मध्य प्रदेश में निवेश के पांच बड़े कारण

मध्य प्रदेश इज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में प्रमुख राज्य के तौर पर उभर रहा है

Updated06 Jan 2020, 09:24 AM IST
बिजनेस न्यूज
4 min read

1. मध्य प्रदेश से देश के हर हिस्से तक पहुंचना आसान

मध्य प्रेदश, देश के ठीक बीच में स्थित है और इसकी सीमाएं दूसरे पांच राज्यों से इसे जोड़ती हैं. इस अनुकूल भौगोलिक स्थिति की वजह से राज्य की पहुंच देश की 50% जनसंख्या तक हो जाती है. मध्य प्रदेश से पश्चिमी और पूर्वी समुद्री बंदरगाह भी 1000 किलोमीटर के दायरे में ही हैं, जिन तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. जैसे, इंदौर से जे.एन.पी.टी. (JNPT), जबलपुर से पारादीप, इंदौर से कांडला, रीवां से हल्दिया और जबलपुर से विशाखापत्तनम. जी.एस.टी. (GST) लागू होने के बाद जब कच्चा-माल और उत्पाद, बिना रुकावट के देश के किसी भी शहर से लाए-ले-जाए जा रहे हैं, तो ऐसे में मध्य प्रदेश औद्योगिक उत्पादन के लिए और भी बेहतर विकल्प बन गया है. राज्य में सड़कों का 2,30,000 किलोमीटर का विस्तृत जाल है, यहां सात कंटेनर डिपो, इंदौर में एक अतंर्राष्ट्रीय हवाई कार्गों की सुविधा है. मध्य प्रदेश में पांच व्यावसायिक एयरपोर्ट भी हैं जिनसे 100 से अधिक उड़ानें रोज भरी जाती हैं, और हर रोज यहां 550 से ज्यादा ट्रेनें भी चलती हैं.

2. बेहतर औद्योगिक माहौल की मौजूदगी

मध्य प्रदेश लगातार सन 2004-05 से राजस्व के मुनाफे वाला प्रदेश रहा है. यहां 2017-18 से 2018-19 में राजस्व वृद्धि की दर 17.8 प्रतिशत रही. मौजूदा राज्य सरकार के तहत, साल 2019-20 के दौरान प्रदेश का पूंजी-व्यय 21 प्रतिशत तक बढ़ गया. मध्य प्रदेश की अच्छी आर्थिक स्थिति का अंदाजा कर्जभार के घटने से भी लगाया जा सकता है जो साल 2003-04 में 22.4 प्रतिशत के मुकाबले घट कर 2019-20 में 13 प्रतिशत अनुमानित है. मध्य प्रदेश का औद्योगिक वातावरण विकसित और समृद्ध है. यहां 300 से ज्यादा बड़ी कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं. कुछ मुख्य क्षेत्रों की बात करें तो प्रदेश में टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग में – ट्राइडेंट, वर्धमान, ग्रासिम, प्रतिभा सिनटैक्स और नाहर जैसी कंपनियां हैं. फ़ूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में – आई.टी.सी. (ITC), पार्ले, हर्शीज, कोका-कोला, मोन्डेलेज हैं. ऑटो और निर्माण में – जॉन डीर, वोल्वो, आइशर, महिन्द्रा एंड महिंद्रा, फोर्स, टैफे और फार्मासूटिकल्स के क्षेत्र में – सिप्ला, लूपेन, ग्लेनमार्क, नोवार्टिस और मैलान जैसी बड़ी कंपनियां मौजूद हैं.

3. आसान बिजनेस और अत्याधुनिक औद्योगिक ढांचा

मध्य प्रदेश कई तरह के खनिज, कोयला और हीरे जैसे प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध है. यही नहीं, प्रदेश बेहतर ऑद्योगिक विकास के लिए बेहद जरूरी, अत्याधुनिक ढांचे की क्षमता से भी लैस है। उदाहरण के लिए राज्य अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली का उत्पादन करता है, प्रदेश की बिजली की उत्पादन क्षमता 23,000 मैगावॉट से अधिक है. प्रदेश सरकार इस बात की भी गांरटी लेती है कि एम.पी.आई.डी.सी. (MPIDC) के ऑद्योगिक पार्कों में बिजली और पानी की सप्लाई बिना रुकावट के दी जाएगी. इसके अलावा, भंडारण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश में मौजूद सात आई.सी.डी. (ICD) की भंडार क्षमता 26 लाख टन है. यहां मौजूद कई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस औद्योगिक पार्क मध्य प्रदेश में उद्योगों की स्थिति को और बेहतर बना देते हैं.

मौजूदा राज्य सरकार की कोशिश रही है कि सभी जरूरी सरकारी अनुमतियों को ऑनलाइन उपल्ब्ध कराया जाए. इस दिशा में लगातार किए गए प्रयासों ने मध्य प्रदेश में व्यवसाय को आसान बना दिया है. राज्य का इन्वेस्ट पोर्टल (INVEST) निवेश के प्रस्तावों की सभी जरूरतों को पूरा करता है जैसे, पोर्टल व्यवसाय शुरु करने से पहले के प्रस्ताव और शुरुआती सहायता की प्रक्रिया के सभी कामों के लिए सक्षम है. इसके जरिए अब 32 तरह की सेवाएं ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती हैं. इन्हीं नीतियों के चलते मध्य प्रदेश को 2018 के बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) की सातवीं रैंकिग हासिल हुई.

4. बहुतायत भूमि और प्रशिक्षित कर्मियों की

मध्य प्रदेश में पांच बड़े औद्योगिक इलाके हैं जो कई क्षेत्रों के लिए उपयोगी हैं. भोपाल औद्योगिक क्षेत्र में 2,704 हैक्टेयर का विकसित क्षेत्र है जिसमें मंदीदीप, पिल्लूखेड़ी, मोहासा-बाबरी और पिपरिया जैसे ग्रोथ सेंटर शामिल हैं. इंदौर औद्योगिक क्षेत्र सबसे बड़ा है और इसका विकसित एरिया 5,425 हैक्टेयर है. यहां पीथमपुर, खेड़ा, मेघ नगर, उज्जैन, देवास, मक्सी और जग्गाखेड़ी सेंटर हैं. ग्वालियर क्षेत्र के तहत 1,905 हैक्टेयर का एरिया विकसित है जिसके मुख्य ग्रोथ सेंटर मानलपुर, बानमोर और चैनपुरा हैं. रीवां क्षेत्र के इलाके में 257.3 हैक्टेयर का विकसित क्षेत्र है जिसके बड़े सेंटरों में वैधान, मइहर और नंदन टोला हैं. जबलपुर औद्योगिक क्षेत्र का विकसित एरिया 2056.6 हैक्टेयर है जहां बारगांव, मानेरी, लमतारा और कटनी बड़े ग्रोथ सेंटर हैं. इन पांच औद्योगिक क्षेत्रों में कई बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं जैसे ऑटो, फार्मासूटिकल्स, टैक्सटाइल, फूड-प्रोसेसिंग, आई.टी./आई.टी.ई.एस. (IT/ ITeS, ESDM), सिमेंट और माइनिंग.

मध्य प्रदेश की एक और उप्लब्धि है कि यहां प्रशिक्षित कामगार बड़ी संख्या में मौजूद हैं. प्रदेश में कई बड़े प्रशिक्षण संस्थानों के होने की की वजह से ये संभव हो पाया है. यहां कई बड़े संस्थान हैं जैसे – आई.आई.एम. (IIM), आई.आई.टी. (IIT), एम्स (AIIMS), एन.एल.आई.यू. (NLIU), एन.आई.डी. (NID), एम.ए.एन.आई.टी. (MANIT) जहां से हर साल दो लाख से ज्यादा युवा तकनीकी योग्यता हासिल करते हैं. देश में आबादी के लिहाज से पांचवें नंबर के इस प्रदेश में ग्लोबल स्किल पार्क प्रशिक्षित युवाओं को बड़ी संख्या में तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.

5. अनुकूल नीतियां और बेहतर जीवन

मध्य प्रदेश सरकार के नए नीतिगत फैसलों ने ये पक्का किया है कि उद्योगों और व्यापार के लिए जमीन और बिजली उचित दामों पर मिल सके. राज्य सरकार ने हर औद्योगिक क्षेत्र की अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक अपनी नीतियां बनाने को प्राथमिकता दी है. प्रदेश सरकार ने पूंजी-निवेश प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक मदद को अपनी योजनाओं का हिस्सा बनाया है. राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने टैरिफ में छूट, ड्यूटी में रियायत, और जरूरत के मुताबिक राहत पैकेज तैयार किए हैं. मध्य प्रदेश की ‘टैक्स डी-लिंक्ड’ (‘tax delinked’ investment assistance policy) निवेश सहायता नीति का लक्ष्य रोजगार बढ़ाना, ब्लाक विकास की प्राथमिकता और बेहतर कुशलता के लिए ट्रेनिंग देना है.

इसके साथ ही, मध्य प्रदेश सरकार लगातार कोशिशों में जुटी है कि प्रदेश के शहरों में प्रदूषण कम हो जिससे शहरी वातावरण लोगों के लिए बेहतर बन सके. राज्य में साफ-सफाई के लिए लिए बड़ी मुहिम चलाई गई हैं. हाल ही में इंदौर को देश के सबसे साफ शहर का दर्जा प्राप्त हुआ. इसके अलावा उज्जैन, देवास, खरगौन, भोपाल और नागदा स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में भारत के टॉप 20 शहरों में भी शामिल हुए.

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Published: 31 Oct 2019, 11:46 AM IST
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