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RBI की राय फूटेगा बाजार का गुब्बारा, क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक गतिविधियों में कमी से देश की GDP में 7.3% की कमी आई.

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<div class="paragraphs"><p>क्या बबल में शेयर बाजार? एक्सपर्ट-RBI की राय अलग</p></div>
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भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से हाल में जारी वार्षिक रिपोर्ट में शेयर बाजार के ओवर वैल्यूएशन के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं. इसके बावजूद मार्केट की तेजी बताती है कि इन्वेस्टर्स का मिजाज अलग है. ज्यादातर एक्सपर्ट्स भी बाजार में तेजी के बरकरार रहने की उम्मीद करते हैं. इन सब के बीच छोटे खुदरा निवेशकों के मन में बाजार की दिशा को लेकर संशय होना स्वाभाविक है. आइए समझते हैं बाजार की दिशा को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट और RBI?

शेयर बाजार में बुल्स की है अच्छी पकड़

कोविड की दूसरी लहर का शेयर बाजार पर कोई बड़ा असर नहीं देखा गया. अब सुधरती स्थिति में मार्केट फिर से चढ़ने लगा है. NSE निफ्टी ने उछाल से बीते दो दिनों में लगातार नया शिखर स्तर बनाया है. वहीं, BSE सेंसेक्स भी सोमवार को व्यापार के दौरान 52,000 के ऊपर पहुंच गया था. मार्केट पिछले चार सेशन में लगातार हरे निशान में भी बंद हुआ है. RBI के मार्केट में बबल संबंधी रिपोर्ट के आने के बावजूद शुक्रवार और सोमवार को बाजार कुल करीब 1.5% चढ़ा.

निवेशकों द्वारा इस बड़ी खरीदारी के पीछे अच्छे तिमाही नतीजे, मजबूत विदेशी संकेत, इत्यादि काफी फैक्टर है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कोविड के नेशनल लॉकडाउन के बाद की मार्केट में तेजी हैरत में डालने वाली है.
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RBI ने क्या कहा?

वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक गतिविधियों में कमी से देश की GDP में करीब 7.3% की कमी आई. RBI ने अपने 2020-21 के वार्षिक रिपोर्ट में इसका ही जिक्र करते हुए कहा कि GDP में गिरावट के बावजूद एसेट प्राइस इन्फ्लेशन बबल की संभावना को बताता है. एसेट प्राइस इन्फ्लेशन फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स जैसे बॉन्ड, इक्विटी शेयर, इत्यादि की कीमतों में उछाल को कहा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक फॉरेन पोर्टफोलियो निवेश और मनी सप्लाई मार्केट में उछाल की दो अहम वजह रहे. आर्थिक रिकवरी ने भी बाजार की तेजी को मदद दी.

“लांग टर्म ट्रेंड से वास्तविक P/E का हटना बताता है कि यह रेश्यो ओवरवैल्यूड है. डिविडेंड यील्ड संबंधी कारकों से भी मार्केट के ओवरप्राइस होने के संकेत मिलते हैं.”
RBI वार्षिक रिपोर्ट, 2020-21
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एक्सपर्ट्स की क्या है राय?

हालांकि हमेशा की तरह शेयर बाजार की दिशा पर इस बार भी जानकारों के अलग अलग मत है, लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट बबल की संभावना नहीं देखते हैं.

इस साल ट्रेडिंग 2020 की तुलना में ज्यादा सेलेक्टिव रहेगी. कोविड की दूसरी लहर की सारी बुरी खबरों को मार्केट ने पहले ही स्टॉक कीमतों में डिस्काउंट कर लिया है. अगर संभावित तीसरी लहर भी आती है तब भी यह नई स्थिति नहीं होगी.
इंडिया टुडे से CA रूद्रमूर्ति, डायरेक्टर, वाचन (Vachana) इन्वेस्टमेंट्स
जब तक अगले कुछ महीनों तक अर्निंग ठीक रहेगी और विदेशी बाजारों में अच्छा माहौल रहेगा, तब तक मार्केट के नए शिखर बनाने की संभावना है. अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट सेक्टर में मजबूत वापसी देखी जा रही है, इसको वैश्विक बाजारों से भी समर्थन मिला है जो कि मार्केट कैप में दिखना चाहिए.
मनीकंट्रोल से हेमंग जानी, हेड इक्विटी स्ट्रेटेजिस्ट, ब्रोकिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज
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कुछ एक्सपर्ट निफ्टी के कुछ महीनों में 16,000 जबकि सेंसेक्स के 54,500 के स्तर को छूने की भी उम्मीद रखते हैं. जानकारों के मुताबिक तेजी से बाजार में मार्केट कैप को भी मजबूती मिलेगी.

इस साल के अंत तक मार्केट कैप 3.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है जिससे मार्केट में बुल्स के बने रहने का पता चलता है.
मनीकंट्रोल से भूषण महाजन, मैनेजिंग डायरेक्टर, अर्थबोध शेयर एंड इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड

कुछ जानकारों के अनुसार कोविड आगे भी मार्केट की दिशा में भूमिका निभाएगा और इसलिए निवेशकों को बाजार में सावधान रहना चाहिए.

अगर कोविड नए इलाकों को प्रभावित करता रहता है और नए स्ट्रेन का आना जारी रहा तो शार्ट टर्म में समस्या हो सकती है.
ब्लूमबर्ग से दीपक जसानी, हेड- रिटेल रिसर्च, HDFC सिक्योरिटीज

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