Toyota बोली- ज्यादा टैक्स की वजह से भारत में नहीं करेंगे विस्तार 

पिछले दिनों मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन ने भी भारत में ज्यादा टैक्स की बात कही थी

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बिजनेस न्यूज
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Toyota बोली- ज्यादा टैक्स की वजह से भारत में नहीं करेंगे विस्तार 

टोयोटा (Toyota) ने कहा है कि वो भारत में ज्यादा टैक्स की वजह से यहां अपना विस्तार नहीं करेगी. कोरोना वायरस महामारी के बीच बढ़े आर्थिक संकट के दौरान यह कदम मोदी सरकार के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जो ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश में है.

भारत मैन्युफैक्चरिंग की स्थापना के लिए फर्मों को आकर्षित करने के लिए 23 बिलियन डॉलर के इंसेंटिव्स देने की योजना बना रहा है, ब्लूमबर्ग ने मामले से संबंधित लोगों के हवाले से यह बात कही है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, दक्षिण एशियाई देश दुनिया में चौथा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन इंटरनेशन प्लेयर्स ने एक ऐसे क्षेत्र में जगह पाने के लिए संघर्ष किया है, जहां सस्ते और फॉसिल-फ्यूल वाले वाहनों का दबदबा है.

टोयोटा की स्थानीय यूनिट, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के वाइस चेयरमैन शेखर विश्वनाथन का कहना है कि सरकार ने कारों और मोटरबाइकों पर टैक्स को इतना ज्यादा रखा है कि कंपनियों को मुश्किल हो रही है.

विश्वनाथन ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘’हमें यहां आने और निवेश करने के बाद जो संदेश मिल रहा है, वो यह है कि हम आपको नहीं चाहते.’’ कोई भी सुधार न होने की सूरत को लेकर उन्होंने कहा, ‘’हम भारत से बाहर नहीं निकलेंगे, लेकिन हम अपना दायरा नहीं बढ़ाएंगे.’’

टोयोटा, दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक है, जिसने 1997 में भारत में परिचालन शुरू किया था. इसकी स्थानीय इकाई का स्वामित्व जापानी कंपनी के पास 89% है और इसकी छोटी बाजार हिस्सेदारी है - अगस्त में केवल 2.6%, जो कि एक साल पहले लगभग 5% थी. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के डेटा से यह बात पता चलती है.

भारत में यात्री वाहनों पर सर्वाधिक 28 फीसदी की दर से जीएसटी लगता है. इसके ऊपर वाहन के इंजन साइज, लंबाई आदि के आधार पर 1 फीसदी से लेकर 22 फीसदी तक उपकर भी लगता है.

पिछले दिनों मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा था कि भारत में दूसरे देशों की तुलना में कारों पर टैक्स की दरें ज्यादा हैं. उन्होंने कहा था कि यह कार खरीदने को इच्छुक कई लोगों के लिए बाधा का काम करता है. उन्होंने कहा था कि यूरोपीय संघ (ईयू) में वैट 19 फीसदी है और इसके अलावा कोई अन्य टैक्स नहीं है, जापान में टैक्स लगभग 10 फीसदी है.

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