता नौ रूपों में छठवां रूप हैं. आज साधक और उपासक मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना और उपासना करते हैं. मान्यताओं के मुताबिक, कात्यायनी माता की उपासना करने से साधक को जागृति सिद्धियां मिल जाती हैं. वह अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है. कात्यायनी मां की उपासना से सभी रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं.

यह भी कहा जाता है कि यदि सच्चे मन से कात्यायनी माता की पूजा की जाए तो विवाह में आने वाली बाधा खत्म हो जाती है. इसके साथ ही यदि कोई शादीशुदा है तो उसके वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.

त्रिदेवों के अंश उत्पन्न हुईं, कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण कहलाती हैं कात्यायनी

पौराणिक कथा के मुताबिक, एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ऋषि थे. उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से कात्य गोत्र की उत्पत्ति हुई और कात्यायन ऋषि उत्पन्न हुए. उन्होंने भगवती की उपासना करते हुए कठिन तपस्या की. उनकी इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें. माता उनके तप से प्रसन्न होकर उनकी यह प्रार्थना स्वीकार की. कुछ समय के बाद जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार ज्यादा बढ़ गया, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज और प्रताप का अंश देकर इन देवी को उत्पन्न किया. महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की इसी कारण से देवी कात्यायनी कहलाईं. इनके जन्म के बाद शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी, तीन दिनों तक कात्यायन ऋषि ने इनकी पूजा की, पूजा ग्रहण कर दशमी को देवी ने महिषासुर का वध किया था.

(फोटो: विकी कॉमन्स)

पुराणों के अनुसार, कहा जाता है कि आज के दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होता है. योग साधना में आज्ञा चक्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है. इस चक्र में स्थित साधक कात्यायनी के चरणों में अपना सब कुछ अर्पित कर देता है. पूर्ण आत्मदान करने से साधक को सहजरूप से माता के दर्शन हो जाते हैं. कात्यायनी माता की उपासना से मनुष्य को अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष आदि की प्राप्ति हो जाती है.

मां कात्यायनी का स्वरूप:

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवर वाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानव घातिनी॥

कात्यायनी माता का शरीर स्वर्ण के समाना चमकीला, दिव्य और भव्य है. चार भुजाधारी कात्यायनी माता अपने वाहन सिंह पर सवार होती हैं. उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में उनका प्रिय पुष्प कमल है. अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में हैं. कात्यायनी देवी को लाल रंग का फूल खासकर लाल गुलाब अति प्रिय है. इसलिए पूजा के दौरान मां को लाल गुलाब का पुष्प अर्पित करें. पुराणों में षष्ठी तिथि के दिन देवी मां के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है. इस दिन प्रसाद में मधु यानी शहद का प्रयोग करना चाहिए. मधु के भोग से माता प्रसन्न होती हैं. इसके प्रभाव से उपासक सुंदर रूप प्राप्त करता है.

या देवी सर्वभूतेषुमां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
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चर्चा उस नारी शक्ति की जिन्होंने ऑनलाइन कोर्स में बनाया विश्व रिकॉर्ड

(फोटो: फेसबुक)

केरल के कोच्चि में एलमकारा की रहने वाली आरती रघुनाथ पढ़-लिखकर मिसाल कायम कर रही हैं. कोरोना काल में जहां एक ओर पूरे देश की रफ्तार थम गई, वहीं आरती ने घर बैठे एक रिकॉर्ड कायम कर दिया. आरती रघुनाथ ने घर बैठे दुनिया की कई यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर, बायोलॉजी और इकोनॉमिक्स जैसे विषयों में कई अलग-अलग कोर्स किए हैं.

आरती ने जिन विश्वविद्यालयों के कोर्स किए हैं, उनमें जॉन हॉकिंस यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर, एमोरी यूनिवर्सिटी, कोरसेरा प्रोजेक्ट नेटवर्क और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क जैसे नाम शामिल हैं.

आरती ने 88 दिनों में 350 ऑनलाइन कोर्स पूरा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है. इसके लिए आरती को यूनिवर्सल रिकॉर्ड फोरम की तरफ से सर्टिफिकेट भी दिया गया है.

टीचर्स को रोल मॉडल मानती हैं आरती, खुद भी बनना चाहती हैं टीचर

आरती रघुनाथ एमईएस कॉलेज में एमएससी बायो-केमिस्ट्री की सेकंड ईयर की स्टूडेंट हैं. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आरती ने कहा था कि कॉलेज फैकल्टी ने मुझे ऑनलाइन कोर्स से परिचित कराया, ऑनलाइन कोर्स की विशाल रेंज के बारे में बताया. कॉलेज के प्रिंसिपल पी मोहम्मद, हनीफा के.जी. और क्लास ट्यूटर नीलिमा टी. के. की मदद से मैंने कोर्स पूरा किया. आरती बताती हैं, "मैंने ऑनलाइन कोर्स की शुरुआत लॉकडाउन में रहते हुए जून के आखिरी हफ्ते से की थी. तब तक लॉकडाउन का काफी हिस्सा बीत चुका था. मुझे लगा कि ये जो वक्त बीत चुका है, उसे फिर से तो नहीं पाया जा सकता, लेकिन जो समय अभी बाकी है, उसका सही उपयोग करके ऑनलाइन कोर्स किए जा सकते हैं. ऑनलाइन कोर्सेस की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है. आप घर बैठे इन्हें कर सकते हैं. ये मेरी खुशनसीबी है कि 350 ऑनलाइन कोर्स करके मैंने वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया."

एक दिन में आरती ने कम से कम 10 कोर्स किए, इसके अलावा जिस दिन उनके कोर्स जल्दी पूरे हो जाते, उस वो घर में रहकर कुकिंग या पेंटिंग भी करती थीं.

आरती की दादी और माता-पिता ही उनका सपोर्ट सिस्टम हैं, उन्होंने आरती को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. आरती अपने टीचर्स को अपना रोल मॉडल मानती हैं और उन्हीं की तरह एक आइडियल टीचर बनना चाहती हैं. आरती की इच्छा है कि उनके स्टूडेंट्स भी उन्हीं की तरह टीचर के सपोर्ट से वर्ल्ड रिकॉर्ड बना सकें. आरती का बचपन का सपना है कि एक दिन वो पढ़-लिखकर टीचर बनें. अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए आरती जी कड़ी मेहनत कर रही हैं.

'नौ दिन, नौ नारी शक्ति की कहानी' की पहली पांच कहानियां आप नीचे क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

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