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भारत में Gold Exchange बनने से सोने के कारोबार में क्या बदल जाएगा?

बड़े गोल्ड कंज्यूमर और इम्पोर्टर देश होने के होने के कारण भारत में गोल्ड एक्सचेंज के काफी फायदे हैं.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में SEBI को गोल्ड एक्सचेंज रेगुलेटर बनाने की घोषणा कर दी. इस ऐलान के बाद से ही लोगों में इस गोल्ड एक्सचेंज को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. आइए जानते हैं क्या होता है गोल्ड एक्सचेंज, क्या हैं इसके फायदे और कब तक इसके आने की करें उम्मीद?

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दुनियाभर में कई गोल्ड एक्सचेंज है जहां बड़ी मात्रा में सोने का कारोबार किया जाता है. शांघाई, हांगकांग, लंदन, न्यूयॉर्क, इत्यादि में विश्व के सबसे प्रसिद्ध गोल्ड एक्सचेंज हैं.

क्या होते हैं गोल्ड एक्सचेंज?

गोल्ड एक्सचेंज काफी मायने में सामान्य स्टॉक एक्सचेंज की तरह ही एक मार्केट के तौर पर काम करता है. इस बाजार में लोग सोने की खरीद और बिक्री के लिए ऑर्डर डाल सकते हैं. इसके बाद खरीदने वालों को गोल्ड ऑर्डर की डिलीवरी की जाती है. जैसे शेयर बाजार में शेयर की खरीद के बाद उसके डीमैट अकाउंट में आने में 2 दिन (T+2) का समय लगता है, बिलकुल उसी तरह गोल्ड को खरीदार तक पहुंचने में एक या दो दिनों का समय लग सकता है. निवेशक हालांकि फिजिकल डिलीवरी नहीं लेने का भी निर्णय कर सकते है और बाद में मुनाफे पर बेच सकते हैं.

गोल्ड एक्सचेंज को स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज भी कहा जाता है. उम्मीद है भारत के गोल्ड एक्सचेंज में निवेशक फ्यूचर्स और ऑप्शन्स कॉन्ट्रैक्ट में भी ट्रेड कर सकेंगे.

क्या होगा एक्सचेंज का फायदा?

बड़े गोल्ड कंज्यूमर और इम्पोर्टर देश होने के होने के कारण भारत में गोल्ड एक्सचेंज के विशेष तौर पर अहम फायदे हैं. स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज में हर समय गोल्ड की खरीद बिक्री चलती रहती है, जिससे बाजार में उसके सही मूल्य का पता चलना काफी आसान होता है. भारत में अभी तक सोने के भाव अंतराष्ट्रीय बाजारों खासकर लंदन से तय होते हैं.

भारत में गोल्ड एक्सचेंज होने से भारत एक प्राइस सेटर (Price setter) बन जाएगा. भारत के गोल्ड एक्सचेंज में ट्रेड से सोने का जो मूल्य पता चलेगा उसे ‘इंडिया गोल्ड प्राइस’ के तौर पर जाना जा सकता है.
नीति आयोग की भारत में गोल्ड मार्केट में सुधार संबंधी रिपोर्ट रिपोर्ट, फरवरी 2020

इसके अलावा नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बुलियन एक्सचेंज होने से सरकार की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को भी दम मिलेगा. सोने की कीमतों में ज्यादा पारदर्शिता होने के कारण लोगों की रूचि बढ़ सकती है. इसके अलावा यह एक्सचेंज गोल्ड लेंडिंग और ट्रेडिंग के प्लैटफॉर्म के तौर पर भी काम करेगा. नीति आयोग की रिपोर्ट में गोल्ड मार्केट के अहम हिस्से जैसे मैन्युफैक्चरर, छोटे ज्वेलर्स, बुलियन ट्रेडर्स, बैंकों और निवेशकों के साथ एक प्लैटफॉर्म पर को भी इस एक्सचेंज के एक बड़े फायदे के तौर पर बताया गया है.

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निवेशकों और गोल्ड के खरीदारों को गोल्ड एक्सचेंज से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है. इस प्रक्रिया ने केवल गोल्ड की शुद्धता सुनिश्चित की जा सकती है, बल्कि अलग अलग लोकेशन के लिए सही मूल्य का अनुमान भी आसान हो जाएगा. इन सबके अलावा भारत में गोल्ड एक्सचेंज होने से फॉर्मल गोल्ड मार्केट को विस्तार मिलेगा और टैक्स से कमाई में बढ़ोतरी होगी.

वर्तमान में भारत का गोल्ड मार्केट कैसा?

भारत में वर्तमान में ज्यादातर सोने का कारोबार ज्वेलरी बाजार में फिजिकल फॉर्म में होता है. इसके अलावा निवेशक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के रूप में भी सोने की खरीद बिक्री करते हैं. डेरीवेटिव यानी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्टस का भी भारत में अच्छा बाजार है. फ्यूचर मार्केटों में खरीदार और विक्रेता पहले ही नियत मूल्य, खरीद-बिक्री की तिथि और मात्रा को लेकर समझौता कर लेते हैं.

भारत में वर्तमान में गोल्ड मूल्यों और व्यापार के नियंत्रण के लिए कोई बड़ी सेंट्रल रेगुलटरी बॉडी नहीं होने एवं अन्य कारणों से अलग अलग जगहों की कीमतों में कभी कभी बड़ा अंतर और अन्य अनियमितताएं देखने को मिलती हैं.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

जानकारों द्वारा गोल्ड एक्सचेंज की स्थापना की दिशा में बढ़ाए कदम को काफी सराहा जा रहा है. उम्मीद की जा रही है कि इससे भारत के गोल्ड बाजार को दम मिलेगा. इसके साथ ही हमारे आयात बिल में भी थोड़ी कमी देखी जा सकती है.

एक्सचेंज के आने से फिजिकल गोल्ड में व्यापार करना आसान हो जाएगा. ज्वेलर्स एक्सचेंज का हिस्सा बन सकते हैं और गोल्ड का ट्रांसफर भी कर सकते हैं. यह कदम काफी दिनों से अपेक्षित था. इससे रिटेल निवेशकों का भी फायदा है.
अनुज गुप्ता, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, कमोडिटी, एंजेल ब्रोकिंग
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कब तक करें एक्सचेंज की उम्मीद?

भारत में अपने स्पॉट गोल्ड एक्सचेंज की मांग इंडस्ट्री और एक्सपर्ट काफी दिनों से कर रहे थे. 2018-19 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सितारमण ने इसको लेकर घोषणा भी की गई. अब 2021-22 के बजट में SEBI को इसके रेगुलेटर बनाने से यह काम आगे बढ़ा है. जानकर उम्मीद कर रहे हैं कि अगले एक वर्ष के भीतर यह एक्सचेंज आकार ले सकता है.

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