ADVERTISEMENT

बाजार में होने वाली है IPO की बौछार, निवेशकों के काम की बातें चार

कोविड की सुधरती स्थिति में बाजार से पैसा उठाना चाहती हैं कंपनियां

Published
<div class="paragraphs"><p>अनेकों कंपनियां IPO लाने  की प्रक्रिया में, क्या हो रणनीति&nbsp;</p></div>
i

IPO बाजार का पिछले कुछ हफ्तों का सूनापन जल्द ही खत्म होने वाला है. कोविड की स्थिति में सुधार में संकेत के बीच इशू लाने को इच्छुक कंपनियों ने इसके लिए तैयारियां तेज कर दी हैं. माना जा रहा है कि आर्थिक हालात में सुधार से इन कंपनियों को अच्छी लिस्टिंग मिल सकती हैं. आइए नजर डालते हैं आने वाले IPO पर और समझते हैं निवेशकों के मुनाफे के लिए क्या रणनीति अहम हो सकती है-

अनेक कंपनियां ने बीते कुछ हफ्तों में SEBI के साथ ड्राफ्ट रेड हेर्रिग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया है. DRHP में कंपनी के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी होती है. कोई भी कंपनी DRHP पर SEBI की आपत्ति नहीं होने के बाद ही अपना इशू ला सकती है.

कैसे हो सकता है इस वर्ष IPO मार्केट ऐतिहासिक?

अप्रैल और मई महीने में अब तक कुल 20 कंपनियों ने प्रॉस्पेक्टस फाइल किया है. इसमें से केवल 17 मई को ही 5 कंपनियों ने DRHP पर स्वीकृति लेने के लिए SEBI का दरवाजा खटखटाया था. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही ये कंपनियां अपने IPO के साथ आयेंगी. अगर IPO का बाजार ऐसे ही गर्म रहा तो इन पब्लिक इशू की संख्या बीते वित्त वर्ष के 30 इशू से ज्यादा हो सकती है.

पैसे जुटाए जाने की दृष्टि से भी यह वर्ष IPO बाजार के लिए ऐतिहासिक होने वाला है. वित्त वर्ष 2017-18 में अब तक सर्वाधिक 81,553 करोड़ IPO द्वारा जुटाए गए हैं. वहीं इस साल सिर्फ LIC के आने वाले इशू के ही 70000 करोड़ के आसपास के होने की उम्मीद की जा रही है.

ADVERTISEMENT

क्या है कंपनियों में IPO की रुचि के पीछे वजह?

IPO किसी भी कंपनी के लिए एक अहम पड़ाव होता है. वर्तमान में अनेकों कंपनियों द्वारा खुद को अपने IPO के लिए तैयार करने के पीछे कई वजहें हैं.

कोविड की सुधरती स्थिति से निवेशकों में मार्केट को लेकर सेंटीमेंट अच्छा दिख रहा है. RBI द्वारा किए गए ऐलानों और संभावित घोषणाओं से मार्केट में लिक्विडिटी रहने की उम्मीद है. इस वजह से कंपनियां बाजार के बुलिश सेंटीमेंट का फायदा उठाना चाहती हैं. कम जानी मानी कंपनियां भी ऐसे समय में निवेशकों की बड़ी रूचि की उम्मीद करती हैं.

SEBI द्वारा प्राइमरी मार्केट संबंधी नियमों में किए गए बदलावों से अब कम समय में IPO लाना आसान हो गया है. इस कारण भी कंपनियां मार्केट की स्थिति को देखते हुए अपने इशू को जल्दी लाने तैयारी में जुट गई है. कुछ जानकारों के अनुसार मई तक DRHP फाइल करने पर कंपनियों को दिसंबर तिमाही के रिजल्ट को ही रिपोर्ट करना होता है. ऐसे में कंपनियां इसका भी फायदा उठाना चाहती हैं.

बीते वर्ष लॉकडाउन के बाद किए गए ऐलानों से बाजार में लिक्विडिटी काफी बढ़ी थी. इस समय आने वाले लगभग हर IPO की लिस्टिंग काफी शानदार रही. कंपनियां दूसरी लहर से उबरती स्थिति में भी मिलती जुलती स्थिति की उम्मीद कर रही हैं.
ADVERTISEMENT

किन कंपनियों का नाम है सूची में?

DRHP फाइल करने वाली कंपनियों की सूची में अलग-अलग क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं. अप्रैल-मई के दौरान प्रॉस्पेक्टस फाइल करने वाली कंपनियों में ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज, विंडलास बायोटेक और सुप्रिया लाइफसाइंसेज समेत 6 कंपनियां हेल्थकेयर सेक्टर की हैं. केमिकल सेक्टर की कंपनी केमप्लास्ट संमार और क्लीन साइंसेज एंड टेक्नोलॉजीज ने भी इस दौरान lPO के लिए काम आगे बढ़ाया है. ऐसी कंपनियों की सूची में आदित्य बिड़ला सनलाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी, गो एयरलाइन्स, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक और पिज्जा हट, KFC की फ्रैंचाइजी देवयानी इंटरनेशनल भी शामिल हैं. जोमैटो ने भी अप्रैल के अंतिम हफ्ते में अपने बहुप्रतीक्षित IPO के लिए DRHP फाइल कर दिया था.

फरवरी और मार्च महीनों में भी कुल 15 कंपनियों ने अपने IPO के लिए फाइलिंग की थी. इनमें से ज्यादातर कंपनियां बाजार में लिस्ट हो चुकी हैं
ADVERTISEMENT

निवेशक किन बातों का रखें ध्यान?

अब जब कोविड की स्थिति में सुधार के बाद अनेकों कंपनियों के एक साथ IPO लाने की उम्मीद है, निवेशकों को सही इशू के चयन के लिए कुछ अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए. बुलिश मार्केट में देखा गया है कि अच्छी लिस्टिंग के बावजूद भी कुछ कंपनियां जल्द ही निवेशकों को निराश कर देती हैं.

  1. जिन कंपनियों में निवेश की संभावना देख रहे हैं उसके फाइनेंशियल्स को समझे. निवेश से पहले कंपनी के सही वैल्यूएशन की समझ काफी सहायक होती है.

  2. कंपनी के भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं में मैनेजमेंट की अहम भूमिका होती है. ऐसे में प्रमोटर्स और मैनेजमेंट के बारे में जानकारी अच्छा निवेश ढूंढने में मददगार हो सकती है.

  3. इन्वेस्टर्स के लिए केवल लिस्टिंग गेंस के लिए निवेश कभी कभी सही रणनीति नहीं होता. लिस्टिंग के समय तक बदली बाजार की स्थिति में ऐसे में नुकसान भी झेलना पड़ सकता है.

  4. अर्थव्यवस्था की स्थिति और कंपनी का क्षेत्र (सेक्टर) भी शेयर कीमतों की तेजी को निर्धारित करने में अहम फैक्टर हो सकते हैं. ऐसे में इन बातों को ध्यान में रखकर कंपनी का चयन ज्यादा मुनाफा बना सकता है.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!
ADVERTISEMENT