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अमेरिका पर रूस का फिर खतरनाक वार, साइबर 'वर्ल्ड वॉर' के लिए भारत कितना तैयार?

Joe Biden की Putin को खुली चेतावनी के चंद हफ्तों के अंदर ही रूस के हैकरों ने 1000 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया

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अमेरिका पर रूस का फिर खतरनाक वार, साइबर 'वर्ल्ड वॉर' के लिए भारत कितना तैयार?
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अरबों के बिजनेस का नुकसान. लाखों की जिंदगी खतरे में. अर्थव्यवस्था को अपाहिज बना देने की साजिश. दो देशों के बीच युद्ध के यही सब तो परिणाम होते हैं. ऐसा ही नुकसान रूस अमेरिका को पहुंचा रहा है, अमेरिका (America) रूस (Russia) को पहुंचा रहा है, चीन भारत को पहुंचाने की साजिश रच रहा है. ताजा केस में रूस के हैकरों ने अमेरिका की 1000 कंपनियों पर हमला (Cyber attack) बोला है. ये तब हुआ है जब हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन (Vladimir Putin) को साफ कहा था कि ऐसे हमले किसी सूरत में बदार्श्त नहीं किए जाएंगे? क्या यही साइबर वर्ल्ड वॉर या उससे पहले की स्थिति नहीं है? सवाल है कि भारत इस आपात स्थिति के लिए कितना तैयार है?

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पब्लिक अफेयर फोरम ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इवेंट में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत ने कहा कि भारत सरकार इसी साल साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security) से जुड़ी नई रणनीति जारी करेगी.यह खबर तब आई है जब अमेरिका सहित कई विकसित देशों में हाल ही में साइबर क्राइम में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है.

साइबर क्राइम को रोकने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई 16 जून की बैठक में चर्चा के कुछ ही सप्ताह के भीतर फिर से रूस से जुड़े साइबर क्राइम ग्रुप ने अमेरिका के ग्लोबल सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन पर हमला किया है.

हाई टेक्नोलॉजी युग में जब देश की सामरिक एवं आर्थिक निर्भरता साइबर वर्ल्ड पर अत्यधिक बढ़ गई हो और यह क्षेत्र प्रतिद्वंदी देश सहित आतंकी संगठनों के लिए प्रॉक्सी वार का आसान जरिया बन गया हो, तब क्या भारत इससे मुकाबला करने के लिए तैयार है?

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अमेरिका पर एक और साइबर हमला

हंट्रेस लैब्स ने शुक्रवार को बताया कि मियामी स्थित IT फर्म 'Kaseya' में एक घटना के बाद साइबर अटैक से अमेरिका के 1000 से ज्यादा बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. यह साइबर अटैक संभावित रूप से अमेरिकी कंपनियों को अस्थिर करने के लिए नवीनतम हैक है.

30 मई को अमेरिका की मीट पैकिंग कंपनी JBS पर साइबर अटैक करने वाले REvil ग्रुप पर ही इस हमले का संदेह व्यक्त किया जा रहा है. इससे कम से कम 17 देशों के बिजनेस आउटलेट प्रभावित हुए हैं. स्वीडन में Coop's नामक ग्रॉसरी चेन की 800 दुकानें शनिवार को नहीं खुल सकी,क्योंकि इस साइबर अटैक से उनके कैश रजिस्टर में खराबी आ गई.
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अमेरिका पर हाल में हुए बड़े साइबर अटैक 

  • दुनिया की सबसे बड़ी मीट प्रोसेसिंग कंपनी JBS के कंप्यूटर नेटवर्क को 30 मई 2021 को हैक कर लिया गया जिससे कंपनी के ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका के कुछ ऑपरेशन अस्थाई रूप से बंद हो गए. कंपनी को फिरौती के तौर पर 11 मिलियन डॉलर के बराबर का बिटकॉइन भुगतान करना पड़ा तब जाकर कंपनी का प्लांट वापस ऑनलाइन आया.

  • कोलोनियल पाइपलाइन कंपनी पर साइबर अटैक करते हुए 'डार्कसाइड' नामक साइबर क्राइम ग्रुप में 100 जीबी डेटा चुरा लिया और कुछ कंप्यूटर और सर्वर पर डेटा को लॉक कर दिया.हमले के बाद फिरौती के रूप में कंपनी को 4.4 मिलियन डॉलर देना पड़ा.

  • एक प्रमुख अमेरिकी IT फर्म SolarWinds पर हुए साइबर अटैक का पता महीनों तक नहीं चला. इसका प्रयोग हैकरों ने अमेरिकी सरकार के बड़े विभाग, जैसे होमलैंड सिक्योरिटी और ट्रेजरी विभाग पर जासूसी के लिए किया.

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पुतिन-बाइडेन मीटिंग में साइबर क्राइम पर वार्ता

JBS अटैक और कोलोनियल पाइपलाइन अटैक के बाद जिनेवा,स्विट्जरलैंड में 16 जून को हुई पुतिन-बाइडेन मीटिंग में साइबर क्राइम सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहा. बाइडेन ने साइबर फिरौती को लेकर पुतिन को घेरने की खुली चुनौती पहले ही दे दी थी. हालांकि बैठक में साइबर सिक्योरिटी पर कोई बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों नेता इस मुद्दे पर परामर्श के लिए सहमत हुए.दोनों देशों के एक्सपर्ट बैठक कर यह चर्चा करेंगे कि दोनों देश को किस तरह के साइबर अटैक किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं हैं.

इसके अलावा राष्ट्रपति बाइडेन ने पुतिन को 16 सेक्टरों -जैसे ऊर्जा, पानी, खाद्य, खेती, हेल्थ सेक्टर आदि- की लिस्ट पकड़ाई ,जिस पर साइबर अटैक को अमेरिका किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा.
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2021 में विश्व में हुऐ अन्य बड़े साइबर अटैक

BRENNTAG

मई 2021 की शुरुआत में ही कोलोनियल पाइपलाइन पर साइबर अटैक करने वाले ग्रुप 'डार्कसाइड' ने एक केमिकल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी BRENNTAG को निशाना बनाया और 150 जीबी डेटा चोरी कर लिया. कंपनी से डार्कसाइड में बिटकॉइन में 7.5 मिलियन डॉलर फिरौती की मांग की. बाद में कंपनी ने 4.4 मिलियन डॉलर की फिरौती दी.

ACER

21 मार्च 2021 को ताइवान की लोकप्रिय कंप्यूटर कंपनी ACER पर साइबर अटैक हुआ. इसमें अब तक के साइबर अटैक के इतिहास की सबसे बड़ी फिरौती 50 मिलियन डॉलर की मांग की गई और नहीं देने पर कंपनी की फाइनेंसियल स्प्रेडशी तथाट बैलेंस शीट लीक करने की धमकी दी गई.

National Basketball Association (NBA)

Babuk नामक साइबर क्राइम ग्रुप ने NBA का 500 जीबी संवेदनशील डेटा चुरा लिया और फिरौती की मांग की. फिरौती ना देने की स्थिति में खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट और फाइनेंसियल जानकारियों को लीक करने की धमकी दी.

LinkedIn

LinkedIn हैकरों के लिए साइबर अटैक करने के लिए आकर्षक साइटों में से एक बन गया है. 9 अप्रैल 2021 को LinkedIn को लगभग 500 मिलियन एक्टिव यूजर्स के डेटा लीक का सामना करना पड़ा. हालांकि कंपनी ने तब भी इससे इंकार किया था और फिर जब जुलाई में 700 मिलियन यूजर्स का डाटा लीक होने की खबर छपी तो भी कंपनी ने ऐसी घटना से इंकार किया.

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भारत पर साइबर अटैक

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले 2019 में भारत में साइबर अटैक के 3.94 लाख मामले देखे गए. इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम(CERT-In) के अनुसार 2017 और 2019 के बीच केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों से संबंधित कुल 336 वेबसाइटों को हैक किया गया था.

भारत ने 2017 में यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया(UIDAI) के पास मौजूद नागरिकों के बायोमैट्रिक डेटाबेस में सेंधमारी, 2019 में कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट पर साइबर हमला और अक्टूबर 2020 में कथित तौर पर चीनी हैकर ग्रुप द्वारा साइबर हमले में मुंबई में ब्लैकआउट की घटना देखी है (हालांकि इसे सरकार ने मानने से इनकार कर दिया).

यहां तक कि 2020 में भारत सरकार ने साइबर सिक्योरिटी के मुद्दे पर टिक-टॉक, पब्जी समेत 250 से अधिक चाइनीस ऐप को बैन कर दिया था.

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साइबर क्राइम:भारत है कितना तैयार?

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज(IISS) द्वारा हाल ही में जारी नई रिपोर्ट के अनुसार "भारत ने अपने क्षेत्र की भू-रणनीतिक अस्थिरता और साइबर खतरे के बारे में गहरी जानकारी के बावजूद साइबरस्पेस सुरक्षा के लिए अपनी पॉलिसी और सिद्धांत विकसित करने में केवल मामूली प्रगति की है".

15 देशों के लिए साइबर पावर का आकलन करने वाली इस रिपोर्ट 'साइबर कैपेबिलिटी एंड नेशनल पावर: ए नेट एसेसमेंट' में कहा गया कि भारत के पास साइबर इंटेलिजेंस और आक्रामक साइबर क्षमताएं हैं लेकिन वे क्षेत्रीय रूप से केंद्रित हैं, विशेषकर पाकिस्तान पर.

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रिपोर्ट साइबर इंटेलिजेंस क्षमताओं, साइबर सिक्योरिटी, रणनीति ,सिद्धांत और आक्रामक साइबर हमले के विश्लेषण के आधार पर देशों को तीन स्तरों में बांटती है. इसमें भारत को थर्ड टायर में स्थान दिया गया है. यह दिखाता है कि भारत को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अभी भी काफी मेहनत और प्रगति करनी है.

भारत की इंटेलिजेंस प्राथमिकताएं आंतरिक और बाहरी आतंकवादी खतरों, आंतरिक राजनीतिक हिंसा और कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ चल रहे संघर्ष से गहराई से प्रभावित हैं. 2010 के बाद से भारतीय साइबर टीमें सिर्फ पाकिस्तानी IP ऐड्रेस (कुछ हद तक चीन) पर केंद्रित रही हैं. इसके कारण अन्य देशों या आतंकवादी संगठनों के प्रति भारत की संवेदनशीलता बढ़ जाती है.

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